मोतिहारी शिक्षक हत्याकांड- मुख्य आरोपी चमन ने कबूला जुर्म:20-30 बार लाठी से पीटा; घायल शमशाद को 2 घंटे स्कॉर्पियो में घुमाया, झाड़ी में छोड़ा

मोतिहारी शिक्षक हत्याकांड- मुख्य आरोपी चमन ने कबूला जुर्म:20-30 बार लाठी से पीटा; घायल शमशाद को 2 घंटे स्कॉर्पियो में घुमाया, झाड़ी में छोड़ा

मोतिहारी के बंजरिया थाना क्षेत्र के सिसवा गांव में शिक्षक शमशाद की हत्या के मुख्य आरोपी पूर्व प्रमुख चमन ने पुलिस पूछताछ में अपना जुर्म कबूल करने की बात कही है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में चमन ने हत्या की पूरी घटना के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि शमशाद से उसका काफी समय से विवाद चल रहा था और सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ लिखी जा रही बातों को लेकर वह नाराज था। सोशल मीडिया पर लिखने से मना किया, फिर दोनों में हुआ विवाद चमन के मुताबिक, वह शमशाद से कई बार सोशल मीडिया पर उसके बारे में लिखना बंद करने के लिए कह चुका था। 17 सितंबर को शमशाद स्कूल से घर लौट रहा था। इसी दौरान पंचायत सरकार भवन के पास दोनों की मुलाकात हो गई। चमन ने फिर शमशाद से सोशल मीडिया पर लिखना बंद करने को कहा। इसी बात पर दोनों के बीच गाली-गलौज शुरू हो गई। चमन का कहना है कि शमशाद ने उस पर हेलमेट से हमला किया, जिससे उसके हाथ में चोट लगी। इसके बाद गुस्से में उसने वहां रखी मोटी लाठी उठा ली और शमशाद पर हमला कर दिया। पूछताछ में चमन ने पुलिस को बताया कि उसने शमशाद पर करीब 20 से 30 बार लाठी से वार किए। उसके मुताबिक, इससे शमशाद के पैर में चोट लगी और सिर में अंदरूनी चोट आई। घायल शमशाद को स्कॉर्पियो में डालकर करीब 2 घंटे घुमाया चमन के अनुसार, उसे डर था कि शमशाद की मौत हो सकती है। इसलिए उसने घायल शमशाद को अपनी स्कॉर्पियो में डाल लिया और करीब दो घंटे तक इलाके में घूमता रहा। उसका कहना है कि इस दौरान शमशाद घायल अवस्था में भी उसे लगातार गाली दे रहा था। इसी बीच शमशाद के परिजनों को घटना की जानकारी मिल गई और वे उसकी तलाश करने लगे। चमन ने पुलिस को बताया कि पकड़े जाने के डर से उसने दूसरी थार गाड़ी मंगवाई और शमशाद को उसमें डाल दिया। इलाके से अनजान ड्राइवर ने नदी किनारे झाड़ी में छोड़ा चमन के मुताबिक, थार का ड्राइवर इलाके से अनजान था। डर के कारण उसने शमशाद को जनेरवा के पास नदी किनारे झाड़ी में छोड़ दिया और वहां से चला गया। कुछ देर बाद ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने शमशाद को सड़क किनारे घायल अवस्था में बरामद किया। पुलिस उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। चमन ने पुलिस को बताया कि शमशाद की मौत की जानकारी मिलते ही वह घर छोड़कर दूसरी जगह चला गया और वहां से पुलिस की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। घटना के अगले दिन ही मिल गई थी लाठी शमशाद की हत्या में इस्तेमाल की गई लाठी घटना के अगले दिन ही पुलिस को मिल गई थी। पुलिस जब जांच के लिए पंचायत सरकार भवन पहुंची थी, तब वहां से एक मोटी लाठी मिली थी। पुलिस ने उसे कब्जे में ले लिया था, लेकिन उस समय यह स्पष्ट नहीं था कि इसी लाठी से शमशाद पर हमला किया गया था। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में चमन ने पुलिस को बताया कि हेलमेट से हमला होने के बाद पंचायत सरकार भवन के पास पड़ी इसी मोटी लाठी से उसने शमशाद पर हमला किया था। चमन का इलाके में रहा है प्रभाव स्थानीय लोगों के अनुसार, चमन का इलाके में काफी प्रभाव रहा है। उसके पिता पंचायत के मुखिया रह चुके हैं। इसके बाद उसके छोटे भाई की पत्नी तान्या प्रवीण मुखिया बनीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्हें पंचायत में काम के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार समेत कई अन्य पुरस्कार मिल चुके हैं। चमन खुद पंचायत समिति का चुनाव जीतकर प्रमुख बना था। बाद में अविश्वास प्रस्ताव के बाद उसे प्रमुख की कुर्सी गंवानी पड़ी। बड़े नेताओं से संपर्क होने की बात कहते हैं ग्रामीण ग्रामीणों का कहना है कि चमन की बड़े नेताओं और प्रभावशाली लोगों के बीच उठना-बैठना रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसी वजह से उसने इलाके में अपना प्रभाव बना रखा था। घटना के बाद भी कुछ लोग उसके डर से कैमरे पर बयान देने से बच रहे हैं। 