RSS News: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि देश में विरोध करने का रास्ता महात्मा गांधी ने दिखाया है। आंदोलन के दौरान पुलिस की मार झेलने और अपमान सहने के बावजूद बच्चों ने हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया। दलवई ने भागवत को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें गांधीजी की विचारधारा, तिरंगे और संविधान पर भरोसा रखना चाहिए।
दलवई ने कहा कि किसी को भी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह गांधीजी का देश है और यहां विरोध के नाम पर हिंसा नहीं होनी चाहिए। दलवई ने अपने बयान में विनायक दामोदर सावरकर का भी जिक्र किया और कहा कि मौजूदा आंदोलन गांधीजी के रास्ते पर चला है, सावरकर के नहीं।
पुलिस की कार्रवाई के बाद भी हिंसा नहीं करने का दावा
हुसैन दलवई ने कहा कि आंदोलन के दौरान बच्चों के साथ अन्याय हुआ, उन्हें पुलिस की मार झेलनी पड़ी और अपमान भी सहना पड़ा। इसके बावजूद किसी ने हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया। उनके मुताबिक, विरोध जताने का मतलब कानून तोड़ना या हिंसा करना नहीं है। अपनी बात रखने के लिए शांतिपूर्ण रास्ता अपनाना जरूरी है।
दलवई ने इस बात पर जोर दिया कि गांधीजी ने अहिंसा के जरिए विरोध करने का रास्ता दिखाया था। उनके बयान का मकसद आंदोलन के तरीके को गांधीजी के विचारों से जोड़ना और हिंसा से दूर रहने की बात कहना था।
भागवत को संगठन पर ध्यान देने की सलाह
कांग्रेस नेता ने आरएसएस प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पहले अपने संगठन को संभालना चाहिए। दलवई ने आरएसएस को कट्टरपंथी संगठन बताया और भागवत से गांधीजी की विचारधारा पर भरोसा रखने को कहा।
उन्होंने तिरंगे और संविधान का भी जिक्र किया। दलवई के मुताबिक, देश में विचारों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान जरूरी है।
गांधीजी की विचारधारा का किया जिक्र
हुसैन दलवई की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब विरोध प्रदर्शनों के तरीकों और उनमें हिंसा को लेकर बहस चल रही है। उन्होंने अपने बयान में साफ कहा कि किसी भी आंदोलन में हिंसा से बचना चाहिए। साथ ही, उन्होंने मोहन भागवत से गांधीजी के विचारों, तिरंगे और संविधान में विश्वास रखने की अपील की।

