महादलित की मौत मामले: तत्कालीन थानेदार समेत 11 पर FIR:पुलिस पिटाई से मौत का आरोप, कोर्ट के आदेश पर एससी-एसटी थाने में दर्ज हुआ केस

महादलित की मौत मामले: तत्कालीन थानेदार समेत 11 पर FIR:पुलिस पिटाई से मौत का आरोप, कोर्ट के आदेश पर एससी-एसटी थाने में दर्ज हुआ केस

मुजफ्फरपुर के सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र में महादलित मदन बैठा उर्फ मदन चौधरी की मौत के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष सह वर्तमान लालगंज थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मृतक की पत्नी सीता देवी के परिवाद पर विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार अधिनियम की अदालत के आदेश के बाद 8 अगस्त को एससी-एसटी थाने में केस दर्ज किया गया। एफआईआर में चार पुलिस पदाधिकारियों समेत छह अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस पिटाई के कारण मदन बैठा की मौत होने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में तत्कालीन थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार, एसआई अदिति कुमारी, एसआई अब्दुल्ला, एसआई राहुल कुमार के अलावा छितरा टोले सगहरी निवासी मुकेश बैठा, शंकर बैठा, लालबाबू बैठा, पिंकी देवी, मंतोष कुमार और विक्की कुमार को आरोपित किया गया है। तीन गाड़ियों से पहुंची थी पुलिस, घर में घुसकर पिटाई का आरोप सीता देवी के परिवाद के अनुसार, 22 अक्टूबर 2024 की दोपहर करीब 2:45 बजे सिवाईपट्टी थाने की पुलिस तीन गाड़ियों से उनके घर पहुंची थी। इसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार के अलावा एसआई शशि भूषण कुमार, अदिति कुमारी, अब्दुल्ला समेत आठ-दस पुलिसकर्मी शामिल थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने घर पहुंचते ही मदन बैठा को जातिसूचक शब्दों से संबोधित करते हुए गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। उनकी बेटी के साथ भी मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। इसके बाद पुलिसकर्मी मदन बैठा को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर ले गए। घर से 200 मीटर दूर बिगड़ी तबीयत, अगले दिन मौत परिवाद में आरोप लगाया गया है कि मदन बैठा को घर से करीब 200 मीटर दूर ले जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें पुलिस गाड़ी से नीचे छोड़ दिया गया। हालत खराब देखकर पत्नी उन्हें मीनापुर अस्पताल लेकर गईं, जहां से एसकेएमसीएच रेफर किया गया। बाद में उन्हें मेडिकल ओवरब्रिज के पास एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 23 अक्टूबर 2024 को उनकी मौत हो गई। पत्नी का आरोप है कि पुलिस की पिटाई के कारण उनकी हालत बिगड़ी और उनकी मौत हुई। एसएसपी-डीआईजी को आवेदन देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप सीता देवी ने घटना के बाद एसएसपी और डीआईजी को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 25 अक्टूबर को उनके पुत्र शशि रंजन कुमार पर दबाव बनाकर अहियापुर के तत्कालीन एसआई राहुल कुमार और सिवाईपट्टी थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार ने एक आवेदन पर हस्ताक्षर करा लिए। आरोप है कि इसी आधार पर सिवाईपट्टी थाने में ऐसा केस दर्ज कराया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों को निर्दोष दिखाते हुए घटना का आरोप अन्य लोगों पर लगाया गया। जमीन विवाद से जुड़ा था पुराना मामला परिवाद में 5 और 6 सितंबर 2024 को भूमि विवाद और अतिक्रमण को लेकर दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद का भी उल्लेख है। दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। सीता देवी ने आरोप लगाया है कि इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष और मामले के जांच अधिकारी शशि भूषण कुमार दूसरे पक्ष के प्रभाव में आ गए। मुकेश बैठा, शंकर बैठा, लालबाबू बैठा, पिंकी देवी, विक्की कुमार और मंतोष कुमार पर परिवार को डराने-धमकाने और जमीन हड़पने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। मुजफ्फरपुर के सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र में महादलित मदन बैठा उर्फ मदन चौधरी की मौत के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष सह वर्तमान लालगंज थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मृतक की पत्नी सीता देवी के परिवाद पर विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार अधिनियम की अदालत के आदेश के बाद 8 अगस्त को एससी-एसटी थाने में केस दर्ज किया गया। एफआईआर में चार पुलिस पदाधिकारियों समेत छह अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस पिटाई के कारण मदन बैठा की मौत होने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में तत्कालीन थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार, एसआई अदिति कुमारी, एसआई अब्दुल्ला, एसआई राहुल कुमार के अलावा छितरा टोले सगहरी निवासी मुकेश बैठा, शंकर बैठा, लालबाबू बैठा, पिंकी देवी, मंतोष कुमार और विक्की कुमार को आरोपित किया गया है। तीन गाड़ियों से पहुंची थी पुलिस, घर में घुसकर पिटाई का आरोप सीता देवी के परिवाद के अनुसार, 22 अक्टूबर 2024 की दोपहर करीब 2:45 बजे सिवाईपट्टी थाने की पुलिस तीन गाड़ियों से उनके घर पहुंची थी। इसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार के अलावा एसआई शशि भूषण कुमार, अदिति कुमारी, अब्दुल्ला समेत आठ-दस पुलिसकर्मी शामिल थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने घर पहुंचते ही मदन बैठा को जातिसूचक शब्दों से संबोधित करते हुए गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। उनकी बेटी के साथ भी मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। इसके बाद पुलिसकर्मी मदन बैठा को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर ले गए। घर से 200 मीटर दूर बिगड़ी तबीयत, अगले दिन मौत परिवाद में आरोप लगाया गया है कि मदन बैठा को घर से करीब 200 मीटर दूर ले जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें पुलिस गाड़ी से नीचे छोड़ दिया गया। हालत खराब देखकर पत्नी उन्हें मीनापुर अस्पताल लेकर गईं, जहां से एसकेएमसीएच रेफर किया गया। बाद में उन्हें मेडिकल ओवरब्रिज के पास एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 23 अक्टूबर 2024 को उनकी मौत हो गई। पत्नी का आरोप है कि पुलिस की पिटाई के कारण उनकी हालत बिगड़ी और उनकी मौत हुई। एसएसपी-डीआईजी को आवेदन देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप सीता देवी ने घटना के बाद एसएसपी और डीआईजी को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 25 अक्टूबर को उनके पुत्र शशि रंजन कुमार पर दबाव बनाकर अहियापुर के तत्कालीन एसआई राहुल कुमार और सिवाईपट्टी थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार ने एक आवेदन पर हस्ताक्षर करा लिए। आरोप है कि इसी आधार पर सिवाईपट्टी थाने में ऐसा केस दर्ज कराया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों को निर्दोष दिखाते हुए घटना का आरोप अन्य लोगों पर लगाया गया। जमीन विवाद से जुड़ा था पुराना मामला परिवाद में 5 और 6 सितंबर 2024 को भूमि विवाद और अतिक्रमण को लेकर दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद का भी उल्लेख है। दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। सीता देवी ने आरोप लगाया है कि इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष और मामले के जांच अधिकारी शशि भूषण कुमार दूसरे पक्ष के प्रभाव में आ गए। मुकेश बैठा, शंकर बैठा, लालबाबू बैठा, पिंकी देवी, विक्की कुमार और मंतोष कुमार पर परिवार को डराने-धमकाने और जमीन हड़पने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

