झारखंड में इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से 2 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मानसून अवधि 30 सितंबर तक होती है। राज्य से मानसून 15 अक्टूबर तक पूरी तरह लौट सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, इस मानसून में बारिश सामान्य रही। हालांकि कम बारिश वाले आठ जिले रेड जोन में हैं। इनमें पाकुड़, देवघर, कोडरमा, हजारीबाग, चतरा, पलामू, गोड्डा और गुमला शामिल हैं। 14 जिलों में सामान्य के करीब, जबकि पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में सबसे अधिक बारिश हुई। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 जून को झारखंड पहुंचा। इस बार 111 दिन मानसून रहा। जून में 58 फीसदी कम, अगस्त में 26 फीसदी अधिक और सितंबर में 15 फीसदी अधिक बारिश हुई। 2025 में सामान्य से 17 फीसदी अधिक बारिश हुई थी, जबकि 2023 में 26 फीसदी कम बारिश हुई थी। पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में सर्वाधिक बारिश इस वर्ष मानसून का ट्रेंड बदला रहा। लगातार सूखे हालात वाले 2018, 2022 और 2023 के बाद 2026 में बारिश सामान्य के करीब पहुंची। सबसे अधिक पश्चिमी सिंहभूम में सामान्य से 47 फीसदी और राजधानी रांची में 18 फीसदी अधिक बारिश हुई। पाकुड़ की स्थिति सबसे खराब रही। यहां सामान्य से 52 फीसदी कम बारिश हुई। चतरा में 36, देवघर में 29, गुमला में 26, गोड्डा में 24, कोडरमा में 22 तथा हजारीबाग और पलामू में 20-20 फीसदी कम बारिश दर्ज की गयी। मानसून ट्रेंड का असर जल उपलब्धता और खेती पर भी पड़ा है। कम बारिश वाले जिलों में किसानों की चिंता बढ़ी है। 10 साल में आठ बार सामान्य से कम बारिश 10 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि बारिश का वितरण असमान रहा है। वर्ष 2026 में सामान्य बारिश 1022.0 मिमी के मुकाबले 1005.7 मिमी बारिश हुई, जो दो फीसदी कम है। 2025 में 1199.4 मिमी बारिश हुई, 17 फीसदी अधिक। 2024 में 1011.6 मिमी, एक फीसदी कम बारिश हुई। 2023 में 755.7 मिमी, 26 फीसदी कम और 2022 में 817.6 मिमी, 20 फीसदी कम बारिश हुई। 2021 में 1041.5 मिमी, दो फीसदी अधिक, 2020 में 898.3 मिमी, 15 फीसदी कम, 2019 में 858.9 मिमी, 19 फीसदी कम, 2018 में 785.0 मिमी, 28 फीसदी कम और 2017 में 988.2 मिमी, नौ फीसदी कम बारिश हुई। वर्ष 2016 में 1097.0 मिमी बारिश हुई थी, जो सामान्य से 0.5 फीसदी अधिक थी। बदलते मानसूनी ट्रेंड को लेकर चिंता बनी है। जलाशयों में 61.33 फीसदी पानी हुआ जमा राज्य के छह मुख्य जलाशयों में वर्तमान में कुल क्षमता का 61.33 फीसदी पानी उपलब्ध है। यह 10 वर्षों के सामान्य औसत की तुलना में 23.59 फीसदी कम है। इन जलाशयों की लाइव भंडारण क्षमता 2.012 बिलियन घनमीटर है, जबकि वर्तमान में 1.234 बीसीएम पानी मौजूद है। असमान बारिश का असर जल उपलब्धता पर पड़ रहा है। इसके बावजूद खरीफ 2026-27 के दौरान फसलों का कुल आच्छादन तय लक्ष्य के मुकाबले 80.93 फीसदी दर्ज किया गया है। राज्य में 2,853.955 हजार हेक्टेयर में फसल लगाने का लक्ष्य था। इसके मुकाबले 2,309.6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई और रोपाई पूरी कर ली गई