पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने कटिहार मंडल के अंतर्गत 6.8 किलोमीटर लंबी रंगापानी-बागडोगरा रेल लाइन को नियमित माल परिवहन के लिए खोल दिया है। इससे इस रूट पर प्रतिदिन कम से कम 10 अतिरिक्त मालगाड़ियां चलाने की क्षमता मिलने का अनुमान है। रेलवे के अनुसार, इस कदम से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के परिचालन में लगने वाला समय भी बचेगा। विद्युतीकरण के बाद अब सामान्य मालगाड़ियों को भी अनुमति रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इस रेलखंड का अपग्रेडेशन और विद्युतीकरण पिछले साल पूरा हो गया था। ट्रैक को इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन चलाने के अनुकूल बनाया गया था, लेकिन अब तक इस पर केवल सैन्य ट्रेनें ही चलती थीं। सामान्य मालगाड़ियों को इस मार्ग से परिचालन की अनुमति नहीं थी। अब NFR ने इस लाइन को नियमित माल परिवहन के लिए भी खोल दिया है। रेलवे ने इसे माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सिलीगुड़ी जंक्शन पर इंजन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी इस नई व्यवस्था का फायदा पूर्व मध्य रेलवे (ECR) से आने वाली मालगाड़ियों को भी मिलेगा। अब तक फारबिसगंज के रास्ते NFR नेटवर्क में प्रवेश करने वाली इन ट्रेनों को सिलीगुड़ी जंक्शन पर इंजन की दिशा बदलने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। रेलवे की भाषा में इसे लोको रिवर्सल कहा जाता है। इस प्रक्रिया में इंजन को ट्रेन के एक छोर से हटाकर दूसरे छोर पर लगाना, ब्रेक पावर टेस्ट करना, शंटिंग और नए क्रू की व्यवस्था करना शामिल होता है। शंटिंग स्टाफ और अतिरिक्त क्रू की जरूरत भी होगी कम इसमें करीब 45 मिनट से एक घंटे तक लगने की जानकारी दी गई है। इस दौरान समय के साथ ईंधन या बिजली की भी खपत होती है। नई व्यवस्था के बाद संबंधित मालगाड़ियां बागडोगरा के रास्ते आगे बढ़ सकेंगी। इससे लोको रिवर्सल में लगने वाला समय और ऊर्जा बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही शंटिंग स्टाफ और अतिरिक्त क्रू की जरूरत भी कम होगी। बारसोई जंक्शन से आगे बढ़ेगी माल ढुलाई क्षमता NFR के अधिकारियों के अनुमान के अनुसार, इस अतिरिक्त रेल मार्ग के इस्तेमाल से नेटवर्क में प्रतिदिन कम से कम 10 अतिरिक्त मालगाड़ियां चलाने की क्षमता विकसित होगी। इन ट्रेनों को बारसोई जंक्शन से आगे भेजा जा सकेगा। इससे उत्तर बंगाल और बिहार के बीच माल परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। खाद्यान्न, सीमेंट, खाद और अन्य जरूरी सामानों की ढुलाई अधिक सुगमता से हो सकेगी। मौजूदा रेल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होने से माल परिवहन और रेलवे के राजस्व में भी बढ़ोतरी की संभावना है। यात्री ट्रेनों के परिचालन की मांग भी उठ रही रंगापानी-बागडोगरा रेलखंड को यात्री ट्रेनों के लिए खोलने की मांग भी लंबे समय से उठाई जा रही है। स्थानीय रेल यात्री संगठन और जनप्रतिनिधि इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों का परिचालन शुरू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस रेलखंड पर यात्री ट्रेनों के चलने से सिलीगुड़ी और बागडोगरा क्षेत्र के दैनिक यात्रियों को सुविधा मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल इस लाइन को सामान्य माल परिवहन के लिए खोला गया है। यात्री ट्रेनों के परिचालन को लेकर किसी निर्णय