मधुबन जलाशय परियोजना पर जन सुनवाई आयोजित:विस्थापितों को सुविधाएं, न्यायसंगत मुआवजा देने का आश्वासन

मधुबन जलाशय परियोजना पर जन सुनवाई आयोजित:विस्थापितों को सुविधाएं, न्यायसंगत मुआवजा देने का आश्वासन

नवादा के समाहरणालय सभाकक्ष में मधुबन जलाशय निर्माण परियोजना के सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (एसआईए) के प्रारूप प्रतिवेदन पर जन सुनवाई आयोजित की गई। यह सुनवाई जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश की अध्यक्षता में हुई। ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान, पटना ने यह प्रतिवेदन तैयार किया है। यह परियोजना गंगाजल आपूर्ति योजना फेज-02 (पार्ट-01) का हिस्सा है, जिसके तहत 27 एमसीएम क्षमता का जलाशय प्रस्तावित है। इसका मुख्य उद्देश्य नवादा शहर के शेष वार्डों और बिहारशरीफ शहरी क्षेत्र में गिरते भू-जल स्तर में सुधार लाना तथा शुद्ध पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। परियोजना के लिए 14.297 एकड़ आवासीय भूमि सहित अन्य भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। जन सुनवाई के दौरान प्रभावित ग्रामीणों ने पुनर्वास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, बिजली, पेयजल, पशु शेड और न्यायसंगत मुआवजे की मांग उठाई। विस्थापित परिवारों की ओर से मनोज यादव ने सम्मानजनक पुनर्वास की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। जिला पदाधिकारी ने परियोजना को भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं और जल संकट के स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार की नीति के अनुरूप विस्थापित परिवारों को सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाएगा। बैठक में नारदीगंज के अंचल अधिकारी को मधुबन और मोतनाजे गांव के प्रभावित परिवारों से संबंधित भूमि एवं राजस्व अभिलेखों को शीघ्र अद्यतन करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन से संबंधित मूल्यांकन में यदि कोई प्रभावित परिवार छूट गया हो, तो उसका पुनर्मूल्यांकन कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। इस कार्यक्रम में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, सिंचाई विभाग के अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। नवादा के समाहरणालय सभाकक्ष में मधुबन जलाशय निर्माण परियोजना के सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (एसआईए) के प्रारूप प्रतिवेदन पर जन सुनवाई आयोजित की गई। यह सुनवाई जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश की अध्यक्षता में हुई। ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान, पटना ने यह प्रतिवेदन तैयार किया है। यह परियोजना गंगाजल आपूर्ति योजना फेज-02 (पार्ट-01) का हिस्सा है, जिसके तहत 27 एमसीएम क्षमता का जलाशय प्रस्तावित है। इसका मुख्य उद्देश्य नवादा शहर के शेष वार्डों और बिहारशरीफ शहरी क्षेत्र में गिरते भू-जल स्तर में सुधार लाना तथा शुद्ध पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। परियोजना के लिए 14.297 एकड़ आवासीय भूमि सहित अन्य भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। जन सुनवाई के दौरान प्रभावित ग्रामीणों ने पुनर्वास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, बिजली, पेयजल, पशु शेड और न्यायसंगत मुआवजे की मांग उठाई। विस्थापित परिवारों की ओर से मनोज यादव ने सम्मानजनक पुनर्वास की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। जिला पदाधिकारी ने परियोजना को भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं और जल संकट के स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार की नीति के अनुरूप विस्थापित परिवारों को सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाएगा। बैठक में नारदीगंज के अंचल अधिकारी को मधुबन और मोतनाजे गांव के प्रभावित परिवारों से संबंधित भूमि एवं राजस्व अभिलेखों को शीघ्र अद्यतन करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन से संबंधित मूल्यांकन में यदि कोई प्रभावित परिवार छूट गया हो, तो उसका पुनर्मूल्यांकन कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। इस कार्यक्रम में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, सिंचाई विभाग के अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।  

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