‘मुझे मेंटेनेंस नहीं, अपना पति और बच्ची चाहिए’:भानू प्रताप की पत्नी पहुंचीं पुलिस मुख्यालय, कहा- DGP से मिलने से मना कर दिया था

‘मुझे मेंटेनेंस नहीं, अपना पति और बच्ची चाहिए’:भानू प्रताप की पत्नी पहुंचीं पुलिस मुख्यालय, कहा- DGP से मिलने से मना कर दिया था

‘मुझे मेंटेनेंस नहीं, अपना पति और बच्ची चाहिए। मैं अपना परिवार बचाना चाहती हूं, आखिर एक मां को अपनी ही बच्ची से बात करने के लिए कस्टडी की जरूरत क्यों पड़नी चाहिए?’ ये सवाल भानु प्रताप की पत्नी पूजा ने पुलिस मुख्यालय में डीजीपी से मुलाकात के बाद उठाए। पति से तलाक नहीं चाहने और अपनी बच्ची से दूर किए जाने का दर्द बयां करते हुए पूजा ने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ महीने से उनकी बच्ची से बात तक नहीं कराई गई है। उनका कहना है कि वह अपने पति के सुख-दुख में साथ रही हैं, ऐसे में आज उन्हें छोड़कर नई जिंदगी शुरू करने की सलाह क्यों दी जा रही है? पूजा अपनी मांग लेकर डीजीपी से मिलने पहुंची थीं। मुलाकात नहीं होने पर वह पुलिस मुख्यालय में धरने पर बैठ गईं। काफी अनुरोध के बाद उनकी मुलाकात हुई। पूजा का आरोप है कि भानु प्रताप ने तलाक की अर्जी दाखिल की है, सितंबर से आर्थिक मदद भी बंद कर दी है और अब उन्हें अपनी बच्ची से मिलने के लिए कस्टडी लेने की बात कही जा रही है। पूजा का कहना है कि वह आगे कानूनी लड़ाई लड़ेंगी, लेकिन उनकी मांग नहीं बदलेगी उन्हें अपना पति, अपनी बच्ची और अपना परिवार वापस चाहिए। भानु प्रताप की पत्नी पूजा ने भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि मैं डीजीपी से मिलने पुलिस मुख्यालय पहुंची, लेकिन उन्होंने मिलने से मना कर दिया तब मैं यहां धरने पर बैठ गई। मैंने उनसे काफी अनुरोध किया, जिसके बाद वह मुझसे मिलीं। लेकिन मुझे लगता है कि वह भी भानु का ही समर्थन कर रही हैं। पूजा बोलीं- मुझे बस मेरा परिवार चाहिए आगे कहा, मैं बिहार की जनता, खासकर यहां की महिलाओं से पूछना चाहती हूं कि क्या किसी महिला के लिए अपने पति को छोड़कर दूसरी शादी कर लेना इतना आसान होता है? भानु ने तलाक की अर्जी दाखिल की है। मैं उनसे सिर्फ इतना जानना चाहती हूं कि आखिर तलाक देने की वजह क्या है? मैं जानना चाहती हूं कि आखिर मेरे साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है। मैं आगे कानूनी कार्रवाई करूंगी, लेकिन मेरी मांग आज भी वही है। मुझे मेरा परिवार चाहिए। मुझे भानु चाहिए, मेरी बच्ची के पिता और मेरे पति चाहिए। बस, मेरी यही मांग है। मैं एक भारतीय नारी हूं। हमें यही सिखाया जाता है कि सुख हो या दुख, अपने पति के साथ मिलकर जीवन बिताना चाहिए। जब मैं उनके दुख में उनके साथ खड़ी रही, तो आज मैं पीछे क्यों हटूं? मैं उनसे लड़ना नहीं चाहती, मैं सिर्फ अपना परिवार वापस चाहती हूं। डेढ़ महीने से बच्ची से बात तक नहीं कराई गई आगे पूजा ने कहा, मेरी बच्ची से बात कराए हुए लगभग डेढ़ महीने हो गए हैं। जब मैं खगड़िया में थी, तब बच्ची से बात कराई जाती थी, लेकिन जैसे ही मैं पटना आई, मुझसे