की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने कटिहार मंडल के अंतर्गत 6.8 किलोमीटर लंबी रंगापानी-बागडोगरा रेल लाइन को नियमित माल परिवहन के लिए खोल दिया है। इससे इस रूट पर प्रतिदिन कम से कम 10 अतिरिक्त मालगाड़ियां चलाने की क्षमता मिलने का अनुमान है। रेलवे के अनुसार, इस कदम से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के परिचालन में लगने वाला समय भी बचेगा। विद्युतीकरण के बाद अब सामान्य मालगाड़ियों को भी अनुमति रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इस रेलखंड का अपग्रेडेशन और विद्युतीकरण पिछले साल पूरा हो गया था। ट्रैक को इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन चलाने के अनुकूल बनाया गया था, लेकिन अब तक इस पर केवल सैन्य ट्रेनें ही चलती थीं। सामान्य मालगाड़ियों को इस मार्ग से परिचालन की अनुमति नहीं थी। अब NFR ने इस लाइन को नियमित माल परिवहन के लिए भी खोल दिया है। रेलवे ने इसे माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सिलीगुड़ी जंक्शन पर इंजन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी इस नई व्यवस्था का फायदा पूर्व मध्य रेलवे (ECR) से आने वाली मालगाड़ियों को भी मिलेगा। अब तक फारबिसगंज के रास्ते NFR नेटवर्क में प्रवेश करने वाली इन ट्रेनों को सिलीगुड़ी जंक्शन पर इंजन की दिशा बदलने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। रेलवे की भाषा में इसे लोको रिवर्सल कहा जाता है। इस प्रक्रिया में इंजन को ट्रेन के एक छोर से हटाकर दूसरे छोर पर लगाना, ब्रेक पावर टेस्ट करना, शंटिंग और नए क्रू की व्यवस्था करना शामिल होता है। शंटिंग स्टाफ और अतिरिक्त क्रू की जरूरत भी होगी कम इसमें करीब 45 मिनट से एक घंटे तक लगने की जानकारी दी गई है। इस दौरान समय के साथ ईंधन या बिजली की भी खपत होती है। नई व्यवस्था के बाद संबंधित मालगाड़ियां बागडोगरा के रास्ते आगे बढ़ सकेंगी। इससे लोको रिवर्सल में लगने वाला समय और ऊर्जा बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही शंटिंग स्टाफ और अतिरिक्त क्रू की जरूरत भी कम होगी। बारसोई जंक्शन से आगे बढ़ेगी माल ढुलाई क्षमता NFR के अधिकारियों के अनुमान के अनुसार, इस अतिरिक्त रेल मार्ग के इस्तेमाल से नेटवर्क में प्रतिदिन कम से कम 10 अतिरिक्त मालगाड़ियां चलाने की क्षमता विकसित होगी। इन ट्रेनों को बारसोई जंक्शन से आगे भेजा जा सकेगा। इससे उत्तर बंगाल और बिहार के बीच माल परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। खाद्यान्न, सीमेंट, खाद और अन्य जरूरी सामानों की ढुलाई अधिक सुगमता से हो सकेगी। मौजूदा रेल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होने से माल परिवहन और रेलवे के राजस्व में भी बढ़ोतरी की संभावना है। यात्री ट्रेनों के परिचालन की मांग भी उठ रही रंगापानी-बागडोगरा रेलखंड को यात्री ट्रेनों के लिए खोलने की मांग भी लंबे समय से उठाई जा रही है। स्थानीय रेल यात्री संगठन और जनप्रतिनिधि इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों का परिचालन शुरू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस रेलखंड पर यात्री ट्रेनों के चलने से सिलीगुड़ी और बागडोगरा क्षेत्र के दैनिक यात्रियों को सुविधा मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल इस लाइन को सामान्य माल परिवहन के लिए खोला गया है। यात्री ट्रेनों के परिचालन को लेकर किसी निर्णय की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

