MLC चुनाव में महागठबंधन में कांग्रेस और राजद के बीच दरार देखने को मिली है। कांग्रेस ने बिहार विधान परिषद की 8 में से 5 सीटों पर उम्मीदवारों का एलान किया है। दरभंगा शिक्षक सीट से वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा को फिर मैदान में उतारा है। पटना स्नातक से असदुल्लाह खान और पटना शिक्षक सीट से संजय यादव पर दांव खेला गया है। कोसी स्नातक से मनोज कुमार जायसवाल और दरभंगा स्नातक सीट से रजनीकांत पाठक उम्मीदवार घोषित हुए हैं। तिरहुत शिक्षक सीट भाकपा के सिटिंग एमएलसी संजय कुमार सिंह के लिए छोड़ी गई है। तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक सीट पर अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। प्रत्याशी न उतारने पर माना जाएगा कि इन्हें राजद के लिए छोड़ा गया है। AICC के महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ये उम्मीदवार बिहार विधान परिषद के आगामी द्विवार्षिक चुनाव में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
राजद ने 6 प्रत्याशियों के नाम का किया था ऐलान बिहार विधान परिषद के स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन 2026 को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपने 6 प्रत्याशियों की घोषणा की थी। पार्टी की ओर से जारी सूची में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 6 कैंडिडेट्स के नाम हैं। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वहीं पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से दिलीप कुमार चुनाव लड़ेंगे। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार सिंह प्रत्याशी बनाए गए हैं। कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नितेश कुमार और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अनिल कुमार झा को प्रत्याशी बनाया गया है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रो. जयराम यादव और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को उम्मीदवार बनाया है। राजद पर बिना चर्चा किए उम्मीदवार की घोषित करने के आरोप बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने जा रहे चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे पर कोई बात नहीं हुई। तेजस्वी यादव की पार्टी ने 11 सितंबर को ही 6 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। बिहार में एमएलसी कैंडिडेट लिस्ट जारी करने वाली राजद पहली पार्टी थी। राजद की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा के बाद कांग्रेस खेमे में नाराजगी सामने आई थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया था कि सीटों के बंटवारे को लेकर महागठबंधन के भीतर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई और राजद ने सहयोगी दल से चर्चा किए बिना ही अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजद के मनमाने रवैये के चलते अब कांग्रेस ने भी फ्रेंडली फाइट का फैसला लिया है। कौन हैं मदन मोहन झा? जानें डॉ. मदन मोहन झा बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में हैं और फिलहाल बिहार विधान परिषद में कांग्रेस के सदस्य हैं। उनके पिता नागेंद्र झा बिहार सरकार में मंत्री रहे थे। मदन मोहन झा ने राजनीति की शुरुआत छात्र राजनीति से की और NSUI से जुड़े। वे NSUI के राष्ट्रीय महासचिव रहे हैं। उन्होंने बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और फिर उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी उठाई। अशोक चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद मदन मोहन झा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी उठा रहे थे, जिसके बाद सितंबर 2018 में कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें कांग्रेस की कमान पूरी तरह से सौंप दी। वे 1985 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। बाद में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद पहुंचे। 2014 में कांग्रेस ने उन्हें विधान परिषद पहुंचाया। वे शिक्षक कोटे से MLC चुने गए थे। वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त के खिलाफ हैं डॉ. संजय यादव डॉ. संजय यादव बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष हैं। वे जहानाबाद के रामलखन सिंह यादव कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य भी हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सेवा दल के प्रांतीय सम्मेलन में उन्होंने मुख्य संगठक के रूप में अपनी भूमिका निभाई थी। शिक्षक दिवस के दिन वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने को लेकर उनके नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ था। वित्त रहित शिक्षक के हक को लेकर वह गर्दनीबाग धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं। 2020 में भी चुनाव लड़ चुके हैं रजनीकांत पाठक रजनीकांत पाठक बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हैं। 