छतरपुर में विधायक प्रतिनिधि के लेटरहेड पर अशोक चिन्ह:पटवारी ट्रांसफर के लिए कलेक्टर को पत्र, विधायक बोलीं-पद से हटाएंगे

छतरपुर में विधायक प्रतिनिधि के लेटरहेड पर अशोक चिन्ह:पटवारी ट्रांसफर के लिए कलेक्टर को पत्र, विधायक बोलीं-पद से हटाएंगे

छतरपुर के बड़ामलहरा से कांग्रेस विधायक रामसिया भारती के प्रतिनिधि इन्दल सिंह लोधी के लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह ‘अशोक चिन्ह’ और मध्यप्रदेश विधानसभा का लोगो इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इसी लेटरहेड से 10 सितंबर को एक पटवारी के ट्रांसफर के संबंध में कलेक्टर छतरपुर को पत्र भेजा गया था। यह मामला 11 सितंबर को सामने आया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, विधायक प्रतिनिधि के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे लेटरहेड पर अशोक चिन्ह और विधानसभा का लोगो लगाया गया है। उनका कहना है कि विधायक प्रतिनिधि का पद निर्वाचित संवैधानिक पद नहीं है, इसलिए सरकारी अधिकारियों के साथ पत्राचार में इस तरह के प्रतीकों के इस्तेमाल की अनुमति और वैधता की जांच की जानी चाहिए। 10 सितंबर को कलेक्टर को भेजा था पत्र इन्दल सिंह लोधी के लेटरहेड से 10 सितंबर को पटवारी के ट्रांसफर को लेकर कलेक्टर को पत्र भेजा गया था। पत्र सामने आने के बाद उसके लेटरहेड पर इस्तेमाल किए गए अशोक चिन्ह और मध्यप्रदेश विधानसभा के लोगो को लेकर मामला सामने आया। शिकायतकर्ताओं ने इसकी जांच की मांग की है। विधायक बोलीं- जानकारी नहीं थी, प्रतिनिधि को हटाएंगे विधायक रामसिया भारती ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि उन्हें लेटरहेड पर अशोक चिन्ह और विधानसभा का लोगो इस्तेमाल किए जाने की जानकारी नहीं थी। जानकारी मिलने के बाद इन्दल सिंह लोधी को विधायक प्रतिनिधि के पद से हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब वे उनके विधायक प्रतिनिधि नहीं रहेंगे और जल्द कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने भी कार्रवाई की बात कही कांग्रेस जिला अध्यक्ष गगन यादव ने कहा कि यह इन्दल सिंह की गलती है। पार्टी ऐसे लोगों को बढ़ावा नहीं देती। उन्होंने कहा कि मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर इन्दल सिंह का पार्टी में कोई पद है, तो उसे भी हटाने पर निर्णय लिया जा सकता है। जांच के बाद स्पष्ट होगी नियमों की स्थिति शिकायतकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीक के इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियम हैं और निजी या गैर-अधिकृत इस्तेमाल की अनुमति नहीं है। ऐसे में लेटरहेड पर अशोक चिन्ह और विधानसभा के लोगो के इस्तेमाल की जांच जरूरी है। संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन प्रतीकों का इस्तेमाल किस आधार पर किया गया था और इसके लिए कोई अनुमति थी या नहीं।

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