इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों के बीच जाने और सरकार के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाने का ऐलान किया है। शुक्रवार रात इंदौर शहर कांग्रेस की बैठक के बाद शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि कांग्रेस एक-एक पीड़ित परिवार से मिलेगी। उनकी राय जानने के बाद आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। चौकसे ने जांच रिपोर्ट को दबाव में और पक्षपातपूर्ण तरीके से तैयार की गई रिपोर्ट बताते हुए इसके निष्कर्षों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को कांग्रेस इस मामले में जिम्मेदार मानती है, उनके नाम रिपोर्ट में दोषियों के रूप में नहीं आए हैं। रविवार सुबह 10 बजे से मुलाकात चौकसे ने बताया कि कांग्रेस रविवार सुबह 10 बजे से भागीरथपुरा के पीड़ित परिवारों से मुलाकात शुरू करेगी। कांग्रेस कार्यकर्ता परिवारों से उनकी समस्याएं, अपेक्षाएं और रिपोर्ट को लेकर राय जानेंगे। इसके आधार पर आगे चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा के लोगों को न्याय दिलाना, उन्हें आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी दिलाना कांग्रेस की प्राथमिकता है। 1 करोड़ मुआवजा और नौकरी की मांग कांग्रेस ने प्रत्येक प्रभावित परिवार को कम से कम 1 करोड़ रुपए मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग दोहराई है। चौकसे ने कहा कि जिन लोगों को कांग्रेस इस घटना के लिए जिम्मेदार मानती है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए। मेयर, मंत्री और पार्षद की भूमिका की जांच चौकसे ने कहा कि रिपोर्ट में नगर निगम और प्रशासन से जुड़े जिन अधिकारियों को कांग्रेस जिम्मेदार मानती है, उनके नाम भी सामने नहीं आए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस हादसे में करीब सौ लोगों की जानें गई हैं। उन्होंने मेयर पुष्यमित्र भार्गव, क्षेत्रीय विधायक एवं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की। चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी चौकसे ने कहा कि कांग्रेस भागीरथपुरा के परिवारों के साथ खड़ी है और आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेगी। उनका कहना था कि पार्टी पीड़ित परिवारों की आवाज शहर, प्रदेश और देश तक पहुंचाएगी। उन्होंने कहा कि रविवार को परिवारों से मुलाकात के बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी। 36 लोगों की हुई थी मौत भागीरथपुरा में दूषित पानी की शिकायतों के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए थे और 36 लोगों की मौत हुई थी। घटना की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग गठित किया गया था। आयोग की रिपोर्ट हाल ही में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सार्वजनिक हुई है। रिपोर्ट को लेकर मृतकों और प्रभावित परिवारों के मामले में सरकारी आंकड़ों तथा अलग-अलग पक्षों के दावों में भी अंतर रहा है। कांग्रेस अब इसी रिपोर्ट को मुद्दा बनाकर प्रभावित परिवारों के बीच जाने और सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।