2026 में उन्हें दरभंगा अर्बन का PCC प्रभारी बनाया गया है। मई 2026 में दरभंगा जिला कांग्रेस कार्यालय में संगठन सृजन एवं सदस्यता अभियान की बैठक में उन्हें PCC ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी दी गई थी। रजनीकांत पाठक ने दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से 2020 में उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया था। उस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन किया था। MLC चुनाव में महागठबंधन में कांग्रेस और राजद के बीच दरार देखने को मिली है। कांग्रेस ने बिहार विधान परिषद की 8 में से 5 सीटों पर उम्मीदवारों का एलान किया है। दरभंगा शिक्षक सीट से वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा को फिर मैदान में उतारा है। पटना स्नातक से असदुल्लाह खान और पटना शिक्षक सीट से संजय यादव पर दांव खेला गया है। कोसी स्नातक से मनोज कुमार जायसवाल और दरभंगा स्नातक सीट से रजनीकांत पाठक उम्मीदवार घोषित हुए हैं। तिरहुत शिक्षक सीट भाकपा के सिटिंग एमएलसी संजय कुमार सिंह के लिए छोड़ी गई है। तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक सीट पर अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। प्रत्याशी न उतारने पर माना जाएगा कि इन्हें राजद के लिए छोड़ा गया है। AICC के महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ये उम्मीदवार बिहार विधान परिषद के आगामी द्विवार्षिक चुनाव में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
राजद ने 6 प्रत्याशियों के नाम का किया था ऐलान बिहार विधान परिषद के स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन 2026 को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपने 6 प्रत्याशियों की घोषणा की थी। पार्टी की ओर से जारी सूची में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 6 कैंडिडेट्स के नाम हैं। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वहीं पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से दिलीप कुमार चुनाव लड़ेंगे। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार सिंह प्रत्याशी बनाए गए हैं। कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नितेश कुमार और दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अनिल कुमार झा को प्रत्याशी बनाया गया है। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रो. जयराम यादव और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को उम्मीदवार बनाया है। राजद पर बिना चर्चा किए उम्मीदवार की घोषित करने के आरोप बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने जा रहे चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे पर कोई बात नहीं हुई। तेजस्वी यादव की पार्टी ने 11 सितंबर को ही 6 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। बिहार में एमएलसी कैंडिडेट लिस्ट जारी करने वाली राजद पहली पार्टी थी। राजद की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा के बाद कांग्रेस खेमे में नाराजगी सामने आई थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया था कि सीटों के बंटवारे को लेकर महागठबंधन के भीतर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई और राजद ने सहयोगी दल से चर्चा किए बिना ही अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजद के मनमाने रवैये के चलते अब कांग्रेस ने भी फ्रेंडली फाइट का फैसला लिया है। कौन हैं मदन मोहन झा? जानें डॉ. मदन मोहन झा बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में हैं और फिलहाल बिहार विधान परिषद में कांग्रेस के सदस्य हैं। उनके पिता नागेंद्र झा बिहार सरकार में मंत्री रहे थे। मदन मोहन झा ने राजनीति की शुरुआत छात्र राजनीति से की और NSUI से जुड़े। वे NSUI के राष्ट्रीय महासचिव रहे हैं। उन्होंने बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और फिर उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी उठाई। अशोक चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद मदन मोहन झा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी उठा रहे थे, जिसके बाद सितंबर 2018 में कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें कांग्रेस की कमान पूरी तरह से सौंप दी। वे 1985 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। बाद में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद पहुंचे। 2014 में कांग्रेस ने उन्हें विधान परिषद पहुंचाया। वे शिक्षक कोटे से MLC चुने गए थे। वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त के खिलाफ हैं डॉ. संजय यादव डॉ. संजय यादव बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष हैं। वे जहानाबाद के रामलखन सिंह यादव कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य भी हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सेवा दल के प्रांतीय सम्मेलन में उन्होंने मुख्य संगठक के रूप में अपनी भूमिका निभाई थी। शिक्षक दिवस के दिन वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने को लेकर उनके नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ था। वित्त रहित शिक्षक के हक को लेकर वह गर्दनीबाग धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं। 2020 में भी चुनाव लड़ चुके हैं रजनीकांत पाठक रजनीकांत पाठक बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हैं। 2026 में उन्हें दरभंगा अर्बन का PCC प्रभारी बनाया गया है। मई 2026 में दरभंगा जिला कांग्रेस कार्यालय में संगठन सृजन एवं सदस्यता अभियान की बैठक में उन्हें PCC ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी दी गई थी। रजनीकांत पाठक ने दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से 2020 में उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया था। उस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन किया था।

