भागलपुर नगर निगम में पार्षद और कर्मचारियों के बीच विवाद गहरा गया है। वार्ड संख्या 21 के पार्षद संजय सिन्हा पर दबाव बनाने, धमकी देने और कथित अवैध उगाही के आरोप लगाते हुए नगर निगम कर्मचारियों ने शुक्रवार को धरना प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन निगम कार्यालय परिसर के सामने हुआ। नगर निगम कर्मचारी संघ के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों के हाथों में एक खास बैनर था। इस पर बड़े अक्षरों में लिखा था— ‘मैं हूं डॉन, मुझसे सब डरो।’ कर्मचारियों ने इसे कथित दबाव और धमकी की राजनीति के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया। कर्मचारियों का आरोप है कि वे नगर आयुक्त, महापौर और निगम प्रशासन के निर्देश पर शहर के विभिन्न इलाकों में दिन-रात काम करते हैं। उन्हें अक्सर रात 10 से 12 बजे तक भी कार्य करना पड़ता है। उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में उन्हें अधिकारियों के निर्देशानुसार काम करने के लिए सुरक्षित और भयमुक्त माहौल मिलना चाहिए। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वार्ड 21 के पार्षद की ओर से उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। वे ट्रेड लाइसेंस रद्द कराने, अनुकंपा नियुक्ति रोकने और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की धमकी देकर कर्मचारियों को डराने-धमकाने का प्रयास करते हैं। कर्मचारियों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ‘हम केवल प्रशासनिक आदेश के प्रति जवाबदेह’ कर्मचारियों ने अपनी प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बिहार सेवा संहिता और निगम की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत वे नगर आयुक्त के अधीनस्थ कर्मचारी हैं। उनका कहना है कि पार्षदों को अपनी मांग, प्रस्ताव या एजेंडा नियमानुसार महापौर के माध्यम से नगर आयुक्त तक पहुंचाना चाहिए। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वे नियमों के तहत नगर आयुक्त और सक्षम अधिकारियों के आदेशों का पालन करते हैं। किसी पार्षद द्वारा सीधे दबाव, धमकी या भय का माहौल बनाकर उनसे काम कराने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी पर दबाव बनाया जाता है या उसे डराने-धमकाने की कोशिश होती है तो निगम प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। 12 अगस्त की सामान्य समिति बैठक के बाद बढ़ा विवाद कर्मचारी संघ की ओर से महापौर को सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि 12 अगस्त को हुई नगर निगम की सामान्य समिति की बैठक के दौरान वार्ड 21 के पार्षद संजय सिन्हा ने निगम कर्मचारियों पर आरोप लगाए थे। कर्मचारियों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत है तो उसकी जांच दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर कराई जानी चाहिए। कर्मचारी संघ ने मांग की है कि आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई हो, लेकिन बिना जांच किसी कर्मचारी की छवि खराब करने या उसे सार्वजनिक रूप से कटघरे में खड़ा करने की प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। कर्मचारियों ने कहा- दबाव में नहीं करेंगे काम धरना दे रहे कर्मचारियों ने कहा कि निगम के सफाई, प्रशासनिक, योजना और अन्य विभागों के कर्मचारी शहर की व्यवस्था को सुचारु रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद यदि उन पर लगातार आरोप लगाए जाएंगे या उन्हें दबाव में काम करने के लिए मजबूर किया जाएगा तो इससे निगम की कार्यप्रणाली भी प्रभावित होगी। कर्मचारियों ने दो टूक कहा कि वे किसी भी अनुचित दबाव में काम नहीं करेंगे। उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए है। सदस्यता समाप्त करने और कानूनी कार्रवाई की मांग कर्मचारियों ने नगर आयुक्त, महापौर और निगम प्रशासन से वार्ड 21 के पार्षद के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। साथ ही कर्मचारियों की ओर से पार्षद की सदस्यता समाप्त करने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी रखी गई है। कर्मचारी संघ का कहना है कि इस संबंध में निगम प्रशासन को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। यदि आरोपों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होता है और कर्मचारियों पर दबाव या धमकी जारी रहती है, तो कर्मचारियों ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात भी कही है। दो दिनों तक चलेगा धरना नगर निगम कर्मचारी संघ ने अपने विरोध को दो दिनों तक जारी रखने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य निगम का कामकाज बाधित करना नहीं, बल्कि प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। कर्मचारियों ने कहा कि वे नगर निगम की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पूरी निष्ठा से काम करते हैं। ऐसे में उन्हें भी सम्मान के साथ काम करने का अधिकार है। यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन धमकी, दबाव या कथित उगाही के जरिए काम कराने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। भागलपुर नगर निगम में पार्षद और कर्मचारियों के बीच विवाद गहरा गया है। वार्ड संख्या 21 के पार्षद संजय सिन्हा पर दबाव बनाने, धमकी देने और कथित अवैध उगाही के आरोप लगाते हुए नगर निगम कर्मचारियों ने शुक्रवार को धरना प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन निगम कार्यालय परिसर के सामने हुआ। नगर निगम कर्मचारी संघ के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों के हाथों में एक खास बैनर था। इस पर बड़े अक्षरों में लिखा था— ‘मैं हूं डॉन, मुझसे सब डरो।’ कर्मचारियों ने इसे कथित दबाव और धमकी की राजनीति के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया। कर्मचारियों का आरोप है कि वे नगर आयुक्त, महापौर और निगम प्रशासन के निर्देश पर शहर के विभिन्न इलाकों में दिन-रात काम करते हैं। उन्हें अक्सर रात 10 से 12 बजे तक भी कार्य करना पड़ता है। उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में उन्हें अधिकारियों के निर्देशानुसार काम करने के लिए सुरक्षित और भयमुक्त माहौल मिलना चाहिए। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वार्ड 21 के पार्षद की ओर से उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। वे ट्रेड लाइसेंस रद्द कराने, अनुकंपा नियुक्ति रोकने और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की धमकी देकर कर्मचारियों को डराने-धमकाने का प्रयास करते हैं। कर्मचारियों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ‘हम केवल प्रशासनिक आदेश के प्रति जवाबदेह’ कर्मचारियों ने अपनी प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बिहार सेवा संहिता और निगम की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत वे नगर आयुक्त के अधीनस्थ कर्मचारी हैं। उनका कहना है कि पार्षदों को अपनी मांग, प्रस्ताव या एजेंडा नियमानुसार महापौर के माध्यम से नगर आयुक्त तक पहुंचाना चाहिए। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वे नियमों के तहत नगर आयुक्त और सक्षम अधिकारियों के आदेशों का पालन करते हैं। किसी पार्षद द्वारा सीधे दबाव, धमकी या भय का माहौल बनाकर उनसे काम कराने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी पर दबाव बनाया जाता है या उसे डराने-धमकाने की कोशिश होती है तो निगम प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। 12 अगस्त की सामान्य समिति बैठक के बाद बढ़ा विवाद कर्मचारी संघ की ओर से महापौर को सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि 12 अगस्त को हुई नगर निगम की सामान्य समिति की बैठक के दौरान वार्ड 21 के पार्षद संजय सिन्हा ने निगम कर्मचारियों पर आरोप लगाए थे। कर्मचारियों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत है तो उसकी जांच दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर कराई जानी चाहिए। कर्मचारी संघ ने मांग की है कि आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई हो, लेकिन बिना जांच किसी कर्मचारी की छवि खराब करने या उसे सार्वजनिक रूप से कटघरे में खड़ा करने की प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। कर्मचारियों ने कहा- दबाव में नहीं करेंगे काम धरना दे रहे कर्मचारियों ने कहा कि निगम के सफाई, प्रशासनिक, योजना और अन्य विभागों के कर्मचारी शहर की व्यवस्था को सुचारु रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद यदि उन पर लगातार आरोप लगाए जाएंगे या उन्हें दबाव में काम करने के लिए मजबूर किया जाएगा तो इससे निगम की कार्यप्रणाली भी प्रभावित होगी। कर्मचारियों ने दो टूक कहा कि वे किसी भी अनुचित दबाव में काम नहीं करेंगे। उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए है। सदस्यता समाप्त करने और कानूनी कार्रवाई की मांग कर्मचारियों ने नगर आयुक्त, महापौर और निगम प्रशासन से वार्ड 21 के पार्षद के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। साथ ही कर्मचारियों की ओर से पार्षद की सदस्यता समाप्त करने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी रखी गई है। कर्मचारी संघ का कहना है कि इस संबंध में निगम प्रशासन को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। यदि आरोपों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होता है और कर्मचारियों पर दबाव या धमकी जारी रहती है, तो कर्मचारियों ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात भी कही है। दो दिनों तक चलेगा धरना नगर निगम कर्मचारी संघ ने अपने विरोध को दो दिनों तक जारी रखने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य निगम का कामकाज बाधित करना नहीं, बल्कि प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। कर्मचारियों ने कहा कि वे नगर निगम की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पूरी निष्ठा से काम करते हैं। ऐसे में उन्हें भी सम्मान के साथ काम करने का अधिकार है। यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन धमकी, दबाव या कथित उगाही के जरिए काम कराने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