बच्ची की बात कराना बंद कर दिया गया। अब मुझसे कहा जाता है कि अगर बच्ची से बात करनी है, तो उसकी कस्टडी ले लीजिए। मैं पूछना चाहती हूं कि क्या एक मां को अपनी ही बच्ची से बात करने के लिए कस्टडी की जरूरत पड़नी चाहिए? एक मां नौ महीने तक बच्चे को अपने गर्भ में रखती है। क्या उस मां का अपनी बच्ची पर कोई अधिकार नहीं है? जितना अधिकार भानु का है, उतना ही मेरा भी है। मेरी बच्ची को मुझसे यह कहकर दूर ले जाया गया कि उसे मॉल घुमाने ले जा रहे हैं। इसके बाद मुझे अपनी ही बच्ची से दूर कर दिया गया। कहा- मेरे ऊपर लगाए जा रहे हैं गंभीर आरोप भानु की तरफ से मुझ पर तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा कि मैं उनके दस्तावेज ले लेती हूं और कई तरह की गलत हरकतें करती हूं। मैं पूछना चाहती हूं कि जिस पति के साथ मैंने दिन-रात अपने भविष्य के सपने देखे, क्या मैं उनके साथ ऐसा कर सकती हूं? मेरे ऊपर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे मुझे काफी तकलीफ हो रही है। मैं उनसे लड़ना नहीं चाहती। मैं सिर्फ यही चाहती हूं कि मेरा परिवार मुझे वापस मिल जाए। मुझे अपने पति और अपनी बच्ची के साथ रहना है। मुझे किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं चाहिए, बस मेरा परिवार चाहिए। सितंबर से आर्थिक मदद भी बंद कर दी गई पूजा ने कहा कि भानु ने सितंबर से पैसे देना भी बंद कर दिया है। मैंने उनसे आर्थिक मदद के लिए अनुरोध किया, लेकिन इसके बाद उन्होंने भरतपुर में हाईकोर्ट में मेरे खिलाफ तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। मैंने उनसे कहा कि मैं तलाक नहीं चाहती। मैं जानना चाहती हूं कि आखिर तलाक दाखिल करने की वजह क्या है? मेरे पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि मैं वकील कर सकूं और कानूनी लड़ाई लड़ सकूं। भानु इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि मेरी आर्थिक स्थिति क्या है। पटना में अकेले रहने को मजबूर हूं पूजा ने कहा, मैं यहां बहुत अकेली हूं। राठौर भैया और भाभी ही हैं, जो मुझे संभाल रहे हैं। वे मुझे हौसला देते हैं, मेरा मनोबल बढ़ाते हैं और मुझे किसी तरह जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। जब मैं अस्पताल में भर्ती थी, तब मुझे लेने के लिए विभाग से कोई नहीं आया। राठौर भैया और भाभी ही मुझे अपने साथ लेकर गए और मेरी देखभाल कर रहे हैं। आज मुश्किल समय में वही मेरा सहारा बने हुए हैं। सुविधाओं-खगड़िया जाने के अधिकार को लेकर सवाल अभी मेरे साथ सिर्फ महिला सिपाही हैं। मुझे न तो गाड़ी दी गई है और न ही अन्य सुविधाएं मिली हैं, जो मेरी स्थिति में उपलब्ध कराई जानी चाहिए थीं। जब मैंने खगड़िया जाने की बात कही, तो मुझे बताया गया कि भानु सर का आदेश होगा, तभी मुझे खगड़िया भेजा जाएगा। मैं पूछना चाहती हूं कि क्या मुझे खगड़िया जाने का भी अधिकार नहीं है? क्या अपनी बच्ची से मिलने और अपने परिवार के साथ रहने की मांग करना गलत है? मैं आज भी यही कह रही हूं कि मुझे कोई लड़ाई नहीं चाहिए। मुझे सिर्फ मेरा पति, मेरी बच्ची और मेरा परिवार चाहिए। मैं अपने परिवार को बचाना चाहती हूं और इसके लिए हर संभव प्रयास करूंगी। ‘मुझे मेंटेनेंस नहीं, अपना पति और बच्ची चाहिए। मैं अपना परिवार बचाना चाहती हूं, आखिर एक मां को अपनी ही बच्ची से बात करने के लिए कस्टडी की जरूरत क्यों पड़नी चाहिए?’ ये सवाल भानु प्रताप की पत्नी पूजा ने पुलिस मुख्यालय में डीजीपी से मुलाकात के बाद उठाए। पति से तलाक नहीं चाहने और अपनी बच्ची से दूर किए जाने का दर्द बयां करते हुए पूजा ने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ महीने से उनकी बच्ची से बात तक नहीं कराई गई है। उनका कहना है कि वह अपने पति के सुख-दुख में साथ रही हैं, ऐसे में आज उन्हें छोड़कर नई जिंदगी शुरू करने की सलाह क्यों दी जा रही है? पूजा अपनी मांग लेकर डीजीपी से मिलने पहुंची थीं। मुलाकात नहीं होने पर वह पुलिस मुख्यालय में धरने पर बैठ गईं। काफी अनुरोध के बाद उनकी मुलाकात हुई। पूजा का आरोप है कि भानु प्रताप ने तलाक की अर्जी दाखिल की है, सितंबर से आर्थिक मदद भी बंद कर दी है और अब उन्हें अपनी बच्ची से मिलने के लिए कस्टडी लेने की बात कही जा रही है। पूजा का कहना है कि वह आगे कानूनी लड़ाई लड़ेंगी, लेकिन उनकी मांग नहीं बदलेगी उन्हें अपना पति, अपनी बच्ची और अपना परिवार वापस चाहिए। भानु प्रताप की पत्नी पूजा ने भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि मैं डीजीपी से मिलने पुलिस मुख्यालय पहुंची, लेकिन उन्होंने मिलने से मना कर दिया तब मैं यहां धरने पर बैठ गई। मैंने उनसे काफी अनुरोध किया, जिसके बाद वह मुझसे मिलीं। लेकिन मुझे लगता है कि वह भी भानु का ही समर्थन कर रही हैं। पूजा बोलीं- मुझे बस मेरा परिवार चाहिए आगे कहा, मैं बिहार की जनता, खासकर यहां की महिलाओं से पूछना चाहती हूं कि क्या किसी महिला के लिए अपने पति को छोड़कर दूसरी शादी कर लेना इतना आसान होता है? भानु ने तलाक की अर्जी दाखिल की है। मैं उनसे सिर्फ इतना जानना चाहती हूं कि आखिर तलाक देने की वजह क्या है? मैं जानना चाहती हूं कि आखिर मेरे साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है। मैं आगे कानूनी कार्रवाई करूंगी, लेकिन मेरी मांग आज भी वही है। मुझे मेरा परिवार चाहिए। मुझे भानु चाहिए, मेरी बच्ची के पिता और मेरे पति चाहिए। बस, मेरी यही मांग है। मैं एक भारतीय नारी हूं। हमें यही सिखाया जाता है कि सुख हो या दुख, अपने पति के साथ मिलकर जीवन बिताना चाहिए। जब मैं उनके दुख में उनके साथ खड़ी रही, तो आज मैं पीछे क्यों हटूं? मैं उनसे लड़ना नहीं चाहती, मैं सिर्फ अपना परिवार वापस चाहती हूं। डेढ़ महीने से बच्ची से बात तक नहीं कराई गई आगे पूजा ने कहा, मेरी बच्ची से बात कराए हुए लगभग डेढ़ महीने हो गए हैं। जब मैं खगड़िया में थी, तब बच्ची से बात कराई जाती थी, लेकिन जैसे ही मैं पटना आई, मुझसे बच्ची की बात कराना बंद कर दिया गया। अब मुझसे कहा जाता है कि अगर बच्ची से बात करनी है, तो उसकी कस्टडी ले लीजिए। मैं पूछना चाहती हूं कि क्या एक