मधेपुरा में मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ दुर्गा पूजा का समापन हो गया। 10 दिनों तक पूजा-अर्चना और आरती में लीन रहे श्रद्धालु विदाई के समय भावुक हो उठे। भक्तों ने नम आंखों से माता रानी को विदा किया और अगले बरस फिर आने की गुहार लगाई। विसर्जन जुलूस में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा। ढोल-नगाड़ों की गूंज और ‘जय माता दी’ के जयकारों से शहर की सड़कें गूंजती रहीं। शहर के विभिन्न पूजा पंडालों से मां दुर्गा की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया गया। जुलूस में महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए। नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की चहल-पहल श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते हुए मां के जयकारे लगा रहे थे। ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ के उद्घोष के बीच भक्तों ने माता रानी को अंतिम प्रणाम किया और सुख-शांति, समृद्धि व खुशहाली की कामना की। नवरात्र के दौरान जिन पूजा पंडालों में सुबह-शाम आरती, भजन और श्रद्धालुओं की भीड़ से रौनक बनी हुई थी, वहां विदाई के समय भावुक दृश्य देखने को मिले। भक्तों के लिए प्रतिमा विसर्जन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि नौ दिनों तक मां के दरबार में बिताए समय को विदाई देने का पल था। शहर के बंगला दुर्गा मंदिर, बड़ी दुर्गा स्थान और रेलवे कॉलोनी दुर्गा स्थान सहित प्रमुख पूजा स्थलों पर नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही। भक्त बोले- मां, अगले बरस फिर आना विजयादशमी के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही उत्सव का माहौल भावुक विदाई में बदल गया। मां दुर्गा की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं ने माता रानी से जीवन के दुख-दर्द और संकट दूर करने की प्रार्थना की। भक्तों ने समाज में आपसी सद्भाव, सुख-समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की कामना की। प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ भले ही दुर्गा पूजा का समापन हो गया, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में मां के प्रति आस्था और अगले वर्ष उनके आगमन की प्रतीक्षा फिर शुरू हो गई। विदाई के समय हर ओर एक ही भाव गूंजता रहा- मां, अगले बरस फिर आना। मधेपुरा में मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ दुर्गा पूजा का समापन हो गया। 10 दिनों तक पूजा-अर्चना और आरती में लीन रहे श्रद्धालु विदाई के समय भावुक हो उठे। भक्तों ने नम आंखों से माता रानी को विदा किया और अगले बरस फिर आने की गुहार लगाई। विसर्जन जुलूस में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा। ढोल-नगाड़ों की गूंज और ‘जय माता दी’ के जयकारों से शहर की सड़कें गूंजती रहीं। शहर के विभिन्न पूजा पंडालों से मां दुर्गा की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया गया। जुलूस में महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए। नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की चहल-पहल श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते हुए मां के जयकारे लगा रहे थे। ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ के उद्घोष के बीच भक्तों ने माता रानी को अंतिम प्रणाम किया और सुख-शांति, समृद्धि व खुशहाली की कामना की। नवरात्र के दौरान जिन पूजा पंडालों में सुबह-शाम आरती, भजन और श्रद्धालुओं की भीड़ से रौनक बनी हुई थी, वहां विदाई के समय भावुक दृश्य देखने को मिले। भक्तों के लिए प्रतिमा विसर्जन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि नौ दिनों तक मां के दरबार में बिताए समय को विदाई देने का पल था। शहर के बंगला दुर्गा मंदिर, बड़ी दुर्गा स्थान और रेलवे कॉलोनी दुर्गा स्थान सहित प्रमुख पूजा स्थलों पर नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही। भक्त बोले- मां, अगले बरस फिर आना विजयादशमी के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही उत्सव का माहौल भावुक विदाई में बदल गया। मां दुर्गा की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं ने माता रानी से जीवन के दुख-दर्द और संकट दूर करने की प्रार्थना की। भक्तों ने समाज में आपसी सद्भाव, सुख-समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की कामना की। प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ भले ही दुर्गा पूजा का समापन हो गया, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में मां के प्रति आस्था और अगले वर्ष उनके आगमन की प्रतीक्षा फिर शुरू हो गई। विदाई के समय हर ओर एक ही भाव गूंजता रहा- मां, अगले बरस फिर आना।

