चित्तौड़गढ़ के गंगरार रीको क्षेत्र स्थित सरोज मार्बल में फॉल्ट ठीक करने गए बिजली विभाग के लाइनमैन ओमप्रकाश मेनारिया (45) की करंट लगने से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि 11 और 33 केवी लाइन का शटडाउन लेने के बावजूद सोलर सिस्टम से रिटर्न करंट आने से हादसा हुआ। हादसे के बाद फैक्ट्री प्रबंधन ने बिजली विभाग को तुरंत सूचना नहीं दी, जिससे कई घंटे तक ओमप्रकाश की मौत की जानकारी नहीं मिल सकी। रविवार को जिला हॉस्पिटल में परिजनों और बिजली कर्मचारियों ने कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कई दौर की बातचीत के बाद फैक्ट्री मालिक के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और रीको इंडस्ट्रियल एरिया की ओर से परिवार को 12 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने पर सहमति बनी। इसके साथ पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति, बीमा और अन्य सरकारी लाभ देने के आश्वासन के बाद पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई शुरू हुई। हादसा शनिवार दोपहर करीब 3:15 बजे हुआ था। फॉल्ट ठीक करने पहुंचे लाइनमैन की मौत राजेंद्र मेनारिया ने बताया – शनिवार दोपहर करीब 12 से 12.30 बजे के बीच सरोज मार्बल में बिजली का फॉल्ट आया। फॉल्ट देखने के दौरान फैक्ट्री का एक कर्मचारी करंट की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस गया। उसे करीब एक से सवा एक बजे के बीच जिला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इसके बाद फैक्ट्री प्रबंधन ने बिजली विभाग को सूचना देकर फॉल्ट ठीक करने के लिए कर्मचारी बुलाया। सूचना मिलने पर गंगरार बिजली विभाग में कार्यरत लाइनमैन ओमप्रकाश मेनारिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने 11 केवी और 33 केवी लाइन का शटडाउन लिया और काम शुरू किया। परिजनों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने उन्हें यह नहीं बताया कि उसी जगह कुछ समय पहले करंट लगने की घटना हो चुकी है। उनका कहना है कि अगर पहले हुई घटना की जानकारी दे दी जाती तो ओमप्रकाश अतिरिक्त सावधानी बरतते और यह हादसा टल सकता था। शटडाउन के बाद भी लगा करंट, देर शाम तक नहीं मिली मौत की जानकारी परिजनों के अनुसार दोपहर करीब 3.15 बजे काम के दौरान ओमप्रकाश करंट की चपेट में आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उनका आरोप है कि फैक्ट्री में लगे ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम से रिटर्न करंट आया, जो लाइन में पहुंच गया और इसी कारण हादसा हुआ। घटना के बाद भी फैक्ट्री प्रबंधन ने बिजली विभाग को तुरंत सूचना नहीं दी। बिजली विभाग के नियम के अनुसार जिस मोबाइल नंबर से शटडाउन लिया जाता है, उसी नंबर से काम पूरा होने की सूचना मिलने के बाद ही लाइन दोबारा चालू की जाती है। शाम को जब लाइट शुरू नहीं हुई तो आसपास के व्यापारियों ने बिजली विभाग को शिकायत की। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि लाइनमैन का फोन आने पर लाइट शुरू होगी। काफी देर तक ओमप्रकाश का फोन नहीं आने पर विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें कॉल किया, लेकिन जवाब नहीं मिला। फैक्ट्री के बाहर मिली बाइक, अंदर ट्रांसफार्मर के पास पड़ा था शव विभाग की ओर से फैक्ट्री मैनेजमेंट को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने किसी के आने की बात से इनकार किया। इसके बाद बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। पहले फैक्ट्री के बाहर ओमप्रकाश की बाइक मिली। इसके बाद अंदर तलाश करने पर ट्रांसफार्मर के पास उनका शव पड़ा मिला। परिजनों के अनुसार फैक्ट्री में उस समय अन्य कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। उनका कहना है कि सभी लोग मौके से कई घंटे पहले ही चले गए थे। बिजली विभाग के कर्मचारियों ने शव को चित्तौड़गढ़ के सांवलिया हॉस्पिटल पहुंचाया। परिवार का आरोप है कि कई घंटे तक शव फैक्ट्री में पड़ा रहा। शव के मुंह में कीड़े लग चुके थे। देर शाम तक उनका शव हॉस्पिटल ले जाया गया। हॉस्पिटल के बाहर मांगों को लेकर किया प्रदर्शन शनिवार रात से ही शव हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखा गया था। रविवार सुबह परिजन और ग्रामीण जिला हॉस्पिटल में एकत्र हो गए और कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि हादसा लापरवाही के कारण हुआ है, इसलिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए। मृतक ओमप्रकाश मेनारिया (45) पुत्र रूपलाल मेनारिया गंगरार थाना क्षेत्र के सुवानिया गांव के निवासी थे और गंगरार बिजली विभाग में सरकारी कर्मचारी थे। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में बिजली विभाग के कर्मचारी हॉस्पिटल में मौजूद रहे। कर्मचारी और परिजन कार्रवाई होने से पहले पोस्टमॉर्टम नहीं कराने की मांग पर अड़े रहे। परिवार को 12 लाख और सरकारी लाभ मिलेंगे प्रशासन, बिजली विभाग, फैक्ट्री प्रबंधन और परिजनों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद मामला शांत हुआ। बिजली विभाग की ओर से फैक्ट्री मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। समझौते के तहत रीको इंडस्ट्रियल एरिया की ओर से मृतक के परिवार को 12 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने पर सहमति बनी। इसके अलावा सरकारी नियमों के अनुसार मृतक की पत्नी को पेंशन, परिवार के पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति, बीमा राशि और अन्य सभी देय लाभ देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समझौता होने के बाद परिजन पोस्टमॉर्टम के लिए राजी हुए और रविवार को पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई कराई गई। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

