बेतिया जिले के बैरिया प्रखंड की लौकरिया मुसहरी टोला पंचायत में आग और बाढ़ से प्रभावित कई परिवारों को अब तक सरकारी मुआवजा और राहत राशि नहीं मिली है। पीड़ित परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि राहत वितरण में गड़बड़ी हुई है। वास्तविक पीड़ितों को छोड़कर अपात्र लोगों को मुआवजे की राशि दे दी गई। पहले आग से घर जले, फिर बाढ़ ने उजाड़ी गृहस्थी पंचायत में पहले आग लगने से कई परिवारों के घर जलकर राख हो गए थे। इसके बाद बाढ़ का पानी कई घरों में घुस गया। इससे मकान क्षतिग्रस्त हुए और लोगों की गृहस्थी तबाह हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि आगजनी में जिन परिवारों के घर पूरी तरह जल गए थे, उनमें से कई को अब तक निर्धारित मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, बाढ़ से प्रभावित परिवार भी सरकारी सहायता का इंतजार कर रहे हैं। अपात्रों को भुगतान, असली पीड़ितों की अनदेखी का आरोप ग्रामीणों ने राहत और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वास्तविक पीड़ितों को सरकारी सहायता से वंचित कर दिया गया, जबकि ऐसे लोगों को मुआवजे की राशि दे दी गई, जो इसके पात्र नहीं थे। कथित गड़बड़ी के कारण जरूरतमंद परिवारों को अपने हक के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। DM से जांच और दोबारा सत्यापन कराने की मांग मुआवजा नहीं मिलने और राहत वितरण में कथित अनियमितता से नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को जिला पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की अपील की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि आगजनी और बाढ़ से प्रभावित परिवारों का दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाए। राहत राशि के वितरण की जांच हो और अनियमितता में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी वास्तविक पीड़ित परिवारों को सरकारी प्रावधानों के अनुसार जल्द मुआवजा देने की मांग की गई है। अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि उनकी शिकायत पर कब कार्रवाई होती है और प्रभावित परिवारों को उनका हक कब मिलता है। बेतिया जिले के बैरिया प्रखंड की लौकरिया मुसहरी टोला पंचायत में आग और बाढ़ से प्रभावित कई परिवारों को अब तक सरकारी मुआवजा और राहत राशि नहीं मिली है। पीड़ित परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि राहत वितरण में गड़बड़ी हुई है। वास्तविक पीड़ितों को छोड़कर अपात्र लोगों को मुआवजे की राशि दे दी गई। पहले आग से घर जले, फिर बाढ़ ने उजाड़ी गृहस्थी पंचायत में पहले आग लगने से कई परिवारों के घर जलकर राख हो गए थे। इसके बाद बाढ़ का पानी कई घरों में घुस गया। इससे मकान क्षतिग्रस्त हुए और लोगों की गृहस्थी तबाह हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि आगजनी में जिन परिवारों के घर पूरी तरह जल गए थे, उनमें से कई को अब तक निर्धारित मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, बाढ़ से प्रभावित परिवार भी सरकारी सहायता का इंतजार कर रहे हैं। अपात्रों को भुगतान, असली पीड़ितों की अनदेखी का आरोप ग्रामीणों ने राहत और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वास्तविक पीड़ितों को सरकारी सहायता से वंचित कर दिया गया, जबकि ऐसे लोगों को मुआवजे की राशि दे दी गई, जो इसके पात्र नहीं थे। कथित गड़बड़ी के कारण जरूरतमंद परिवारों को अपने हक के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। DM से जांच और दोबारा सत्यापन कराने की मांग मुआवजा नहीं मिलने और राहत वितरण में कथित अनियमितता से नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को जिला पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की अपील की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि आगजनी और बाढ़ से प्रभावित परिवारों का दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाए। राहत राशि के वितरण की जांच हो और अनियमितता में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी वास्तविक पीड़ित परिवारों को सरकारी प्रावधानों के अनुसार जल्द मुआवजा देने की मांग की गई है। अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि उनकी शिकायत पर कब कार्रवाई होती है और प्रभावित परिवारों को उनका हक कब मिलता है।

