भागलपुर- बाढ़ राहत शिविर में गैस खत्म, 400 लोग भूखे:चार घंटे तक बिलखते रहे बच्चे, प्राइवेट फंड से दो सिलेंडर पहुंचने पर बन सका खाना

भागलपुर- बाढ़ राहत शिविर में गैस खत्म, 400 लोग भूखे:चार घंटे तक बिलखते रहे बच्चे, प्राइवेट फंड से दो सिलेंडर पहुंचने पर बन सका खाना

भागलपुर में बाढ़ के बीच राहत शिविरों में सरकारी इंतजामों की कमी दिखी। गोराडीह प्रखंड की उस्तूपंचायत के श्रीरामपुर बी बस्ती में एक राहत शिविर में राशन तो था, लेकिन खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर खत्म हो गया। इस वजह से करीब 400 बाढ़ पीड़ितों को सुबह से दोपहर तक भूखा रहना पड़ा। शिविर में खाना बनाने का सामान मौजूद था, लेकिन रसोई गैस नहीं होने के कारण चूल्हा नहीं जल सका। बाढ़ के पानी से घिरे लोगों को उम्मीद थी कि राहत शिविर में उन्हें समय पर खाना मिलेगा, लेकिन गैस खत्म होने से उनकी यह उम्मीद भी टूट गई। बाढ़ प्रभावित बोले- सुबह से खाना के लिए बच्चे इंतजार करते रहे स्थानीय लोगों ने बताया कि शिविर में राशन तो था, लेकिन रसोई गैस सिलेंडर खत्म हो गया था। इस कारण सुबह से खाना नहीं बन पाया। दोपहर होने तक भी शिविर में मौजूद बाढ़ पीड़ित खाने का इंतजार करते रहे। जब हालात ज्यादा खराब हुए, तो निजी कोष से दो गैस सिलेंडर का इंतजाम किया गया। इसके बाद ही शिविर की रसोई में खाना बन सका और बाढ़ पीड़ितों को भोजन मिल पाया। उन्होंने कहा कि सुबह से लेकर चार घंटे तक बच्चे बिलखते रहे थे। स्थानीय लोगों ने कहा कि राहत शिविर में खाने का इंतजाम लगातार होना चाहिए। इसके लिए गैस, जलावन और बाकी जरूरी सामान पहले से मौजूद होने चाहिए। सूचना मिलते ही जिला परिषद प्रत्याशी ने संभाली कमान मामले की जानकारी मिलने के बाद गोराडीह पश्चिमी क्षेत्र से जिला परिषद प्रत्याशी और उनके प्रतिनिधि राहत शिविर पहुंचे। वहां की स्थिति देखने के बाद उन्होंने तत्काल अपने निजी कोष से दो रसोई गैस सिलेंडरों की व्यवस्था कराई। सिलेंडर राहत शिविर पहुंचने के बाद रसोई में दोबारा खाना बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन तैयार किया जाने लगा। जिला परिषद प्रत्याशी छोटू यादव ने कहा कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा है, लेकिन ऐसी स्थिति में लोगों को भोजन के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस जनता ने उन्हें अपना आशीर्वाद दिया है, वह उनके लिए परिवार की तरह है और जब तक लोग भूखे हैं, तब तक वह चैन से नहीं बैठ सकते। जिला परिषद प्रत्याशी बोले- जनता भूखी रहे, यह बर्दाश्त नहीं उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें सूचना मिली कि राहत शिविर में सुबह से भोजन नहीं बन पाया है, उन्होंने तत्काल सिलेंडर की व्यवस्था कराई। उनका कहना था कि संकट की घड़ी में जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाना सबसे जरूरी है। गैस की व्यवस्था होने के बाद शिविर में भोजन बनाने का काम फिर शुरू हो गया। बाढ़ का पानी उतर रहा, लेकिन नई मुसीबत दे रही दस्तक राहत शिविर में भोजन की समस्या के बाद जिला परिषद प्रत्याशी ने गोराडीह प्रखंड के कई बाढ़ प्रभावित गांवों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि कई इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन पानी घटने के साथ ही दूसरी समस्या सामने आने लगी है। जलजमाव वाले क्षेत्रों में गंदगी और बदबू फैलने लगी है, जिससे संक्रमण और विभिन्न प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण गांवों में स्वच्छता की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। हर बाढ़ प्रभावित गांव में मेडिकल कैंप और ब्लीचिंग छिड़काव की मांग उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद संभावित बीमारी के खतरे को देखते हुए प्रभावित गांवों में तत्काल मेडिकल कैंप लगाए जाएं और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाए। उनका कहना है कि बाढ़ के दौरान लोगों को भोजन और सुरक्षित आश्रय की जरूरत थी, जबकि पानी घटने के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में प्रशासन को पहले से तैयारी करते हुए प्रभावित गांवों में स्वास्थ्यकर्मियों की टीम भेजनी चाहिए। भागलपुर में बाढ़ के बीच राहत शिविरों में सरकारी इंतजामों की कमी दिखी। गोराडीह प्रखंड की उस्तूपंचायत के श्रीरामपुर बी बस्ती में एक राहत शिविर में राशन तो था, लेकिन खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर खत्म हो गया। इस वजह से करीब 400 बाढ़ पीड़ितों को सुबह से दोपहर तक भूखा रहना पड़ा। शिविर में खाना बनाने का सामान मौजूद था, लेकिन रसोई गैस नहीं होने के कारण चूल्हा नहीं जल सका। बाढ़ के पानी से घिरे लोगों को उम्मीद थी कि राहत शिविर में उन्हें समय पर खाना मिलेगा, लेकिन गैस खत्म होने से उनकी यह उम्मीद भी टूट गई। बाढ़ प्रभावित बोले- सुबह से खाना के लिए बच्चे इंतजार करते रहे स्थानीय लोगों ने बताया कि शिविर में राशन तो था, लेकिन रसोई गैस सिलेंडर खत्म हो गया था। इस कारण सुबह से खाना नहीं बन पाया। दोपहर होने तक भी शिविर में मौजूद बाढ़ पीड़ित खाने का इंतजार करते रहे। जब हालात ज्यादा खराब हुए, तो निजी कोष से दो गैस सिलेंडर का इंतजाम किया गया। इसके बाद ही शिविर की रसोई में खाना बन सका और बाढ़ पीड़ितों को भोजन मिल पाया। उन्होंने कहा कि सुबह से लेकर चार घंटे तक बच्चे बिलखते रहे थे। स्थानीय लोगों ने कहा कि राहत शिविर में खाने का इंतजाम लगातार होना चाहिए। इसके लिए गैस, जलावन और बाकी जरूरी सामान पहले से मौजूद होने चाहिए। सूचना मिलते ही जिला परिषद प्रत्याशी ने संभाली कमान मामले की जानकारी मिलने के बाद गोराडीह पश्चिमी क्षेत्र से जिला परिषद प्रत्याशी और उनके प्रतिनिधि राहत शिविर पहुंचे। वहां की स्थिति देखने के बाद उन्होंने तत्काल अपने निजी कोष से दो रसोई गैस सिलेंडरों की व्यवस्था कराई। सिलेंडर राहत शिविर पहुंचने के बाद रसोई में दोबारा खाना बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन तैयार किया जाने लगा। जिला परिषद प्रत्याशी छोटू यादव ने कहा कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा है, लेकिन ऐसी स्थिति में लोगों को भोजन के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस जनता ने उन्हें अपना आशीर्वाद दिया है, वह उनके लिए परिवार की तरह है और जब तक लोग भूखे हैं, तब तक वह चैन से नहीं बैठ सकते। जिला परिषद प्रत्याशी बोले- जनता भूखी रहे, यह बर्दाश्त नहीं उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें सूचना मिली कि राहत शिविर में सुबह से भोजन नहीं बन पाया है, उन्होंने तत्काल सिलेंडर की व्यवस्था कराई। उनका कहना था कि संकट की घड़ी में जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाना सबसे जरूरी है। गैस की व्यवस्था होने के बाद शिविर में भोजन बनाने का काम फिर शुरू हो गया। बाढ़ का पानी उतर रहा, लेकिन नई मुसीबत दे रही दस्तक राहत शिविर में भोजन की समस्या के बाद जिला परिषद प्रत्याशी ने गोराडीह प्रखंड के कई बाढ़ प्रभावित गांवों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि कई इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन पानी घटने के साथ ही दूसरी समस्या सामने आने लगी है। जलजमाव वाले क्षेत्रों में गंदगी और बदबू फैलने लगी है, जिससे संक्रमण और विभिन्न प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण गांवों में स्वच्छता की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। हर बाढ़ प्रभावित गांव में मेडिकल कैंप और ब्लीचिंग छिड़काव की मांग उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद संभावित बीमारी के खतरे को देखते हुए प्रभावित गांवों में तत्काल मेडिकल कैंप लगाए जाएं और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाए। उनका कहना है कि बाढ़ के दौरान लोगों को भोजन और सुरक्षित आश्रय की जरूरत थी, जबकि पानी घटने के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में प्रशासन को पहले से तैयारी करते हुए प्रभावित गांवों में स्वास्थ्यकर्मियों की टीम भेजनी चाहिए।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *