मुजफ्फरपुर के SKMCH और बिहार के दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों के नॉन-एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने वेतन वृद्धि और वेतन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की मांग की है। उन्होंने इस बारे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। डॉक्टरों की तरफ से डॉ. कृष्ण मुरारी शर्मा, डॉ. प्रदीप कुमार और डॉ. अभिषेक कुमार वर्मा ने ज्ञापन के जरिए सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर दिलाया है। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले 8 सालों से उनका वेतन नहीं बढ़ाया गया है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। दूसरे संस्थानों में लगभग दोगुना वेतन मिलने का दावा उन्होंने बताया कि IGIMS पटना, AIIMS पटना और TMH मुजफ्फरपुर जैसे स्वतंत्र संस्थानों में काम करने वाले नॉन-एकेडमिक जूनियर डॉक्टरों को बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले जूनियर डॉक्टरों से लगभग दोगुना वेतन मिलता है। डॉक्टरों का तर्क है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नॉन-एकेडमिक जूनियर डॉक्टरों का मौजूदा वेतन राष्ट्रीय और क्षेत्रीय औसत से काफी कम है। यह ‘समान काम के लिए समान वेतन’ के संवैधानिक नियम का सीधा उल्लंघन है। हर 3 साल पर वेतन बढ़ाने की घोषणा का दिलाया ध्यान जूनियर डॉक्टरों ने याद दिलाया कि उस समय के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की थी कि हर 3 साल पर सभी का वेतनमान बदला और बढ़ाया जाएगा, लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। मांग पूरी नहीं हुई तो बेमियादी हड़ताल की चेतावनी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि अगर स्वास्थ्य विभाग और बिहार सरकार ने जल्द ही उनकी मांग पर सही सुधार और बढ़ोतरी नहीं की तो आने वाले दिनों में पूरे बिहार के सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के जूनियर डॉक्टर एक साथ मिलकर बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे। इस बड़े कदम से राज्य की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। डॉक्टरों ने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द से जल्द इस मानवीय और न्यायपूर्ण मामले पर उचित कार्रवाई करके उनकी समस्याओं का समाधान करेगी। मुजफ्फरपुर के SKMCH और बिहार के दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों के नॉन-एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने वेतन वृद्धि और वेतन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की मांग की है। उन्होंने इस बारे में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। डॉक्टरों की तरफ से डॉ. कृष्ण मुरारी शर्मा, डॉ. प्रदीप कुमार और डॉ. अभिषेक कुमार वर्मा ने ज्ञापन के जरिए सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर दिलाया है। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले 8 सालों से उनका वेतन नहीं बढ़ाया गया है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। दूसरे संस्थानों में लगभग दोगुना वेतन मिलने का दावा उन्होंने बताया कि IGIMS पटना, AIIMS पटना और TMH मुजफ्फरपुर जैसे स्वतंत्र संस्थानों में काम करने वाले नॉन-एकेडमिक जूनियर डॉक्टरों को बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले जूनियर डॉक्टरों से लगभग दोगुना वेतन मिलता है। डॉक्टरों का तर्क है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नॉन-एकेडमिक जूनियर डॉक्टरों का मौजूदा वेतन राष्ट्रीय और क्षेत्रीय औसत से काफी कम है। यह ‘समान काम के लिए समान वेतन’ के संवैधानिक नियम का सीधा उल्लंघन है। हर 3 साल पर वेतन बढ़ाने की घोषणा का दिलाया ध्यान जूनियर डॉक्टरों ने याद दिलाया कि उस समय के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की थी कि हर 3 साल पर सभी का वेतनमान बदला और बढ़ाया जाएगा, लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। मांग पूरी नहीं हुई तो बेमियादी हड़ताल की चेतावनी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि अगर स्वास्थ्य विभाग और बिहार सरकार ने जल्द ही उनकी मांग पर सही सुधार और बढ़ोतरी नहीं की तो आने वाले दिनों में पूरे बिहार के सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के जूनियर डॉक्टर एक साथ मिलकर बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे। इस बड़े कदम से राज्य की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। डॉक्टरों ने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द से जल्द इस मानवीय और न्यायपूर्ण मामले पर उचित कार्रवाई करके उनकी समस्याओं का समाधान करेगी।