है। झारखंड में इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से 2 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मानसून अवधि 30 सितंबर तक होती है। राज्य से मानसून 15 अक्टूबर तक पूरी तरह लौट सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, इस मानसून में बारिश सामान्य रही। हालांकि कम बारिश वाले आठ जिले रेड जोन में हैं। इनमें पाकुड़, देवघर, कोडरमा, हजारीबाग, चतरा, पलामू, गोड्डा और गुमला शामिल हैं। 14 जिलों में सामान्य के करीब, जबकि पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में सबसे अधिक बारिश हुई। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 जून को झारखंड पहुंचा। इस बार 111 दिन मानसून रहा। जून में 58 फीसदी कम, अगस्त में 26 फीसदी अधिक और सितंबर में 15 फीसदी अधिक बारिश हुई। 2025 में सामान्य से 17 फीसदी अधिक बारिश हुई थी, जबकि 2023 में 26 फीसदी कम बारिश हुई थी। पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में सर्वाधिक बारिश इस वर्ष मानसून का ट्रेंड बदला रहा। लगातार सूखे हालात वाले 2018, 2022 और 2023 के बाद 2026 में बारिश सामान्य के करीब पहुंची। सबसे अधिक पश्चिमी सिंहभूम में सामान्य से 47 फीसदी और राजधानी रांची में 18 फीसदी अधिक बारिश हुई। पाकुड़ की स्थिति सबसे खराब रही। यहां सामान्य से 52 फीसदी कम बारिश हुई। चतरा में 36, देवघर में 29, गुमला में 26, गोड्डा में 24, कोडरमा में 22 तथा हजारीबाग और पलामू में 20-20 फीसदी कम बारिश दर्ज की गयी। मानसून ट्रेंड का असर जल उपलब्धता और खेती पर भी पड़ा है। कम बारिश वाले जिलों में किसानों की चिंता बढ़ी है। 10 साल में आठ बार सामान्य से कम बारिश 10 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि बारिश का वितरण असमान रहा है। वर्ष 2026 में सामान्य बारिश 1022.0 मिमी के मुकाबले 1005.7 मिमी बारिश हुई, जो दो फीसदी कम है। 2025 में 1199.4 मिमी बारिश हुई, 17 फीसदी अधिक। 2024 में 1011.6 मिमी, एक फीसदी कम बारिश हुई। 2023 में 755.7 मिमी, 26 फीसदी कम और 2022 में 817.6 मिमी, 20 फीसदी कम बारिश हुई। 2021 में 1041.5 मिमी, दो फीसदी अधिक, 2020 में 898.3 मिमी, 15 फीसदी कम, 2019 में 858.9 मिमी, 19 फीसदी कम, 2018 में 785.0 मिमी, 28 फीसदी कम और 2017 में 988.2 मिमी, नौ फीसदी कम बारिश हुई। वर्ष 2016 में 1097.0 मिमी बारिश हुई थी, जो सामान्य से 0.5 फीसदी अधिक थी। बदलते मानसूनी ट्रेंड को लेकर चिंता बनी है। जलाशयों में 61.33 फीसदी पानी हुआ जमा राज्य के छह मुख्य जलाशयों में वर्तमान में कुल क्षमता का 61.33 फीसदी पानी उपलब्ध है। यह 10 वर्षों के सामान्य औसत की तुलना में 23.59 फीसदी कम है। इन जलाशयों की लाइव भंडारण क्षमता 2.012 बिलियन घनमीटर है, जबकि वर्तमान में 1.234 बीसीएम पानी मौजूद है। असमान बारिश का असर जल उपलब्धता पर पड़ रहा है। इसके बावजूद खरीफ 2026-27 के दौरान फसलों का कुल आच्छादन तय लक्ष्य के मुकाबले 80.93 फीसदी दर्ज किया गया है। राज्य में 2,853.955 हजार हेक्टेयर में फसल लगाने का लक्ष्य था। इसके मुकाबले 2,309.6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई और रोपाई पूरी कर ली गई है।

