महोबा के पनवाड़ी ब्लॉक के गाड़ो गांव में एक बुजुर्ग का अंतिम संस्कार बारिश के बीच खुले में करना पड़ा। गांव में श्मशान घाट और टीनशेड की सुविधा नहीं है। परिजनों ने पन्नी का तिरपाल लगाकर किसी तरह अंतिम संस्कार किया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने श्मशान घाट और दूसरी सुविधाएं देने की मांग की है। यह घटना शुक्रवार की बताई जा रही है। गांव के करीब 60 साल के गोकुल प्रसाद अहिरवार की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। जब परिजन और ग्रामीण उन्हें अंतिम संस्कार के लिए तय जगह पर ले गए, तो वहां श्मशान घाट की कोई व्यवस्था नहीं थी। न टीनशेड बना था और न ही बारिश या धूप से बचने का कोई इंतजाम था। मृतक के पोते शिवकुमार अहिरवार ने बताया कि अंतिम संस्कार के दौरान अचानक बारिश शुरू हो गई। ऐसे में परिजनों ने पन्नी का तिरपाल लगाया। उसके नीचे अर्थी सजाई और फिर मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। इसी दौरान एक ग्रामीण ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अंतिम संस्कार के लिए जमीन तो है, लेकिन आज तक श्मशान घाट नहीं बन पाया। ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार ग्राम प्रधान और अधिकारियों से श्मशान घाट बनाने की मांग की गई, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है। गाड़ो गांव महोबा मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश की सीमा से लगा है। इसकी आबादी दो हजार से ज्यादा है। ग्रामीण किशोरी, छबिलाल, धनीराम और मैया दीन चौधरी समेत कई लोगों ने डीएम से श्मशान घाट बनवाने और जरूरी सुविधाएं देने की मांग की है।

