हरदोई में शनिवार दोपहर सड़क हादसे में जान गंवाने वाली गुड्डी देवी, उनके बेटे सोहेल और दामाद रमेश का रविवार को अंतिम संस्कार किया गया। लगातार बारिश के कारण गांव के खेत और अंतिम संस्कार स्थल पानी में डूबे थे। सूखी जमीन और लकड़ी नहीं मिलने पर परिजनों ने शारदा नहर के पास ऊंची जगह पर जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर गुड्डी और सोहेल को दफनाया। वहीं रमेश का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया। इसी बीच हादसे में घायल गर्भवती कामिनी ने रविवार सुबह 8 बजे महिला अस्पताल में ऑपरेशन से बेटे को जन्म दिया। गर्भवती कामिनी को अस्पताल ले जा रहे थे शहर कोतवाली क्षेत्र में समुदा गांव के पास शनिवार दोपहर तेज रफ्तार कार ने बाइक में टक्कर मार दी थी। बाइक पर लोनार कोतवाली क्षेत्र के भुवन पुरवा निवासी गुड्डी देवी (49), उनके बेटे सोहेल (25) और रामापुर छैय्या निवासी दामाद रमेश (32) सवार थे। तीनों गर्भवती कामिनी को प्रसव के लिए हरदोई अस्पताल ले जा रहे थे। हादसे में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। बारिश से खेतों में भरा था पानी पोस्टमार्टम के बाद शनिवार देर शाम तीनों के शव घर पहुंचे। लगातार बारिश के कारण गांव के आसपास के खेत पानी में डूबे थे। परिजनों के सामने अंतिम संस्कार के लिए सूखी जमीन और लकड़ी जुटाने की समस्या खड़ी हो गई। नहर किनारे जेसीबी से खोदा गड्ढा मृतका के पति सर्वेश ने बताया कि करीब एक साल पहले ही उन्होंने अपने बड़े बेटे को खोया था। अब पत्नी और बेटे की मौत के बाद उनके सामने अंतिम संस्कार की भी मुश्किल खड़ी हो गई। परिजनों ने गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर शारदा नहर के किनारे ऊंची जगह पर जेसीबी से गड्ढा खुदवाया। रविवार दोपहर करीब 3:30 बजे गुड्डी और उनके अविवाहित बेटे सोहेल के शवों को दफनाया गया। दामाद रमेश का पैतृक गांव में अंतिम संस्कार रमेश का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव रामापुर छैय्या में चिता जलाकर किया गया। एक ही परिवार से जुड़े तीन लोगों की मौत के बाद गांव में मातम का माहौल रहा। सदमे के बीच कामिनी ने बेटे को जन्म दिया हादसे के बाद गहरे सदमे से गुजर रही रमेश की पत्नी कामिनी ने रविवार सुबह 8:05 बजे महिला चिकित्सालय में ऑपरेशन के जरिए बेटे को जन्म दिया। कामिनी का कहना है कि मां, भाई और पति को खोने के बाद अब यह नवजात बेटा ही उनका सहारा है।

