भागलपुर में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर और रुक-रुककर हो रही बारिश से बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। नाथनगर प्रखंड के रत्तीपुर, बैरिया, शंकरपुर, अजमेरीपुर, रसीदपुर, श्रीरामपुर और आसपास के कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है। दिलदारपुर बिनटोला समेत निचले इलाकों में पानी घरों के चारों ओर जमा है, जिसके कारण ग्रामीण परिवार और जरूरी सामान लेकर सुरक्षित व ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। करीब पांच हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। कई परिवार रवींद्र भवन और टीलाकोठी जैसे ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बाढ़ के साथ बारिश ने अस्थायी ठिकानों पर रहना भी मुश्किल कर दिया है। घरों में रखा कपड़ा, बिस्तर, अनाज, जलावन और घरेलू सामान पानी और बारिश में भीग गया है। चूल्हा और जलावन भीग जाने के कारण कई परिवार खाना नहीं बना पा रहे हैं और सूखा राशन खाकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं। बाढ़ से जूझ रहे पीड़ितों की 3 तस्वीरें देखिए किसी तरह चारा जुटाकर पशुओं को खिला रहे बाढ़ पीड़ित दूसरी ओर पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहराने लगा है। महिलाएं आसपास के इलाकों से किसी तरह चारा जुटाकर पशुओं को खिला रही हैं। बाढ़ के पानी के बीच सांप-बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों के निकलने से लोगों में दहशत है। यही वजह है कि रात में भी जागकर समय काटना पड़ रहा है। पीड़ितों को अब तक उन्हें पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिली है और बारिश से बचाव के लिए प्लास्टिक, टेंट और अन्य जरूरी सामग्री की भी जरूरत है। बाढ़ पीड़ित सदानंद महतो बोले- हर साल ऐसी ही मजबूरी होती है दिलदारपुर बिनटोला से टीलाकोठी स्थित रवींद्र भवन में शरण लेने पहुंचे सदानंद महतो ने बताया कि बाढ़ का पानी एक दिन कुछ कम हुआ था, लेकिन इसके बाद रात से पानी तेजी से बढ़ रहा है। ऊपर से बारिश ने परेशानी और बढ़ा दी है। घर चारों तरफ से पानी से घिर गया है। खाने-पकाने के लिए जलावन तक नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि अगर प्लास्टिक या टेंट की व्यवस्था हो जाए तो बारिश से बचकर रह सकते हैं, लेकिन फिलहाल फटी हुई पन्नी के सहारे रहने को मजबूर हैं। सदानंद महतो ने बताया कि शंकरपुर बिनटोला, दिलदारपुर और रत्तीपुर-बैरिया समेत कई इलाके बाढ़ प्रभावित हैं। हर साल बाढ़ आने पर वे लोग रवींद्र भवन और टीलाकोठी जैसे स्थानों पर शरण लेते हैं, लेकिन इस बार बारिश ने परेशानी ज्यादा बढ़ा दी है। ‘बाल-बच्चों के साथ खुले में रहने की मजबूरी’ बाढ़ पीड़ित वकील निषाद ने बताया कि बाढ़ आने के बाद किसी तरह बाल-बच्चों को लेकर ऊंचे स्थान पर भागकर आए हैं। यहां रहने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी नहीं हो पाई है। बारिश में भीगते हुए परिवार के साथ समय काटना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि ऊंचे स्थान पर बोरा और पन्नी के सहारे किसी तरह परिवार और पशुओं को रखा जा रहा है। बाढ़ के पानी के कारण रोजाना सांप और जहरीले कीड़े निकल रहे हैं। रात में जागकर लोगों को समय काटना पड़ता है। वकील निषाद ने कहा कि पिछले साल भी सांप निकलने के दौरान एक महिला को सांप ने काट लिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद अब तक बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्लास्टिक और टेंट, भोजन, सूखा राशन, जलावन, पेयजल, पशु चारा और जहरीले जीवों से बचाव की व्यवस्था कराने की मांग की है। भागलपुर में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर और रुक-रुककर हो रही बारिश से बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। नाथनगर प्रखंड के रत्तीपुर, बैरिया, शंकरपुर, अजमेरीपुर, रसीदपुर, श्रीरामपुर और आसपास के कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है। दिलदारपुर बिनटोला समेत निचले इलाकों में पानी घरों के चारों ओर जमा है, जिसके कारण ग्रामीण परिवार और जरूरी सामान लेकर सुरक्षित व ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। करीब पांच हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। कई परिवार रवींद्र भवन और टीलाकोठी जैसे ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बाढ़ के साथ बारिश ने अस्थायी ठिकानों पर रहना भी मुश्किल कर दिया है। घरों में रखा कपड़ा, बिस्तर, अनाज, जलावन और घरेलू सामान पानी और बारिश में भीग गया है। चूल्हा और जलावन भीग जाने के कारण कई परिवार खाना नहीं बना पा रहे हैं और सूखा राशन खाकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं। बाढ़ से जूझ रहे पीड़ितों की 3 तस्वीरें देखिए किसी तरह चारा जुटाकर पशुओं को खिला रहे बाढ़ पीड़ित दूसरी ओर पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहराने लगा है। महिलाएं आसपास के इलाकों से किसी तरह चारा जुटाकर पशुओं को खिला रही हैं। बाढ़ के पानी के बीच सांप-बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों के निकलने से लोगों में दहशत है। यही वजह है कि रात में भी जागकर समय काटना पड़ रहा है। पीड़ितों को अब तक उन्हें पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिली है और बारिश से बचाव के लिए प्लास्टिक, टेंट और अन्य जरूरी सामग्री की भी जरूरत है। बाढ़ पीड़ित सदानंद महतो बोले- हर साल ऐसी ही मजबूरी होती है दिलदारपुर बिनटोला से टीलाकोठी स्थित रवींद्र भवन में शरण लेने पहुंचे सदानंद महतो ने बताया कि बाढ़ का पानी एक दिन कुछ कम हुआ था, लेकिन इसके बाद रात से पानी तेजी से बढ़ रहा है। ऊपर से बारिश ने परेशानी और बढ़ा दी है। घर चारों तरफ से पानी से घिर गया है। खाने-पकाने के लिए जलावन तक नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि अगर प्लास्टिक या टेंट की व्यवस्था हो जाए तो बारिश से बचकर रह सकते हैं, लेकिन फिलहाल फटी हुई पन्नी के सहारे रहने को मजबूर हैं। सदानंद महतो ने बताया कि शंकरपुर बिनटोला, दिलदारपुर और रत्तीपुर-बैरिया समेत कई इलाके बाढ़ प्रभावित हैं। हर साल बाढ़ आने पर वे लोग रवींद्र भवन और टीलाकोठी जैसे स्थानों पर शरण लेते हैं, लेकिन इस बार बारिश ने परेशानी ज्यादा बढ़ा दी है। ‘बाल-बच्चों के साथ खुले में रहने की मजबूरी’ बाढ़ पीड़ित वकील निषाद ने बताया कि बाढ़ आने के बाद किसी तरह बाल-बच्चों को लेकर ऊंचे स्थान पर भागकर आए हैं। यहां रहने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी नहीं हो पाई है। बारिश में भीगते हुए परिवार के साथ समय काटना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि ऊंचे स्थान पर बोरा और पन्नी के सहारे किसी तरह परिवार और पशुओं को रखा जा रहा है। बाढ़ के पानी के कारण रोजाना सांप और जहरीले कीड़े निकल रहे हैं। रात में जागकर लोगों को समय काटना पड़ता है। वकील निषाद ने कहा कि पिछले साल भी सांप निकलने के दौरान एक महिला को सांप ने काट लिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद अब तक बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्लास्टिक और टेंट, भोजन, सूखा राशन, जलावन, पेयजल, पशु चारा और जहरीले जीवों से बचाव की व्यवस्था कराने की मांग की है।

