बेतिया के मझौलिया थाना क्षेत्र के धनकुटवा गांव में सोमवार को 68 वर्षीय अधिवक्ता साधु शरण उपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद बेतिया व्यवहार न्यायालय परिसर में पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस एक मामले में आरोपी बनाए गए अधिवक्ता को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने पहुंची थी। गिरफ्तारी की जानकारी मिलते ही कई अधिवक्ता कोर्ट परिसर में जुट गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे। जमीन पर काम करने के दौरान पुलिस पहुंची साधु शरण उपाध्याय के मुताबिक, वह अपनी जमीन पर काम कर रहे थे। जमीन को लेकर पहले से कोर्ट में टाइटल सूट चल रहा है। उनका आरोप है कि पुलिस अचानक मौके पर पहुंची और काम बंद करने को कहा। काम रोकने के बाद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। विरोध करने पर उन्हें जबरन पुलिस वाहन में बैठाकर थाने ले जाया गया। कोर्ट में पेशी के दौरान जुटे अधिवक्ता पुलिस ने बाद में अधिवक्ता को बेतिया व्यवहार न्यायालय में पेश किया। उनकी गिरफ्तारी की जानकारी मिलने पर कई अधिवक्ता कोर्ट परिसर में पहुंच गए। अधिवक्ताओं ने पुलिस से साधु शरण उपाध्याय को हिरासत में लेने की कार्रवाई का विरोध किया। इससे कोर्ट परिसर में काफी देर तक गहमागहमी की स्थिति बनी रही। पुलिस अधिवक्ता को लेकर जज के आवास पहुंची विरोध के बीच पुलिस साधु शरण उपाध्याय को लेकर जज के आवास पहुंची। इसकी जानकारी मिलने पर कई अधिवक्ता भी जज के घर के पास पहुंच गए। वहां भी पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तनावपूर्ण माहौल बना रहा। पांच हजार जुर्माना लगाने के बाद छोड़ा मामले की सुनवाई के दौरान जज ने अधिवक्ता साधु शरण उपाध्याय पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। कोर्ट परिसर में हुई इस घटना को लेकर अधिवक्ताओं में पुलिस कार्रवाई के प्रति नाराजगी देखने को मिली। पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल वरिष्ठ अधिवक्ता रणजीत तिवारी ने बताया कि साधु शरण उपाध्याय करीब 30 वर्षों से वकालत कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और उन्हें जबरन गिरफ्तार किया गया। विरोध करने पर थाने ले गई पुलिस साधु शरण उपाध्याय ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जमीन पर काम रोकने के बाद उन्होंने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया था। इसके बाद पुलिस उन्हें जबरन वाहन में बैठाकर थाने ले गई और फिर कोर्ट में पेश किया। पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी मामले में अधिवक्ता और उनके साथियों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, गिरफ्तारी के आधार, संबंधित केस की धाराओं और पुलिस की कार्रवाई को लेकर पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है। बेतिया के मझौलिया थाना क्षेत्र के धनकुटवा गांव में सोमवार को 68 वर्षीय अधिवक्ता साधु शरण उपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद बेतिया व्यवहार न्यायालय परिसर में पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस एक मामले में आरोपी बनाए गए अधिवक्ता को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने पहुंची थी। गिरफ्तारी की जानकारी मिलते ही कई अधिवक्ता कोर्ट परिसर में जुट गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे। जमीन पर काम करने के दौरान पुलिस पहुंची साधु शरण उपाध्याय के मुताबिक, वह अपनी जमीन पर काम कर रहे थे। जमीन को लेकर पहले से कोर्ट में टाइटल सूट चल रहा है। उनका आरोप है कि पुलिस अचानक मौके पर पहुंची और काम बंद करने को कहा। काम रोकने के बाद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। विरोध करने पर उन्हें जबरन पुलिस वाहन में बैठाकर थाने ले जाया गया। कोर्ट में पेशी के दौरान जुटे अधिवक्ता पुलिस ने बाद में अधिवक्ता को बेतिया व्यवहार न्यायालय में पेश किया। उनकी गिरफ्तारी की जानकारी मिलने पर कई अधिवक्ता कोर्ट परिसर में पहुंच गए। अधिवक्ताओं ने पुलिस से साधु शरण उपाध्याय को हिरासत में लेने की कार्रवाई का विरोध किया। इससे कोर्ट परिसर में काफी देर तक गहमागहमी की स्थिति बनी रही। पुलिस अधिवक्ता को लेकर जज के आवास पहुंची विरोध के बीच पुलिस साधु शरण उपाध्याय को लेकर जज के आवास पहुंची। इसकी जानकारी मिलने पर कई अधिवक्ता भी जज के घर के पास पहुंच गए। वहां भी पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तनावपूर्ण माहौल बना रहा। पांच हजार जुर्माना लगाने के बाद छोड़ा मामले की सुनवाई के दौरान जज ने अधिवक्ता साधु शरण उपाध्याय पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। कोर्ट परिसर में हुई इस घटना को लेकर अधिवक्ताओं में पुलिस कार्रवाई के प्रति नाराजगी देखने को मिली। पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल वरिष्ठ अधिवक्ता रणजीत तिवारी ने बताया कि साधु शरण उपाध्याय करीब 30 वर्षों से वकालत कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और उन्हें जबरन गिरफ्तार किया गया। विरोध करने पर थाने ले गई पुलिस साधु शरण उपाध्याय ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जमीन पर काम रोकने के बाद उन्होंने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया था। इसके बाद पुलिस उन्हें जबरन वाहन में बैठाकर थाने ले गई और फिर कोर्ट में पेश किया। पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी मामले में अधिवक्ता और उनके साथियों की ओर से पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, गिरफ्तारी के आधार, संबंधित केस की धाराओं और पुलिस की कार्रवाई को लेकर पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

