कुडू|कलश स्थापना के साथ प्रथम दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। प्रखंड के प्रमुख दुर्गा पूजा समिति दुर्गा बाड़ी, मां अंबे ब्लॉक चौक, जय माता दी नीचे स्टैंड, मां भवानी देवी मंडप, मां शक्ति बस पड़ाव, शिव शक्ति दुर्गा पूजा समिति टाटी, दुर्गा पूजा समिति रुद, डोरो टोली, बड़की चांपी, सलगी, ओपा सुकुमार, पंडरा, बरवा टोली सहित अन्य स्थानों पर मां दुर्गा के पहले स्वरूप की आराधना की गई। मौके पर दुर्गा बाड़ी के पुरोहित अनंत पाठक ने बताया कि मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम “शैलपुत्री” पड़ा। (शैल का अर्थ पर्वत, पुत्री का अर्थ बेटी होता है।) नवरात्रि के पहले दिन इन्हीं की उपासना की जाती है। कुडू|कलश स्थापना के साथ प्रथम दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। प्रखंड के प्रमुख दुर्गा पूजा समिति दुर्गा बाड़ी, मां अंबे ब्लॉक चौक, जय माता दी नीचे स्टैंड, मां भवानी देवी मंडप, मां शक्ति बस पड़ाव, शिव शक्ति दुर्गा पूजा समिति टाटी, दुर्गा पूजा समिति रुद, डोरो टोली, बड़की चांपी, सलगी, ओपा सुकुमार, पंडरा, बरवा टोली सहित अन्य स्थानों पर मां दुर्गा के पहले स्वरूप की आराधना की गई। मौके पर दुर्गा बाड़ी के पुरोहित अनंत पाठक ने बताया कि मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम “शैलपुत्री” पड़ा। (शैल का अर्थ पर्वत, पुत्री का अर्थ बेटी होता है।) नवरात्रि के पहले दिन इन्हीं की उपासना की जाती है।