महादलित की मौत मामले: तत्कालीन थानेदार समेत 11 पर FIR:पुलिस पिटाई से मौत का आरोप, कोर्ट के आदेश पर एससी-एसटी थाने में दर्ज हुआ केस

महादलित की मौत मामले: तत्कालीन थानेदार समेत 11 पर FIR:पुलिस पिटाई से मौत का आरोप, कोर्ट के आदेश पर एससी-एसटी थाने में दर्ज हुआ केस

मुजफ्फरपुर के सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र में महादलित मदन बैठा उर्फ मदन चौधरी की मौत के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष सह वर्तमान लालगंज थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मृतक की पत्नी सीता देवी के परिवाद पर विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार अधिनियम की अदालत के आदेश के बाद 8 अगस्त को एससी-एसटी थाने में केस दर्ज किया गया। एफआईआर में चार पुलिस पदाधिकारियों समेत छह अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस पिटाई के कारण मदन बैठा की मौत होने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में तत्कालीन थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार, एसआई अदिति कुमारी, एसआई अब्दुल्ला, एसआई राहुल कुमार के अलावा छितरा टोले सगहरी निवासी मुकेश बैठा, शंकर बैठा, लालबाबू बैठा, पिंकी देवी, मंतोष कुमार और विक्की कुमार को आरोपित किया गया है। तीन गाड़ियों से पहुंची थी पुलिस, घर में घुसकर पिटाई का आरोप सीता देवी के परिवाद के अनुसार, 22 अक्टूबर 2024 की दोपहर करीब 2:45 बजे सिवाईपट्टी थाने की पुलिस तीन गाड़ियों से उनके घर पहुंची थी। इसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार के अलावा एसआई शशि भूषण कुमार, अदिति कुमारी, अब्दुल्ला समेत आठ-दस पुलिसकर्मी शामिल थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने घर पहुंचते ही मदन बैठा को जातिसूचक शब्दों से संबोधित करते हुए गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। उनकी बेटी के साथ भी मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। इसके बाद पुलिसकर्मी मदन बैठा को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर ले गए। घर से 200 मीटर दूर बिगड़ी तबीयत, अगले दिन मौत परिवाद में आरोप लगाया गया है कि मदन बैठा को घर से करीब 200 मीटर दूर ले जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें पुलिस गाड़ी से नीचे छोड़ दिया गया। हालत खराब देखकर पत्नी उन्हें मीनापुर अस्पताल लेकर गईं, जहां से एसकेएमसीएच रेफर किया गया। बाद में उन्हें मेडिकल ओवरब्रिज के पास एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 23 अक्टूबर 2024 को उनकी मौत हो गई। पत्नी का आरोप है कि पुलिस की पिटाई के कारण उनकी हालत बिगड़ी और उनकी मौत हुई। एसएसपी-डीआईजी को आवेदन देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप सीता देवी ने घटना के बाद एसएसपी और डीआईजी को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 25 अक्टूबर को उनके पुत्र शशि रंजन कुमार पर दबाव बनाकर अहियापुर के तत्कालीन एसआई राहुल कुमार और सिवाईपट्टी थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार ने एक आवेदन पर हस्ताक्षर करा लिए। आरोप है कि इसी आधार पर सिवाईपट्टी थाने में ऐसा केस दर्ज कराया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों को निर्दोष दिखाते हुए घटना का आरोप अन्य लोगों पर लगाया गया। जमीन विवाद से जुड़ा था पुराना मामला परिवाद में 5 और 6 सितंबर 2024 को भूमि विवाद और अतिक्रमण को लेकर दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद का भी उल्लेख है। दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। सीता देवी ने आरोप लगाया है कि इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष और मामले के जांच अधिकारी शशि भूषण कुमार दूसरे पक्ष के प्रभाव में आ गए। मुकेश बैठा, शंकर बैठा, लालबाबू