‘भैंस की घंटी को स्कूल की घंटी समझकर घर निकल जाते थे बच्चे’, शेखर सुमन का वीडियो वायरल

‘भैंस की घंटी को स्कूल की घंटी समझकर घर निकल जाते थे बच्चे’, शेखर सुमन का वीडियो वायरल

Shekhar Suman Statement: अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन ने अपने शो ‘शेखर टुनाइट’ में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने सरकारी स्कूलों में पानी, बिजली और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर तंज कसते हुए राजस्थान के जयपुर के एक स्कूल का उदाहरण दिया, जो कथित तौर पर भैंस के तबेले में चल रहा था। शेखर के इस अंदाज पर सोशल मीडिया यूजर्स भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

सरकारी स्कूलों की हालत पर शेखर का तंज

शेखर सुमन ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के सोशल ऑडिट को लेकर व्यंग्य करते हुए कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ देशभर के सरकारी स्कूलों की हालत जांचने के लिए ‘स्कूल ठीक करो’ कैंपेन लेकर पहुंची है। इसके तहत पानी, बिजली और सफाई जैसी सुविधाओं की स्थिति देखी जा रही है।

इसके बाद उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि आखिर सरकारी स्कूलों में कमी क्या है। शेखर ने पानी की समस्या पर तंज कसते हुए कहा कि दीवारों की सीलन की वजह से 24 घंटे पानी आता है। वहीं, बच्चों को मिलने वाले ‘मार्क्स’ पर भी उन्होंने स्कूलों में बच्चों की पिटाई को लेकर व्यंग्य किया। उन्होंने शिक्षकों पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि सफाई के मामले में भी स्थिति ठीक है और शिक्षक खुद को बचाने के लिए तरह-तरह की सफाई देते हैं।

भैंस के तबेले में चल रहा था स्कूल

शेखर सुमन ने जयपुर के एक स्कूल का जिक्र करते हुए बताया कि एक स्कूल भैंस के तबेले में चल रहा था। उनके मुताबिक, वहां एक तरफ बच्चे पढ़ते थे और दूसरी तरफ कई भैंसें बंधी रहती थीं।

उन्होंने इसी घटना पर मजाकिया अंदाज में कहा कि इससे एक समस्या होती थी। बच्चे ज्यादा देर पढ़ नहीं पाते थे, क्योंकि भैंस के गले में बंधी घंटी बजती तो बच्चे उसे स्कूल की घंटी समझकर घर निकल जाते थे।शेखर का यह पूरा अंदाज सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं पर कटाक्ष के तौर पर सामने आया।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने भी दिए रिएक्शन

शेखर सुमन के इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने लिखा, “लगे हाथ सरकारी अस्पताल भी लपेट लो भाइयों और बहनों।” वहीं दूसरे यूजर ने कमेंट किया, “धो दिया सरकार को।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “और फिर भी भारत विश्व गुरु नहीं बन पा रहा है।” शेखर के इस व्यंग्यात्मक अंदाज पर कई लोगों ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कमेंट किए।

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