पटना के आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम की ओर से भेजे गए नोटिस के बाद लोगों की अंचल कार्यालयों में सुनवाई जारी है। निगम ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल नोटिस का जवाब और संबंधित दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जा रहा है। निगम की जांच में कई ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं, जहां मकान में कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं चल रही है, फिर भी उसे कमर्शियल श्रेणी में नोटिस भेज दिया गया। पूरी तरह आवासीय मकान को भी मिला कमर्शियल नोटिस राजा बाजार समेत कई इलाकों के लोगों ने अंचल कार्यालय पहुंचकर बताया कि उनके मकान का इस्तेमाल केवल आवासीय तौर पर हो रहा है। कुछ संपत्तियों को ‘अन्य श्रेणी’ में भी नोटिस भेजा गया है, जिसमें गतिविधि स्पष्ट नहीं है। ऐसे मामलों में जांच के बाद रिकॉर्ड में जरूरी सुधार किया जाएगा। नक्शा नहीं है तो अंडरटेकिंग देनी होगी जिन मकान मालिकों के पास स्वीकृत नक्शा नहीं है, उन्हें लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी कि उनका निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के हुआ है और वे नियमानुसार जल्द नक्शा पास कराएंगे। वहीं, जो लोग शहर से बाहर हैं या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं हो सकते, वे संबंधित अधिकारी से समय बढ़ाने का अनुरोध कर अगली तारीख ले सकते हैं। गलत कमर्शियल टैक्स लगा तो एफिडेविट से होगा सुधार कुछ मामलों में आवासीय मकानों पर गलती से व्यावसायिक टैक्स लगाए जाने की शिकायत भी सामने आई है। ऐसे मकान मालिक आवश्यक दस्तावेजों के साथ एफिडेविट देकर अपना पक्ष रख सकते हैं। इसके बाद नगर निगम की टीम मौके पर जाकर संपत्ति का भौतिक सत्यापन करेगी। जांच में यदि मकान का इस्तेमाल केवल आवासीय पाया जाता है और कमर्शियल टैक्स गलत तरीके से लगाया गया है, तो निगम रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार किया जाएगा। 19,600 से अधिक लोगों को भेजा गया नोटिस सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर पटना में करीब 26,714 व्यावसायिक संपत्तियां चिह्नित की गई हैं। इनमें से अब तक 19,600 से अधिक संपत्ति मालिकों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। रोजाना अलग-अलग अंचल कार्यालयों में करीब 30 से 40 लोग सुनवाई के लिए पहुंच रहे हैं। अब तक 1,800 से अधिक लोगों की उपस्थिति दर्ज हो चुकी है। पाटलिपुत्र अंचल में ही 450 से अधिक लोग अपना जवाब दे चुके हैं। सिर्फ 10 फीसदी लोग ही ला रहे स्वीकृत नक्शा सुनवाई के दौरान निगम अधिकारियों ने पाया कि ज्यादातर लोग जरूरी दस्तावेजों के साथ नहीं पहुंच रहे हैं। करीब 10 प्रतिशत लोग ही स्वीकृत भवन नक्शा प्रस्तुत कर पा रहे हैं। नोटिस का जवाब देने के लिए जमीन की रजिस्ट्री या खतियान, अंचलाधिकारी द्वारा जारी दाखिल-खारिज प्रमाण, निगम से स्वीकृत नक्शा, व्यावसायिक प्रतिष्ठान का रजिस्ट्रेशन और पहचान पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। पटना के आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम की ओर से भेजे गए नोटिस के बाद लोगों की अंचल कार्यालयों में सुनवाई जारी है। निगम ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल नोटिस का जवाब और संबंधित दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। संपत्ति मालिकों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जा रहा है। निगम की जांच में कई ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं, जहां मकान में कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं चल रही है, फिर भी उसे कमर्शियल श्रेणी में नोटिस भेज दिया गया। पूरी तरह आवासीय मकान को भी मिला कमर्शियल नोटिस राजा बाजार समेत कई इलाकों के लोगों ने अंचल कार्यालय पहुंचकर बताया कि उनके मकान का इस्तेमाल केवल आवासीय तौर पर हो रहा है। कुछ संपत्तियों को ‘अन्य श्रेणी’ में भी नोटिस भेजा गया है, जिसमें गतिविधि स्पष्ट नहीं है। ऐसे मामलों में जांच के बाद रिकॉर्ड में जरूरी सुधार किया जाएगा। नक्शा नहीं है तो अंडरटेकिंग देनी होगी जिन मकान मालिकों के पास स्वीकृत नक्शा नहीं है, उन्हें लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी कि उनका निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के हुआ है और वे नियमानुसार जल्द नक्शा पास कराएंगे। वहीं, जो लोग शहर से बाहर हैं या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं हो सकते, वे संबंधित अधिकारी से समय बढ़ाने का अनुरोध कर अगली तारीख ले सकते हैं। गलत कमर्शियल टैक्स लगा तो एफिडेविट से होगा सुधार कुछ मामलों में आवासीय मकानों पर गलती से व्यावसायिक टैक्स लगाए जाने की शिकायत भी सामने आई है। ऐसे मकान मालिक आवश्यक दस्तावेजों के साथ एफिडेविट देकर अपना पक्ष रख सकते हैं। इसके बाद नगर निगम की टीम मौके पर जाकर संपत्ति का भौतिक सत्यापन करेगी। जांच में यदि मकान का इस्तेमाल केवल आवासीय पाया जाता है और कमर्शियल टैक्स गलत तरीके से लगाया गया है, तो निगम रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार किया जाएगा। 19,600 से अधिक लोगों को भेजा गया नोटिस सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर पटना में करीब 26,714 व्यावसायिक संपत्तियां चिह्नित की गई हैं। इनमें से अब तक 19,600 से अधिक संपत्ति मालिकों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। रोजाना अलग-अलग अंचल कार्यालयों में करीब 30 से 40 लोग सुनवाई के लिए पहुंच रहे हैं। अब तक 1,800 से अधिक लोगों की उपस्थिति दर्ज हो चुकी है। पाटलिपुत्र अंचल में ही 450 से अधिक लोग अपना जवाब दे चुके हैं। सिर्फ 10 फीसदी लोग ही ला रहे स्वीकृत नक्शा सुनवाई के दौरान निगम अधिकारियों ने पाया कि ज्यादातर लोग जरूरी दस्तावेजों के साथ नहीं पहुंच रहे हैं। करीब 10 प्रतिशत लोग ही स्वीकृत भवन नक्शा प्रस्तुत कर पा रहे हैं। नोटिस का जवाब देने के लिए जमीन की रजिस्ट्री या खतियान, अंचलाधिकारी द्वारा जारी दाखिल-खारिज प्रमाण, निगम से स्वीकृत नक्शा, व्यावसायिक प्रतिष्ठान का रजिस्ट्रेशन और पहचान पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी हैं।