मां को अपनी ही बच्ची से बात करने के लिए कस्टडी की जरूरत पड़नी चाहिए? एक मां नौ महीने तक बच्चे को अपने गर्भ में रखती है। क्या उस मां का अपनी बच्ची पर कोई अधिकार नहीं है? जितना अधिकार भानु का है, उतना ही मेरा भी है। मेरी बच्ची को मुझसे यह कहकर दूर ले जाया गया कि उसे मॉल घुमाने ले जा रहे हैं। इसके बाद मुझे अपनी ही बच्ची से दूर कर दिया गया। कहा- मेरे ऊपर लगाए जा रहे हैं गंभीर आरोप भानु की तरफ से मुझ पर तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा कि मैं उनके दस्तावेज ले लेती हूं और कई तरह की गलत हरकतें करती हूं। मैं पूछना चाहती हूं कि जिस पति के साथ मैंने दिन-रात अपने भविष्य के सपने देखे, क्या मैं उनके साथ ऐसा कर सकती हूं? मेरे ऊपर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे मुझे काफी तकलीफ हो रही है। मैं उनसे लड़ना नहीं चाहती। मैं सिर्फ यही चाहती हूं कि मेरा परिवार मुझे वापस मिल जाए। मुझे अपने पति और अपनी बच्ची के साथ रहना है। मुझे किसी तरह का आर्थिक लाभ नहीं चाहिए, बस मेरा परिवार चाहिए। सितंबर से आर्थिक मदद भी बंद कर दी गई पूजा ने कहा कि भानु ने सितंबर से पैसे देना भी बंद कर दिया है। मैंने उनसे आर्थिक मदद के लिए अनुरोध किया, लेकिन इसके बाद उन्होंने भरतपुर में हाईकोर्ट में मेरे खिलाफ तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। मैंने उनसे कहा कि मैं तलाक नहीं चाहती। मैं जानना चाहती हूं कि आखिर तलाक दाखिल करने की वजह क्या है? मेरे पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि मैं वकील कर सकूं और कानूनी लड़ाई लड़ सकूं। भानु इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि मेरी आर्थिक स्थिति क्या है। पटना में अकेले रहने को मजबूर हूं पूजा ने कहा, मैं यहां बहुत अकेली हूं। राठौर भैया और भाभी ही हैं, जो मुझे संभाल रहे हैं। वे मुझे हौसला देते हैं, मेरा मनोबल बढ़ाते हैं और मुझे किसी तरह जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। जब मैं अस्पताल में भर्ती थी, तब मुझे लेने के लिए विभाग से कोई नहीं आया। राठौर भैया और भाभी ही मुझे अपने साथ लेकर गए और मेरी देखभाल कर रहे हैं। आज मुश्किल समय में वही मेरा सहारा बने हुए हैं। सुविधाओं-खगड़िया जाने के अधिकार को लेकर सवाल अभी मेरे साथ सिर्फ महिला सिपाही हैं। मुझे न तो गाड़ी दी गई है और न ही अन्य सुविधाएं मिली हैं, जो मेरी स्थिति में उपलब्ध कराई जानी चाहिए थीं। जब मैंने खगड़िया जाने की बात कही, तो मुझे बताया गया कि भानु सर का आदेश होगा, तभी मुझे खगड़िया भेजा जाएगा। मैं पूछना चाहती हूं कि क्या मुझे खगड़िया जाने का भी अधिकार नहीं है? क्या अपनी बच्ची से मिलने और अपने परिवार के साथ रहने की मांग करना गलत है? मैं आज भी यही कह रही हूं कि मुझे कोई लड़ाई नहीं चाहिए। मुझे सिर्फ मेरा पति, मेरी बच्ची और मेरा परिवार चाहिए। मैं अपने परिवार को बचाना चाहती हूं और इसके लिए हर संभव प्रयास करूंगी।  

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