मुंगेर में 2 बंगाली दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित:रायसर की लाल दुर्गा और उदयन परिषद में उमड़ी भीड़, 21 अक्टूबर को होगा सिंदूर खेला

मुंगेर में 2 बंगाली दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित:रायसर की लाल दुर्गा और उदयन परिषद में उमड़ी भीड़, 21 अक्टूबर को होगा सिंदूर खेला

नवरात्र की षष्ठी पूजा के अवसर पर शुक्रवार को मुंगेर में बंगाली दुर्गा पूजा की रौनक बढ़ गई। मुख्यालय स्थित बंगाली दुर्गा मंदिर और भगत सिंह चौक स्थित उदयन परिषद में मां दुर्गा की प्रतिमा के पट खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। बंगाली समाज के लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। शहर में बंगाली परंपरा के अनुसार दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह का माहौल है। वासुदेवपुर थाना क्षेत्र के रायसर में बंगाली समाज की ओर से वर्ष 1947 से लगातार बंगाली दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यह प्रतिमा जिले के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। लाल दुर्गा के नाम से जानते है लोग स्थानीय लोग इसे लाल दुर्गा के नाम से जानते हैं। प्रतिमा का रंग सिंदूर की तरह लाल होने के कारण इसे यह नाम मिला है। लाल दुर्गा कमेटी के सदस्यों ने बताया कि मंदिर में स्थापित की जाने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा अपनी विशिष्ट बनावट और लाल रंग के कारण अलग पहचान रखती है। वैष्णवी दुर्गा होने के कारण यहां बलि प्रथा नहीं है। उन्होंने बताया कि आजादी से पहले इस प्रतिमा की स्थापना पाकिस्तान में होती थी। इसके बाद कुछ वर्षों तक बांग्लादेश में भी प्रतिमा स्थापित की गई। आजादी के बाद उनके पूर्वज मुंगेर आकर बस गए, तब से यहां लगातार मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इस प्रतिमा के दर्शन के लिए मुंगेर के अलावा खगड़िया, बेगूसराय और जिले के विभिन्न प्रखंडों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। 1925 से पूजा कर रहा उदयन परिषद इधर, शहर के भगत सिंह चौक स्थित मुंगेर सार्वजनिक बंगाली दुर्गोत्सव समिति, उदयन परिषद की ओर से भी बंगाली परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां षष्ठी पूजा के बाद पट खुलते ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया। समिति के पुरोहित बबलू गांगुली ने बताया कि यहां वर्ष 1925 से लगातार दुर्गा प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इस वर्ष पूजा का 102वां वर्ष है। प्रतिमा की स्थापना समाज के लोगों के सहयोग से की गई है।

21 अक्टूबर को सिंदूर खेला और विसर्जन यात्रा उदयन परिषद में पूजा के दौरान कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 16 अक्टूबर को महाषष्ठी के साथ कल्पारंभ, आमंत्रण और अधिवास किया जाएगा। 17 अक्टूबर को महासप्तमी पर नव पत्रिका प्रवेश, पुष्पांजलि और संध्या आरती होगी। 18 अक्टूबर को महाष्टमी पर पूजा, भोग वितरण, संध्या आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। 19 अक्टूबर को संधि पूजा, पुष्पांजलि, आरती, भोग और बलिदान का कार्यक्रम निर्धारित है। 20 अक्टूबर को महानवमी पर पूजा-अर्चना, कुमारी पूजा, भोग वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। वहीं, 21 अक्टूबर को विजयादशमी पर पुष्पांजलि, दर्पण विसर्जन और अपराजिता पूजा के बाद महिलाओं के लिए दोपहर तीन से चार बजे तक सिंदूर खेला आयोजित किया जाएगा। इसके बाद शाम 4:30 बजे प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा निकाली जाएगी। नवरात्र की षष्ठी पूजा के अवसर पर शुक्रवार को मुंगेर में बंगाली दुर्गा पूजा की रौनक बढ़ गई। मुख्यालय स्थित बंगाली दुर्गा मंदिर और भगत सिंह चौक स्थित उदयन परिषद में मां दुर्गा की प्रतिमा के पट खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। बंगाली समाज के लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। शहर में बंगाली परंपरा के अनुसार दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह का माहौल है। वासुदेवपुर थाना क्षेत्र के रायसर में बंगाली समाज की ओर से वर्ष 1947 से लगातार बंगाली दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यह प्रतिमा जिले के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। लाल दुर्गा के नाम से जानते है लोग स्थानीय लोग इसे लाल दुर्गा के नाम से जानते हैं। प्रतिमा का रंग सिंदूर की तरह लाल होने के कारण इसे यह नाम मिला है। लाल दुर्गा कमेटी के सदस्यों ने बताया कि मंदिर में स्थापित की जाने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा अपनी विशिष्ट बनावट और लाल रंग के कारण अलग पहचान रखती है। वैष्णवी दुर्गा होने के कारण यहां बलि प्रथा नहीं है। उन्होंने बताया कि आजादी से पहले इस प्रतिमा की स्थापना पाकिस्तान में होती थी। इसके बाद कुछ वर्षों तक बांग्लादेश में भी प्रतिमा स्थापित की गई। आजादी के बाद उनके पूर्वज मुंगेर आकर बस गए, तब से यहां लगातार मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इस प्रतिमा के दर्शन के लिए मुंगेर के अलावा खगड़िया, बेगूसराय और जिले के विभिन्न प्रखंडों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। 1925 से पूजा कर रहा उदयन परिषद इधर, शहर के भगत सिंह चौक स्थित मुंगेर सार्वजनिक बंगाली दुर्गोत्सव समिति, उदयन परिषद की ओर से भी बंगाली परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां षष्ठी पूजा के बाद पट खुलते ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया। समिति के पुरोहित बबलू गांगुली ने बताया कि यहां वर्ष 1925 से लगातार दुर्गा प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इस वर्ष पूजा का 102वां वर्ष है। प्रतिमा की स्थापना समाज के लोगों के सहयोग से की गई है।

21 अक्टूबर को सिंदूर खेला और विसर्जन यात्रा उदयन परिषद में पूजा के दौरान कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 16 अक्टूबर को महाषष्ठी के साथ कल्पारंभ, आमंत्रण और अधिवास किया जाएगा। 17 अक्टूबर को महासप्तमी पर नव पत्रिका प्रवेश, पुष्पांजलि और संध्या आरती होगी। 18 अक्टूबर को महाष्टमी पर पूजा, भोग वितरण, संध्या आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। 19 अक्टूबर को संधि पूजा, पुष्पांजलि, आरती, भोग और बलिदान का कार्यक्रम निर्धारित है। 20 अक्टूबर को महानवमी पर पूजा-अर्चना, कुमारी पूजा, भोग वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। वहीं, 21 अक्टूबर को विजयादशमी पर पुष्पांजलि, दर्पण विसर्जन और अपराजिता पूजा के बाद महिलाओं के लिए दोपहर तीन से चार बजे तक सिंदूर खेला आयोजित किया जाएगा। इसके बाद शाम 4:30 बजे प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा निकाली जाएगी।  

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