बैठा, पिंकी देवी, विक्की कुमार और मंतोष कुमार पर परिवार को डराने-धमकाने और जमीन हड़पने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। मुजफ्फरपुर के सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र में महादलित मदन बैठा उर्फ मदन चौधरी की मौत के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष सह वर्तमान लालगंज थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मृतक की पत्नी सीता देवी के परिवाद पर विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार अधिनियम की अदालत के आदेश के बाद 8 अगस्त को एससी-एसटी थाने में केस दर्ज किया गया। एफआईआर में चार पुलिस पदाधिकारियों समेत छह अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस पिटाई के कारण मदन बैठा की मौत होने का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में तत्कालीन थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार, एसआई अदिति कुमारी, एसआई अब्दुल्ला, एसआई राहुल कुमार के अलावा छितरा टोले सगहरी निवासी मुकेश बैठा, शंकर बैठा, लालबाबू बैठा, पिंकी देवी, मंतोष कुमार और विक्की कुमार को आरोपित किया गया है। तीन गाड़ियों से पहुंची थी पुलिस, घर में घुसकर पिटाई का आरोप सीता देवी के परिवाद के अनुसार, 22 अक्टूबर 2024 की दोपहर करीब 2:45 बजे सिवाईपट्टी थाने की पुलिस तीन गाड़ियों से उनके घर पहुंची थी। इसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार के अलावा एसआई शशि भूषण कुमार, अदिति कुमारी, अब्दुल्ला समेत आठ-दस पुलिसकर्मी शामिल थे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने घर पहुंचते ही मदन बैठा को जातिसूचक शब्दों से संबोधित करते हुए गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। उनकी बेटी के साथ भी मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। इसके बाद पुलिसकर्मी मदन बैठा को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर ले गए। घर से 200 मीटर दूर बिगड़ी तबीयत, अगले दिन मौत परिवाद में आरोप लगाया गया है कि मदन बैठा को घर से करीब 200 मीटर दूर ले जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें पुलिस गाड़ी से नीचे छोड़ दिया गया। हालत खराब देखकर पत्नी उन्हें मीनापुर अस्पताल लेकर गईं, जहां से एसकेएमसीएच रेफर किया गया। बाद में उन्हें मेडिकल ओवरब्रिज के पास एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 23 अक्टूबर 2024 को उनकी मौत हो गई। पत्नी का आरोप है कि पुलिस की पिटाई के कारण उनकी हालत बिगड़ी और उनकी मौत हुई। एसएसपी-डीआईजी को आवेदन देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप सीता देवी ने घटना के बाद एसएसपी और डीआईजी को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 25 अक्टूबर को उनके पुत्र शशि रंजन कुमार पर दबाव बनाकर अहियापुर के तत्कालीन एसआई राहुल कुमार और सिवाईपट्टी थानाध्यक्ष मनमोहन कुमार ने एक आवेदन पर हस्ताक्षर करा लिए। आरोप है कि इसी आधार पर सिवाईपट्टी थाने में ऐसा केस दर्ज कराया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों को निर्दोष दिखाते हुए घटना का आरोप अन्य लोगों पर लगाया गया। जमीन विवाद से जुड़ा था पुराना मामला परिवाद में 5 और 6 सितंबर 2024 को भूमि विवाद और अतिक्रमण को लेकर दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद का भी उल्लेख है। दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। सीता देवी ने आरोप लगाया है कि इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष और मामले के जांच अधिकारी शशि भूषण कुमार दूसरे पक्ष के प्रभाव में आ गए। मुकेश बैठा, शंकर बैठा, लालबाबू बैठा, पिंकी देवी, विक्की कुमार और मंतोष कुमार पर परिवार को डराने-धमकाने और जमीन हड़पने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *