भारत-नेपाल सीमा पर शादी के बाद नागरिकता प्रक्रिया हुई आसान:हजारों परिवारों को मिलेगा लाभ, ‘रोटी-बेटी’ संबंध होंगे मजबूत

भारत-नेपाल सीमा पर शादी के बाद नागरिकता प्रक्रिया हुई आसान:हजारों परिवारों को मिलेगा लाभ, ‘रोटी-बेटी’ संबंध होंगे मजबूत

भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई है। दोनों देशों के प्रशासन ने सीमा पार विवाह के बाद महिलाओं को नागरिकता और पहचान संबंधी दस्तावेजों में आने वाली परेशानियों को दूर करने का निर्णय लिया है। यह कदम सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते को और मजबूत करेगा। भारत-नेपाल समन्वय समिति की बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। बैठक में यह तय किया गया कि भारत और नेपाल में विवाह करने वाली महिलाओं को आवश्यक वैध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाएगा। इसके लिए दोनों देशों के प्रशासनिक अधिकारी मिलकर काम करेंगे। शिविरों में लोगों को नियमों की दी जा रही जानकारी भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में नागरिकता से जुड़े नियमों और निर्धारित मापदंडों की जानकारी दी जा रही है, साथ ही आवेदकों की कागजी प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। वहीं, नेपाल सरकार द्वारा नागरिकता संबंधी नियमों में अद्यतन व्यवस्था लागू की गई है, जिससे डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर भारतीय बहुओं को अंगीकृत नेपाली नागरिकता प्राप्त करना आसान हुआ है। शादी के बाद महिलाओं को मिलेगा नेपाली नागरिकता नेपाल के झापा जिले के प्रमुख जिला अधिकारी शिवराम गेलल ने बैठक में बताया कि नियमों के अनुरूप आवश्यक प्रमाण और दस्तावेज उपलब्ध होते ही पात्र महिलाओं की नागरिकता प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी नेपाली नागरिक से विवाह करने वाली विदेशी महिला अंगीकृत नेपाली नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती है। इसके लिए वैध विवाह निबंधन प्रमाणपत्र, पति का नेपाली नागरिकता प्रमाणपत्र, पहचान और आवासीय दस्तावेज, महिला का भारतीय पहचान पत्र या पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र और भारतीय नागरिकता त्यागने का प्रमाण आवश्यक होगा। नई व्यवस्था से लोगों को होगी सुविधा विराटनगर निवासी फिरोज ने बताया कि भारत-नेपाल के बीच विवाह करने वाले परिवारों को अक्सर दस्तावेजों की त्रुटि और अनुपलब्धता के कारण वर्षों तक परेशानी झेलनी पड़ती थी। नई व्यवस्था से इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद बढ़ी है। अनुमंडल दंडाधिकारी अनिकेत कुमार ने कहा कि दोनों देशों के नागरिकों के अभिलेखों में सुधार और नागरिकता संबंधी मामलों पर समन्वय समिति में सकारात्मक चर्चा हुई है। आवश्यक कागजात दुरुस्त होने के बाद नियमानुसार नागरिकता प्रदान की जाएगी। प्रशासन की इस पहल से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई है। दोनों देशों के प्रशासन ने सीमा पार विवाह के बाद महिलाओं को नागरिकता और पहचान संबंधी दस्तावेजों में आने वाली परेशानियों को दूर करने का निर्णय लिया है। यह कदम सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते को और मजबूत करेगा। भारत-नेपाल समन्वय समिति की बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। बैठक में यह तय किया गया कि भारत और नेपाल में विवाह करने वाली महिलाओं को आवश्यक वैध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाएगा। इसके लिए दोनों देशों के प्रशासनिक अधिकारी मिलकर काम करेंगे। शिविरों में लोगों को नियमों की दी जा रही जानकारी भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में नागरिकता से जुड़े नियमों और निर्धारित मापदंडों की जानकारी दी जा रही है, साथ ही आवेदकों की कागजी प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। वहीं, नेपाल सरकार द्वारा नागरिकता संबंधी नियमों में अद्यतन व्यवस्था लागू की गई है, जिससे डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर भारतीय बहुओं को अंगीकृत नेपाली नागरिकता प्राप्त करना आसान हुआ है। शादी के बाद महिलाओं को मिलेगा नेपाली नागरिकता नेपाल के झापा जिले के प्रमुख जिला अधिकारी शिवराम गेलल ने बैठक में बताया कि नियमों के अनुरूप आवश्यक प्रमाण और दस्तावेज उपलब्ध होते ही पात्र महिलाओं की नागरिकता प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी नेपाली नागरिक से विवाह करने वाली विदेशी महिला अंगीकृत नेपाली नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती है। इसके लिए वैध विवाह निबंधन प्रमाणपत्र, पति का नेपाली नागरिकता प्रमाणपत्र, पहचान और आवासीय दस्तावेज, महिला का भारतीय पहचान पत्र या पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र और भारतीय नागरिकता त्यागने का प्रमाण आवश्यक होगा। नई व्यवस्था से लोगों को होगी सुविधा विराटनगर निवासी फिरोज ने बताया कि भारत-नेपाल के बीच विवाह करने वाले परिवारों को अक्सर दस्तावेजों की त्रुटि और अनुपलब्धता के कारण वर्षों तक परेशानी झेलनी पड़ती थी। नई व्यवस्था से इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद बढ़ी है। अनुमंडल दंडाधिकारी अनिकेत कुमार ने कहा कि दोनों देशों के नागरिकों के अभिलेखों में सुधार और नागरिकता संबंधी मामलों पर समन्वय समिति में सकारात्मक चर्चा हुई है। आवश्यक कागजात दुरुस्त होने के बाद नियमानुसार नागरिकता प्रदान की जाएगी। प्रशासन की इस पहल से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।  

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