पुरानी योजनाओं का भुगतान रोकने पर हाईकोर्ट सख्त:DM ने BDO, BPRO, पंचायत सचिव और पूर्व मुखिया पर कार्रवाई के दिए निर्देश

पुरानी योजनाओं का भुगतान रोकने पर हाईकोर्ट सख्त:DM ने BDO, BPRO, पंचायत सचिव और पूर्व मुखिया पर कार्रवाई के दिए निर्देश

पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद सात निश्चय योजना के तहत कराए गए विकास कार्यों की बकाया राशि के भुगतान का मामला गरमा गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में पूरी कराई गई योजनाओं का भुगतान लंबित रखने और इसके बावजूद नई योजनाओं का चयन करने के मामले में जिलाधिकारी कुमार अनुराग ने कड़ा रुख अपनाया है। डीएम ने संबंधित बीडीओ, बीपीआरओ, पंचायत सचिव और तत्कालीन मुखिया के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया है। सभी के खिलाफ प्रपत्र ‘क’ गठित करने को कहा गया है। भुगतान किए बिना नई योजनाओं का चयन प्रशासन के मुताबिक सरकारी नियमों के तहत किसी पंचायत में पुरानी योजनाओं का काम पूरा होने और उसका पूरा भुगतान किए जाने के बाद ही नई योजना का चयन किया जाना चाहिए। आरोप है कि संबंधित पंचायत में पुरानी योजनाएं पूरी होने के बावजूद उनका भुगतान लंबित रहा और इसके बाद नई योजनाओं का चयन कर लिया गया। तत्कालीन मुखिया ने हाईकोर्ट पहुंचा इस मामले में तत्कालीन मुखिया सुकालू बिंद ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने सात निश्चय योजना के तहत कराए गए कार्यों की बकाया राशि का भुगतान नहीं होने का मामला अदालत के सामने रखा था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और प्रतिनिधियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। कोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन सक्रिय हाईकोर्ट के रुख के बाद जिला प्रशासन ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। डीएम कुमार अनुराग ने संबंधित अधिकारियों और तत्कालीन मुखिया की भूमिका की विभागीय जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रपत्र ‘क’ गठित करने को कहा गया है। अपनी जेब से कराया था काम तत्कालीन मुखिया सुकालू बिंद का कहना है कि उन्होंने सात निश्चय योजना के तहत काम पूरा कराने के लिए अपनी जेब से राशि लगाई थी। इसके बाद भी उन्हें भुगतान नहीं मिल सका। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और डीएम के आदेश के बाद लंबित राशि मिलने की उम्मीद जगी है। करीब 50 लाख रुपये मिलने की उम्मीद करीब पांच साल से भुगतान का इंतजार कर रहे तत्कालीन मुखिया को लगभग 50 लाख रुपये मिलने की उम्मीद है। प्रशासन की ओर से संबंधित विभाग से आवश्यक राशि की मांग की गई है। राशि उपलब्ध होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। जिम्मेदारों पर विभागीय कार्रवाई की तलवार डीएम के आदेश के बाद संबंधित बीडीओ, बीपीआरओ, पंचायत सचिव और तत्कालीन मुखिया के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। अब यह भी जांच का विषय होगा कि योजनाओं का भुगतान लंबित रहने के बावजूद नई योजनाओं के चयन की अनुमति कैसे दी गई। पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद सात निश्चय योजना के तहत कराए गए विकास कार्यों की बकाया राशि के भुगतान का मामला गरमा गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में पूरी कराई गई योजनाओं का भुगतान लंबित रखने और इसके बावजूद नई योजनाओं का चयन करने के मामले में जिलाधिकारी कुमार अनुराग ने कड़ा रुख अपनाया है। डीएम ने संबंधित बीडीओ, बीपीआरओ, पंचायत सचिव और तत्कालीन मुखिया के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया है। सभी के खिलाफ प्रपत्र ‘क’ गठित करने को कहा गया है। भुगतान किए बिना नई योजनाओं का चयन प्रशासन के मुताबिक सरकारी नियमों के तहत किसी पंचायत में पुरानी योजनाओं का काम पूरा होने और उसका पूरा भुगतान किए जाने के बाद ही नई योजना का चयन किया जाना चाहिए। आरोप है कि संबंधित पंचायत में पुरानी योजनाएं पूरी होने के बावजूद उनका भुगतान लंबित रहा और इसके बाद नई योजनाओं का चयन कर लिया गया। तत्कालीन मुखिया ने हाईकोर्ट पहुंचा इस मामले में तत्कालीन मुखिया सुकालू बिंद ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने सात निश्चय योजना के तहत कराए गए कार्यों की बकाया राशि का भुगतान नहीं होने का मामला अदालत के सामने रखा था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और प्रतिनिधियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। कोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन सक्रिय हाईकोर्ट के रुख के बाद जिला प्रशासन ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। डीएम कुमार अनुराग ने संबंधित अधिकारियों और तत्कालीन मुखिया की भूमिका की विभागीय जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रपत्र ‘क’ गठित करने को कहा गया है। अपनी जेब से कराया था काम तत्कालीन मुखिया सुकालू बिंद का कहना है कि उन्होंने सात निश्चय योजना के तहत काम पूरा कराने के लिए अपनी जेब से राशि लगाई थी। इसके बाद भी उन्हें भुगतान नहीं मिल सका। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और डीएम के आदेश के बाद लंबित राशि मिलने की उम्मीद जगी है। करीब 50 लाख रुपये मिलने की उम्मीद करीब पांच साल से भुगतान का इंतजार कर रहे तत्कालीन मुखिया को लगभग 50 लाख रुपये मिलने की उम्मीद है। प्रशासन की ओर से संबंधित विभाग से आवश्यक राशि की मांग की गई है। राशि उपलब्ध होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। जिम्मेदारों पर विभागीय कार्रवाई की तलवार डीएम के आदेश के बाद संबंधित बीडीओ, बीपीआरओ, पंचायत सचिव और तत्कालीन मुखिया के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। अब यह भी जांच का विषय होगा कि योजनाओं का भुगतान लंबित रहने के बावजूद नई योजनाओं के चयन की अनुमति कैसे दी गई।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *