पश्चिम चंपारण के नौतन प्रखंड की झखरा पंचायत स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बसवरिया में शिक्षकों ने अनूठी पहल की है। यहां स्कूल परिसर में जैविक तरीके से हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं। इन सब्जियों का इस्तेमाल बच्चों के मध्याह्न भोजन (एमडीएम) में किया जाता है। इससे बच्चों को ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल रही हैं। साथ ही उन्हें जैविक खेती और प्रकृति के महत्व की जानकारी भी दी जा रही है। स्कूल परिसर में उगा रहे हरी सब्जियां प्रधानाध्यापक राज किशोर प्रसाद के नेतृत्व में स्कूल के शिक्षक, रसोइया और बच्चे मिलकर सब्जियों की खेती करते हैं। स्कूल परिसर में केला, भिंडी, नेनुआ और लौकी के पौधे लगाए गए हैं। इनकी देखभाल से लेकर उनकी जरूरतों का ध्यान रखने तक में सभी की भागीदारी रहती है। बिना रासायनिक खाद के हो रही खेती प्रधानाध्यापक राज किशोर प्रसाद ने बताया कि स्कूल परिसर में बिना रासायनिक खाद के सब्जियां उगाई जाती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ जैविक खेती के प्रति जागरूक करना है। स्कूल में उगाई गई सब्जियां सप्ताह में दो दिन बच्चों के मध्याह्न भोजन में परोसी जाती हैं। खेती से प्रकृति के प्रति बढ़ रहा लगाव इस पहल से बच्चों को पढ़ाई के साथ खेती की व्यावहारिक जानकारी भी मिल रही है। पौधों की देखभाल और सब्जियां उगाने की प्रक्रिया में भाग लेकर बच्चे प्रकृति के करीब आ रहे हैं। शिक्षकों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है और वे खेती के महत्व को भी समझते हैं। इस पहल में शिक्षक खुर्शीद आलम, सुलेमान और प्रियंका कुमारी भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। स्कूल परिसर में की जा रही यह खेती बच्चों को पौष्टिक भोजन देने के साथ उन्हें प्रकृति और जैविक खेती से जोड़ने का प्रयास है। पश्चिम चंपारण के नौतन प्रखंड की झखरा पंचायत स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बसवरिया में शिक्षकों ने अनूठी पहल की है। यहां स्कूल परिसर में जैविक तरीके से हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं। इन सब्जियों का इस्तेमाल बच्चों के मध्याह्न भोजन (एमडीएम) में किया जाता है। इससे बच्चों को ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल रही हैं। साथ ही उन्हें जैविक खेती और प्रकृति के महत्व की जानकारी भी दी जा रही है। स्कूल परिसर में उगा रहे हरी सब्जियां प्रधानाध्यापक राज किशोर प्रसाद के नेतृत्व में स्कूल के शिक्षक, रसोइया और बच्चे मिलकर सब्जियों की खेती करते हैं। स्कूल परिसर में केला, भिंडी, नेनुआ और लौकी के पौधे लगाए गए हैं। इनकी देखभाल से लेकर उनकी जरूरतों का ध्यान रखने तक में सभी की भागीदारी रहती है। बिना रासायनिक खाद के हो रही खेती प्रधानाध्यापक राज किशोर प्रसाद ने बताया कि स्कूल परिसर में बिना रासायनिक खाद के सब्जियां उगाई जाती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ जैविक खेती के प्रति जागरूक करना है। स्कूल में उगाई गई सब्जियां सप्ताह में दो दिन बच्चों के मध्याह्न भोजन में परोसी जाती हैं। खेती से प्रकृति के प्रति बढ़ रहा लगाव इस पहल से बच्चों को पढ़ाई के साथ खेती की व्यावहारिक जानकारी भी मिल रही है। पौधों की देखभाल और सब्जियां उगाने की प्रक्रिया में भाग लेकर बच्चे प्रकृति के करीब आ रहे हैं। शिक्षकों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है और वे खेती के महत्व को भी समझते हैं। इस पहल में शिक्षक खुर्शीद आलम, सुलेमान और प्रियंका कुमारी भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। स्कूल परिसर में की जा रही यह खेती बच्चों को पौष्टिक भोजन देने के साथ उन्हें प्रकृति और जैविक खेती से जोड़ने का प्रयास है।

