दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर करीब 1100 करोड़ रुपए की लागत से बनी मुकंदरा टनल में पहली ही बारिश में पानी भर गया। टनल की दोनों ट्यूब में (चेचट की तरफ एंट्री वाला हिस्सा) करीब 800 मीटर के दायरे में 100 से ज्यादा जगहों पर सीपेज हैं। कई जगह जमीन से कुछ फीट की ऊंचाई पर दीवारों से पानी रिस रहा है। 10 अगस्त को टनल में बारिश के चलते जलभराव की स्थिति बन गई। हालांकि गुरुवार 13 अगस्त तक पानी निकाला जा चुका था। भास्कर ने गुरुवार को मौके पर जाकर टनल के हालात देखे। टनल की दोनों ट्यूब (चेचट साइड वाली) की साइड दीवारों की पड़ताल की। बड़ी संख्या में सीपेज यानी दीवारों से पानी रिसने के निशान मिले। 800 मीटर के दायरे में 100 से ज्यादा जगहों पर सीपेज बता दें कि मुकंदरा टनल 4.9 किलोमीटर लंबी है। भास्कर टीम ग्राउंड जोरी पर पहुंची तो सामने आया कि टनल की दोनों ट्यूब में (चेचट की तरफ एंट्री वाला हिस्सा) करीब 800 मीटर के दायरे में 100 से ज्यादा जगहों पर सीपेज हैं। कई जगह जमीन से कुछ फीट की ऊंचाई पर दीवारों से पानी रिस रहा था। कुछ जगहों पर 10 से 12 फीट की ऊंचाई से भी पानी निकल रहा था। यानी टनल की दीवारों से पानी का रिसाव पूरी तरह थमा नहीं था। कई सीपेज से मौके पर पानी निकलता दिखाई दे रहा था। कुछ जगह दीवार पर क्रेक (दरारें ) भी नजर आई। जो कहीं ना कहीं निर्माण में लापरवाही उजागर कर रहा है। दिल्ली से किराए पर हाई कैपेसिटी पंप मंगवाने पड़े बता दें 10 अगस्त, सोमवार को चेचट साइड वाले हिस्से में टनल की दोनों ट्यूब में करीब 500-500 मीटर हिस्से तक पानी भर गया था। हालात बिगड़ने पर कुछ घंटों के लिए टनल में ट्रैफिक बंद करना पड़ा। टनल में लगाए गए पंप पानी के इनफ्लो के मुकाबले कम क्षमता के साबित हुए। इसके बाद पानी निकालने के लिए दिल्ली से किराए पर 125-125 हॉर्स पावर (HP) के हाई कैपेसिटी पंप मंगवाने पड़े। 24 घंटे से चैबर में भरे पानी को बाहर निकालने का काम जारी गुरुवार को भास्कर टीम मौके पर पहुंची। टनल के मुख्य हिस्से में भरा पानी तो निकाल दिया गया था, लेकिन दोनों ट्यूब के चैबर में जमे पानी को बाहर निकालने का काम जारी था। मौके पर ट्यूब-1 और ट्यूब-2 में हाई कैपेसिटी पंप लगातार चल रहे थे। करीब 24 घंटे से चैबर में भरे पानी को बाहर निकालने का काम जारी था। निर्माण के दौरान टनल में पानी की समस्या सामने आती रही है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि टनल की डिजाइन, ड्रेनेज सिस्टम, पंपिंग क्षमता और वाटर-इनफ्लो का आकलन किस आधार पर किया गया? मौके पर दिखे सीपेज यह संकेत देते हैं कि पहाड़ी के अंदर और आसपास मौजूद पानी टनल की संरचना पर लगातार दबाव बना रहा है। जमीन से कुछ फीट से लेकर 10-12 फीट ऊंचाई तक दीवारों से पानी निकलना बताता है कि पानी निकासी की चुनौती केवल टनल के फर्श पर जमा पानी तक सीमित नहीं है। जॉइंट में से पानी का रिसाव (सीपेज) हो रहा-NHAI प्रोजेक्ट डायरेक्टर NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने बताया कि टनल में 12-12 मीटर पर ग्रेएंट्री बनी है। उनके जॉइंट में से पानी का रिसाव (सीपेज) हो रहा है। इस रिसाव को केमिकल ग्राउंटिंग करके पैक कर देंगे। ग्राउंटिंग करना शुरू कर दिया गया है। पंपों की कैपेसिटी बढ़ाएंगे अग्रवाल ने बताया दोनों ट्यूब में बरसाती पानी के लिए अंडरग्राउंड 5-5 सम्प (चैबर ) बना रखे हैं। इनकी क्षमता 26 लाख लीटर की है। हर सम्प पर पानी निकालने के लिए अलग अलग कैपेसिटी के 3-3 पंप लगे हैं। यानी 10 सम्प पर कुल 30 पंप लगे हैं। इन पंपों की क्षमता को बढ़ाकर 460 हॉर्स पावर तक करेंगे। जरूरत पड़ने पर कैपेसिटी और बढ़ाएंगे। एक महीने पहले पंप की कैपेसिटी बढ़ाने की निर्देश दिए थे टनल निर्माण के दौरान ठेकेदार की ओर से लगाए गए पंप कम क्षमता के थे। जुलाई में ही पंप बदलने और उनकी क्षमता बढ़ाने के निर्देश ठेकेदार को दे दिए गए थे। ठेकेदार ने नए पंपों के ऑर्डर भी दिए थे, लेकिन समय पर पंप उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें लगाया नहीं जा सका। उन्होंने बताया कि फिलहाल दिल्ली से किराए पर 125-125 हॉर्सपावर के दो पंप मंगवाए गए हैं। इन पंपों के जरिए टनल में जमा पानी को बाहर निकाला गया। अनुमान से ज्यादा आया पानी संदीप अग्रवाल ने बताया कि टनल का डिजाइन और पानी के इनफ्लो का आकलन कॉन्ट्रैक्टर को ही करना होता है। ठेकेदार ने जितने पानी का आकलन किया था, उससे ज्यादा पानी टनल में आ गया। इसी वजह से मौजूदा पंपों की क्षमता कम पड़ गई। टनल में इसके अलावा कोई बड़ा इश्यू नहीं है। हां कुछ जगहों पर सीपेज भी आए है जिन्हें ठीक कर दिया जाएगा। अभी ट्रायल रन चल रहा, टोल भी नहीं लिया जा रहा NHAI अधिकारी ने बताया कि मुकंदरा टनल का अभी ट्रायल रन चल रहा है। ट्रायल के दौरान टनल की व्यवस्थाओं और कमियों का आकलन किया जा रहा है, ताकि इसे नियमित रूप से शुरू करने से पहले सभी कमियों को दूर किया जा सके। फिलहाल टनल में टोल भी नहीं लिया जा रहा है। बारिश के दौरान सामने आई पानी निकासी की समस्या को पंपों की क्षमता बढ़ाकर दूर किया जा रहा है। टनल को नियमित यातायात के लिए शुरू करने से पहले आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी। पैकेज 15 के तहत टनल का निर्माण हुआ है। टनल में पानी भरने, ड्रेनेज सिस्टम फेल होने व दीवारों पर आए सीपेज को लेकर निर्माण कंपनी दिलीप बिल्डकॉन के जनरल मैनेजर (जीएम) संजय राठौर से भी पक्ष जानना चाहा। उन्हें फोन लगाया, मैसेज किया, लेकिन संजय राठौर ने रिप्लाई नहीं दिया। ————————————— ये खबर भी पढ़ें 1100-करोड़ में बनी टनल में पहली बारिश में भरा पानी:देश में 8 लेन की सबसे लंबी सुरंग में जगह-जगह रिसाव; दरारें पड़ीं मुकंदरा टनल में पानी भरा, ट्रैफिक बंद किया:2.8 एमएम बरसात, कोटा-झालावाड़ NH-52 पर दरा की नाल पर जाम, नवनेरा बांध के 6 गेट खुले