17 सितंबर को स्कूल से लौटते समय लापता हुआ था शमशाद 17 सितंबर को करीब साढ़े चार बजे शमशाद स्कूल से घर लौट रहा था। इसी दौरान वह लापता हो गया। करीब 5 बजे परिजन थाने पहुंचे और अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस को जानकारी दी। परिजनों का आरोप है कि उस समय पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। करीब साढ़े 8 बजे ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने जनेरवा नदी किनारे झाड़ी से शमशाद को घायल अवस्था में बरामद किया। अस्पताल ले जाने के दौरान उसकी मौत हो गई। करीब 9 बजे परिजनों को उसकी मौत की जानकारी दी गई। मौत के बाद सदर अस्पताल के बाहर सड़क जाम शमशाद की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने सदर अस्पताल के गेट पर शव रखकर सड़क जाम कर दिया। करीब साढ़े 9 बजे शुरू हुआ जाम 11 बजे के आसपास सदर एसडीओ अरुण कुमार और एसडीपीओ दिलीप कुमार के समझाने के बाद खत्म हुआ। इस दौरान एसडीओ ने खुद स्ट्रेचर खींचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। 18 सितंबर की सुबह पुलिस अधिकारी शमशाद के गांव सिसवा पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। उसी दिन दोपहर करीब 2 बजे ढाका विधायक फैसल रहमान भी शमशाद के घर पहुंचे और शव के साथ अंतिम संस्कार के लिए गए। 18 सितंबर को चमन पर 20 हजार का इनाम घोषित शमशाद हत्याकांड में पुलिस ने चमन की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की। 18 सितंबर को एसपी ने चमन पर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया। इसके बाद SIT भी लगातार उसकी तलाश में छापेमारी करती रही। 21 सितंबर को एसपी बंजरिया थाना पहुंचे और मृतक शिक्षक की पत्नी से मुलाकात की। इसके अगले दिन 22 सितंबर की दोपहर नगर थाना क्षेत्र के मधुबन छावनी से धर्म समाज जाने वाली सड़क के पास से चमन को गिरफ्तार कर लिया गया। 23 सितंबर को पुलिस ने चमन को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। मोतिहारी के बंजरिया थाना क्षेत्र के सिसवा गांव में शिक्षक शमशाद की हत्या के मुख्य आरोपी पूर्व प्रमुख चमन ने पुलिस पूछताछ में अपना जुर्म कबूल करने की बात कही है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में चमन ने हत्या की पूरी घटना के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि शमशाद से उसका काफी समय से विवाद चल रहा था और सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ लिखी जा रही बातों को लेकर वह नाराज था। सोशल मीडिया पर लिखने से मना किया, फिर दोनों में हुआ विवाद चमन के मुताबिक, वह शमशाद से कई बार सोशल मीडिया पर उसके बारे में लिखना बंद करने के लिए कह चुका था। 17 सितंबर को शमशाद स्कूल से घर लौट रहा था। इसी दौरान पंचायत सरकार भवन के पास दोनों की मुलाकात हो गई। चमन ने फिर शमशाद से सोशल मीडिया पर लिखना बंद करने को कहा। इसी बात पर दोनों के बीच गाली-गलौज शुरू हो गई। चमन का कहना है कि शमशाद ने उस पर हेलमेट से हमला किया, जिससे उसके हाथ में चोट लगी। इसके बाद गुस्से में उसने वहां रखी मोटी लाठी उठा ली और शमशाद पर हमला कर दिया। पूछताछ में चमन ने पुलिस को बताया कि उसने शमशाद पर करीब 20 से 30 बार लाठी से वार किए। उसके मुताबिक, इससे शमशाद के पैर में चोट लगी और सिर में अंदरूनी चोट आई। घायल शमशाद को स्कॉर्पियो में डालकर करीब 2 घंटे घुमाया चमन के अनुसार, उसे डर था कि शमशाद की मौत हो सकती है। इसलिए उसने घायल शमशाद को अपनी स्कॉर्पियो में डाल लिया और करीब दो घंटे तक इलाके में घूमता रहा। उसका कहना है कि इस दौरान शमशाद घायल अवस्था में भी उसे लगातार गाली दे रहा था। इसी बीच शमशाद के परिजनों को घटना की जानकारी मिल गई और वे उसकी तलाश करने लगे। चमन ने पुलिस को बताया कि पकड़े जाने के डर से उसने दूसरी थार गाड़ी मंगवाई और शमशाद को उसमें डाल दिया। इलाके से अनजान ड्राइवर ने नदी किनारे झाड़ी में छोड़ा चमन के