मुस्कान साहिल की अधिवक्ता बोलीं- हाईकोर्ट में अपील का अधिकार:मृत्युदंड की पुष्टि हाईकोर्ट से होगी, लीगल सर्विस कमेटी के माध्यम से मिल सकती है मदद

मुस्कान साहिल की अधिवक्ता बोलीं- हाईकोर्ट में अपील का अधिकार:मृत्युदंड की पुष्टि हाईकोर्ट से होगी, लीगल सर्विस कमेटी के माध्यम से मिल सकती है मदद

देशभर में चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में दोषी मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद उनकी अधिवक्ता रेखा जैन ने फैसले और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों दोषियों को फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार है। इसके लिए वे जेल अधीक्षक को अपनी इच्छा बता सकते हैं। इसके बाद जेल प्रशासन के माध्यम से अपील की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया अधिवक्ता रेखा जैन ने बताया कि मृत्युदंड के मामले में हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है। निचली अदालत की ओर से सुनाई गई फांसी की सजा पर हाईकोर्ट विचार करेगा। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की ओर से मामले की समीक्षा और पुष्टि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सजा को अमल में लाया जा सकता है। हाईकोर्ट मामले के तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद सजा की पुष्टि करने या उसमें बदलाव करने का निर्णय ले सकता है। हाईकोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। जेल अधीक्षक को बता सकते हैं अपनी इच्छा रेखा जैन ने कहा कि दोनों दोषियों की ओर से अपील करने का निर्णय उनकी इच्छा पर निर्भर करेगा। यदि वे हाईकोर्ट में अपील करना चाहते हैं तो जिला जेल के जेल अधीक्षक के सामने अपनी बात रख सकते हैं। इसके बाद नियमानुसार उनकी अपील की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि दोषियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए केवल जिला स्तर पर ही व्यवस्था नहीं है, बल्कि हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी भी काम करती है। वहां पैनल अधिवक्ता उपलब्ध हैं, जो बंदियों को निशुल्क कानूनी सहायता देते हैं। निशुल्क वकील की भी व्यवस्था अधिवक्ता ने बताया कि लीगल एंड डिफेंस काउंसिल के माध्यम से जिला स्तर पर बंदियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। वहीं, हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के माध्यम से भी अपील के लिए पैनल अधिवक्ता नियुक्त किए जा सकते हैं। ये अधिवक्ता बंदियों की ओर से अपील की पैरवी करते हैं। उन्होंने कहा कि कानूनी सहायता की व्यवस्था केवल ट्रायल तक सीमित नहीं है, बल्कि दोषसिद्धि के बाद अपील के चरण में भी बंदियों को निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। मुवक्किलों से बातचीत को बताया निजी फैसले के बाद मुस्कान और साहिल से हुई बातचीत के बारे में पूछने पर रेखा जैन ने कहा कि वकील और मुवक्किल के बीच हुई बातचीत गोपनीय होती है। इसलिए वह इस बारे में कोई जानकारी साझा नहीं कर सकतीं। मृत्युदंड पर हाईकोर्ट में विचार की उम्मीद अभियोजन पक्ष की ओर से इस हत्याकांड को दुर्लभतम श्रेणी का मामला बताए जाने और मृत्युदंड की मांग के संबंध में रेखा जैन ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में इस मामले में प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं थे और अभियोजन पक्ष की ओर से चार्जशीट में बताए गए कुछ महत्वपूर्ण गवाहों को भी पेश नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। उनके अनुसार, इन परिस्थितियों को देखते हुए मृत्युदंड के फैसले पर हाईकोर्ट में विचार होना चाहिए। रेखा जैन ने कहा कि उनकी नजर में इस मामले में मृत्युदंड नहीं दिया जाना चाहिए था। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट में अपील के दौरान मामले के साक्ष्यों और परिस्थितियों पर दोबारा विचार किया जाएगा। हालांकि, अंतिम निर्णय हाईकोर्ट को ही लेना है। दोनों दोषियों को अपील का अधिकार है और आगे की कानूनी प्रक्रिया उसी के अनुसार चलेगी। हालांकि,अपील पर अंतिम फैसला हाईकोर्ट ही करेगा।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *