मुस्कान टेढ़ी और चेहरे का एक हिस्सा सुन्न या कमजोर होना हो सकता है Bell’s Palsy, मेयो क्लिनिक से जानें लक्षण और कारण

मुस्कान टेढ़ी और चेहरे का एक हिस्सा सुन्न या कमजोर होना हो सकता है Bell’s Palsy, मेयो क्लिनिक से जानें लक्षण और कारण

Bell’s Palsy Symptoms: सुबह उठते ही अगर आपको महसूस हो कि आपके चेहरे का एक हिस्सा अचानक ढीला पड़ गया है, आंख बंद करने में दिक्कत आ रही है या हंसते समय होंठ एक तरफ खिंच रहे हैं, तो यह स्थिति किसी को भी डरा सकती है। अक्सर लोग इसे ब्रेन स्ट्रोक समझकर घबरा जाते हैं। हालांकि, चेहरे की यह अचानक आई कमजोरी या लकवा Bell’s Palsy (बेल्स पाल्सी) का लक्षण हो सकता है। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) और क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) की रिपोर्ट्स के अनुसार, बेल्स पाल्सी एक ऐसी स्थिति है जिसमें चेहरे की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका यानी नर्व (Facial Nerve) में सूजन या खिंचाव आ जाता है। यह बीमारी अचानक उभरती है और अधिकतर मामलों में चेहरे के केवल एक ही तरफ असर डालती है।आइए समझते हैं कि बेल्स पाल्सी क्या है, इसके पीछे क्या कारण होते हैं, शरीर में क्या लक्षण दिखते हैं और इससे बचाव या सुधार कैसे संभव है।

क्या है बेल्स पाल्सी (Bell’s Palsy)?

मेयो क्लिनिक की मानें तो हमारे चेहरे की हाव-भाव, जैसे मुस्कुराना, आंखें झपकाना या माथे पर शिकन लाना इन सब गतिविधियों को दिमाग से आने वाली फेशियल नर्व (7th Cranial Nerve) संचालित करती है। जब किसी संक्रमण या कारण से इस नस में सूजन, दबाव या सूजन आ जाती है, तो नस का सिग्नल मांसपेशियों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाता। इसके परिणामस्वरूप, चेहरे के एक हिस्से की मांसपेशियां अचानक कमजोर पड़ जाती हैं या पूरी तरह सुन्न होकर लटकने लगती हैं। राहत की बात यह है कि बेल्स पाल्सी ज्यादातर मामलों में अस्थायी होती है और सही समय पर देखभाल मिलने से मरीज 3 से 6 महीनों में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।

बेल्स पाल्सी के मुख्य लक्षण

  • चेहरे का एक तरफ ढलना।
  • आंख बंद करने में कठिनाई।
  • मुंह से लार या पानी गिरना।
  • कान के पीछे दर्द होना।
  • स्वाद में बदलाव महसूस होना।
  • आवाज के प्रति संवेदनशीलता होना।

बेल्स पाल्सी के कारण और ट्रिगर्स

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, हालांकि बेल्स पाल्सी का कोई एक सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुख्य रूप से किसी वायरल इंफेक्शन के कारण नसों में आई सूजन से जुड़ा होता है। कुछ मुख्य वायरस जो इसका कारण बन सकते हैं;

  • हर्पीज सिम्प्लेक्स (Herpes Simplex)।
  • चिकनपॉक्स और शिंगल्स का वायरस (Varicella-zoster)।
  • सर्दी-जुकाम और फ्लू के वायरस।
  • एप्स्टीन-बार वायरस (Epstein-Barr)।

किन्हें होता है सबसे ज्यादा खतरा?

  • गर्भवती महिलाएं।
  • डायबिटीज के मरीज।
  • कमजोर इम्युनिटी।
  • पारिवारिक इतिहास।

इलाज और रिकवरी

यदि आपको चेहरे पर ऐसा कोई भी लक्षण दिखे, तो बिना देरी किए 48 से 72 घंटों के भीतर डॉक्टर (न्यूरोलॉजिस्ट) से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती समय में दी गई स्टेरॉयड दवाएं (Steroids) और एंटीवायरल दवाएं नसों की सूजन को तेजी से कम करती हैं। आंख बंद न होने के कारण सूखापन बढ़ जाता है, इसलिए आई ड्रॉप्स (Eye Drops) और रात में आई पैच का इस्तेमाल जरूरी होता है। डॉक्टर की सलाह पर चेहरे का हल्का मसाज और फेशियल एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों की ताकत वापस लाने में मदद मिलती है।

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