मुताबिक, थार का ड्राइवर इलाके से अनजान था। डर के कारण उसने शमशाद को जनेरवा के पास नदी किनारे झाड़ी में छोड़ दिया और वहां से चला गया। कुछ देर बाद ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने शमशाद को सड़क किनारे घायल अवस्था में बरामद किया। पुलिस उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। चमन ने पुलिस को बताया कि शमशाद की मौत की जानकारी मिलते ही वह घर छोड़कर दूसरी जगह चला गया और वहां से पुलिस की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। घटना के अगले दिन ही मिल गई थी लाठी शमशाद की हत्या में इस्तेमाल की गई लाठी घटना के अगले दिन ही पुलिस को मिल गई थी। पुलिस जब जांच के लिए पंचायत सरकार भवन पहुंची थी, तब वहां से एक मोटी लाठी मिली थी। पुलिस ने उसे कब्जे में ले लिया था, लेकिन उस समय यह स्पष्ट नहीं था कि इसी लाठी से शमशाद पर हमला किया गया था। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में चमन ने पुलिस को बताया कि हेलमेट से हमला होने के बाद पंचायत सरकार भवन के पास पड़ी इसी मोटी लाठी से उसने शमशाद पर हमला किया था। चमन का इलाके में रहा है प्रभाव स्थानीय लोगों के अनुसार, चमन का इलाके में काफी प्रभाव रहा है। उसके पिता पंचायत के मुखिया रह चुके हैं। इसके बाद उसके छोटे भाई की पत्नी तान्या प्रवीण मुखिया बनीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उन्हें पंचायत में काम के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार समेत कई अन्य पुरस्कार मिल चुके हैं। चमन खुद पंचायत समिति का चुनाव जीतकर प्रमुख बना था। बाद में अविश्वास प्रस्ताव के बाद उसे प्रमुख की कुर्सी गंवानी पड़ी। बड़े नेताओं से संपर्क होने की बात कहते हैं ग्रामीण ग्रामीणों का कहना है कि चमन की बड़े नेताओं और प्रभावशाली लोगों के बीच उठना-बैठना रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसी वजह से उसने इलाके में अपना प्रभाव बना रखा था। घटना के बाद भी कुछ लोग उसके डर से कैमरे पर बयान देने से बच रहे हैं। 17 सितंबर को स्कूल से लौटते समय लापता हुआ था शमशाद 17 सितंबर को करीब साढ़े चार बजे शमशाद स्कूल से घर लौट रहा था। इसी दौरान वह लापता हो गया। करीब 5 बजे परिजन थाने पहुंचे और अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस को जानकारी दी। परिजनों का आरोप है कि उस समय पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। करीब साढ़े 8 बजे ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने जनेरवा नदी किनारे झाड़ी से शमशाद को घायल अवस्था में बरामद किया। अस्पताल ले जाने के दौरान उसकी मौत हो गई। करीब 9 बजे परिजनों को उसकी मौत की जानकारी दी गई। मौत के बाद सदर अस्पताल के बाहर सड़क जाम शमशाद की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने सदर अस्पताल के गेट पर शव रखकर सड़क जाम कर दिया। करीब साढ़े 9 बजे शुरू हुआ जाम 11 बजे के आसपास सदर एसडीओ अरुण कुमार और एसडीपीओ दिलीप कुमार के समझाने के बाद खत्म हुआ। इस दौरान एसडीओ ने खुद स्ट्रेचर खींचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। 18 सितंबर की सुबह पुलिस अधिकारी शमशाद के गांव सिसवा पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। उसी दिन दोपहर करीब 2 बजे ढाका विधायक फैसल रहमान भी शमशाद के घर पहुंचे और शव के साथ अंतिम संस्कार के लिए गए। 18 सितंबर को चमन पर 20 हजार का इनाम घोषित शमशाद हत्याकांड में पुलिस ने चमन की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की। 18 सितंबर को एसपी ने चमन पर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया। इसके बाद SIT भी लगातार उसकी तलाश में छापेमारी करती रही। 21 सितंबर को एसपी बंजरिया थाना पहुंचे और मृतक शिक्षक की पत्नी से मुलाकात की। इसके अगले दिन 22 सितंबर की दोपहर नगर थाना क्षेत्र के मधुबन छावनी से धर्म समाज जाने वाली सड़क के पास से चमन को गिरफ्तार कर लिया गया। 23 सितंबर को पुलिस ने चमन को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया।  

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