यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सीट बंटवारे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सोमवार को पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी की अगुआई में यूपी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की करीब ढाई घंटे बैठक हुई। इसमें गठबंधन और सीट शेयरिंग पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने इस बार 85 से 87 सीटों से कम पर गठबंधन नहीं करने का मन बनाया है। पार्टी ने 55 सीटों को A कैटेगरी में रखा है, जिन पर वह किसी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं है। बैठक दोपहर 2 बजे से शाम 4:30 बजे तक चली। इसमें यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद मौजूद रहे। बैठक में तय किया गया कि सपा के साथ गठबंधन और सीट बंटवारे की बातचीत 15 नवंबर तक हर हाल में पूरी कर ली जाए। कांग्रेस का जोर है कि सीटों पर सहमति समय रहते बन जाए, ताकि चुनावी तैयारियों के लिए पर्याप्त समय मिल सके। अमेठी, रायबरेली और सहारनपुर की सभी सीटों पर दावा कांग्रेस ने अमेठी, रायबरेली और सहारनपुर लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की है। इसके अलावा पार्टी हर जिले में कम से कम एक सीट पर अपना प्रत्याशी उतारना चाहती है। इसमें शहरी और ग्रामीण, दोनों तरह की सीटें शामिल होंगी। सूत्रों के मुताबिक, यूपी कांग्रेस के नेताओं ने प्रियंका गांधी के सामने 85 से 87 सीटों का प्रस्ताव रखा है। इनमें 55 सीटें A कैटेगरी में हैं। कांग्रेस का आकलन है कि इन सीटों पर उसका संगठन और चुनावी स्थिति मजबूत है। पार्टी का दावा है कि सर्वे में भी 50 से 55 सीटों पर उसकी स्थिति बेहतर सामने आई है। 55 सीटों पर समझौते के मूड में नहीं कांग्रेस A कैटेगरी की सीटों में उन 17 लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली 85 विधानसभा सीटों में से 39 सीटें भी शामिल हैं, जहां कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़त हासिल की थी। बैठक से जुड़े एक नेता के मुताबिक, पार्टी इन सीटों पर अपनी दावेदारी से पीछे हटने को तैयार नहीं है। इन 55 सीटों में करीब 12 ऐसी हैं, जहां फिलहाल सपा के विधायक हैं। अमेठी, रायबरेली और सहारनपुर के विधानसभा क्षेत्रों में सपा ने पिछली बार आठ सीटें जीती थीं। इनमें से दो विधायकों के अब सपा से दूर हो जाने की बात कही जा रही है। कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जिन्हें पिछली बार सपा ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के खाते में दिया था, लेकिन वहां प्रत्याशी सपा के चुनाव चिह्न पर उतरे थे। कांग्रेस ने ऐसी सीटों पर भी अपना दावा जताया है। पार्टी का तर्क है कि पुराने चुनावी प्रदर्शन और स्थानीय राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इन सीटों पर उसकी दावेदारी बनती है। B कैटेगरी में 32 से 35 सीटें कांग्रेस ने 32 से 35 सीटों को B कैटेगरी में रखा है। पार्टी का आकलन है कि सपा के साथ गठबंधन होने और चुनाव में पूरी ताकत लगाने पर इन सीटों में से कई पर जीत हासिल की जा सकती है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलनों के बाद पार्टी की राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है। सूत्रों के मुताबिक, हालिया प्रदर्शनों में यूपी से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचे थे। पार्टी को उम्मीद है कि 1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित राहुल गांधी की रैली के बाद संगठन को और मजबूती मिलेगी। 175 सीटों पर चर्चा, 150 सीटों से शुरू होगी बातचीत बैठक में यूपी की करीब 175 विधानसभा सीटों पर चर्चा हुई। इन सीटों का चयन पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन के आधार पर किया गया है। पार्टी 2009 के बाद हुए चुनावों के नतीजों को भी आकलन में शामिल किया है। कांग्रेस की रणनीति है कि सपा के साथ बातचीत करीब 150 सीटों की सूची के आधार पर शुरू की जाए। पार्टी का दावा है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन के तहत उसे 104 सीटें मिली थीं। इसके अलावा 10 सीटों पर दोनों दलों के बीच फ्रेंडली फाइट हुई थी, जिनमें कांग्रेस सात सीटें जीतने में सफल रही थी। पार्टी के मुताबिक, 44 सीटों पर उसके प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे थे। गठबंधन नहीं हुआ तो दूसरे दलों का विकल्प बैठक में इस पर भी चर्चा हुई कि यदि सपा के साथ गठबंधन और सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बनती है तो कांग्रेस क्या विकल्प अपनाएगी। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने दूसरे दलों के साथ गठबंधन की संभावना भी खुली रखी है। कांग्रेस का मानना है कि इस बार सपा के साथ बातचीत में उसे अपनी सीटों की दावेदारी मजबूती से रखनी चाहिए। वहीं, सपा के लिए भी गठबंधन महत्वपूर्ण है। हालांकि, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या और अलग-अलग सीटों पर दावेदारी को लेकर अंतिम सहमति बातचीत के बाद ही सामने आएगी। प्रियंका गांधी की भूमिका अहम, दोनों दलों ने बनाई कमेटी सपा के साथ सीट बंटवारे की बातचीत में प्रियंका गांधी की भूमिका अहम रहने की संभावना है। कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी की अगुआई में यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना, कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद और केसी वेणुगोपाल की कमेटी सपा से शीट शेयरिंग पर बात करेगी। वहीं, सपा की ओर से अखिलेश यादव, प्रो. रामगोपाल यादव और अन्य नेताओं की कमेटी गठबंधन वार्ता में पार्टी का पक्ष रखेगी। दोनों दलों के बीच बातचीत का मुख्य आधार संभावित सीटों पर जीत की स्थिति, संगठन की ताकत और पिछले चुनावों का प्रदर्शन रहेगा।

