बाढ़ से परेशान किसान-पशुपालकों ने की बैठक:खगड़िया में प्रशासन पर अनदेखी का आरोप, पशु चारा-राहत व्यवस्था की मांग

बाढ़ से परेशान किसान-पशुपालकों ने की बैठक:खगड़िया में प्रशासन पर अनदेखी का आरोप, पशु चारा-राहत व्यवस्था की मांग

खगड़िया में बाढ़ की स्थिति के बीच किसानों और पशुपालकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। खेत-खलिहान और घरों में पानी घुसने से जहां किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती है। वहीं पशुपालकों के सामने मवेशियों को सुरक्षित रखने और उनके लिए चारे का इंतजाम करने की समस्या खड़ी हो गई है। इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को बिहार किसान मंच की ओर से शहर के मंगलम विवाह भवन में जिलेभर के किसानों की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता किसान नेता सूर्य नारायण वर्मा ने की। इसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों, पशुपालकों और उनके पशुओं के सामने उत्पन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। किसान नेताओं ने प्रशासन से तत्काल राहत व्यवस्था मजबूत करने और पशुपालकों के लिए पर्याप्त चारा व सुरक्षित शरणस्थली उपलब्ध कराने की मांग की। खेत-खलिहान डूबे, पशुओं के चारे का संकट बढ़ा बैठक को संबोधित करते हुए बिहार किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह टुडू ने कहा कि बिहार के साथ खगड़िया भी बाढ़ की गंभीर स्थिति से जूझ रहा है। बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक इससे प्रभावित हुए हैं। बाढ़ का पानी खेतों और घरों में प्रवेश करने के कारण पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मवेशियों को सुरक्षित रखने की है। उन्होंने कहा कि पानी बढ़ने के साथ पशुओं के लिए हरा चारा और अन्य खाद्य सामग्री जुटाना मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर सड़क और बांध पर शरण लेने को मजबूर हैं। ‘मवेशियों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर’ धीरेन्द्र सिंह टुडू ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित पशुपालकों के लिए पर्याप्त मात्रा में पशु चारा और समुचित शरणस्थली की व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि कई पशुपालक अपने मवेशियों के साथ सड़क और बांध पर रह रहे हैं। खुले आसमान के नीचे दिन-रात रहने से पशुपालकों और उनके पशुओं को काफी परेशानी हो रही है। बारिश और बाढ़ के बीच मवेशियों को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है। किसान मंच ने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल पशु चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और मवेशियों के लिए सुरक्षित स्थान चिह्नित किए जाएं। चारा ही नहीं, पेयजल की भी व्यवस्था करने की मांग किसान नेताओं ने कहा कि बाढ़ प्रभावित पशुपालकों के लिए केवल शरणस्थली उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। वहां पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और पीने के पानी की व्यवस्था भी जरूरी है। साथ ही बीमार या कमजोर मवेशियों के लिए पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बाढ़ के दौरान किसानों और पशुपालकों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाना चाहिए। जिन इलाकों में बड़ी संख्या में लोग और मवेशी प्रभावित हैं, वहां प्रशासन को राहत व्यवस्था का तत्काल विस्तार करना चाहिए। 27 सितंबर को खगड़िया में होगी किसान महापंचायत बिहार किसान मंच के उपाध्यक्ष अनिल यादव ने बैठक में घोषणा की कि किसानों की समस्याओं को लेकर 27 सितंबर को खगड़िया में किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से किसान नेता शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि महापंचायत में बाढ़ से प्रभावित किसानों और पशुपालकों की समस्याओं के साथ-साथ किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों को भी मजबूती से उठाया जाएगा। इसके लिए जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के किसानों से संपर्क किया जा रहा है। 9 सितंबर को डीएम को सौंपेंगे ज्ञापन बैठक की अध्यक्षता कर रहे किसान नेता सूर्य नारायण वर्मा ने कहा कि किसान मंच किसानों और पशुपालकों की समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने अपनी मांग रखेगा। उन्होंने घोषणा की कि 9 सितंबर को किसान मंच का प्रतिनिधिमंडल जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपेगा। उन्होंने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से बाढ़ प्रभावित किसानों और पशुपालकों के लिए तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी। इसमें पशु चारा, सुरक्षित शरणस्थली, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था प्रमुख रूप से शामिल होगी। किसानों ने कहा- राहत में पशुओं को भी शामिल किया जाए बैठक में मौजूद किसानों ने कहा कि बाढ़ के दौरान परिवार के साथ उनके मवेशी भी प्रभावित होते हैं। कई ग्रामीण परिवारों की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में यदि मवेशियों के लिए चारा और सुरक्षित जगह की व्यवस्था नहीं होती है तो बाढ़ के बाद किसानों के सामने आर्थिक संकट और गहरा सकता है। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि राहत व्यवस्था बनाते समय पशुपालकों और उनके मवेशियों की जरूरतों को भी प्राथमिकता में शामिल किया जाए। बैठक में मुनि लाला सिंह, पंकज यादव, पंकज चौधरी, अशोक कुमार यादव, राजेश निराला, बीरेन्द्र यादव, शशि यादव, नागेश्वर चौरसिया, सौरव कुमार, मुरारी यादव सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। खगड़िया में बाढ़ की स्थिति के बीच किसानों और पशुपालकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। खेत-खलिहान और घरों में पानी घुसने से जहां किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती है। वहीं पशुपालकों के सामने मवेशियों को सुरक्षित रखने और उनके लिए चारे का इंतजाम करने की समस्या खड़ी हो गई है। इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को बिहार किसान मंच की ओर से शहर के मंगलम विवाह भवन में जिलेभर के किसानों की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता किसान नेता सूर्य नारायण वर्मा ने की। इसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों, पशुपालकों और उनके पशुओं के सामने उत्पन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। किसान नेताओं ने प्रशासन से तत्काल राहत व्यवस्था मजबूत करने और पशुपालकों के लिए पर्याप्त चारा व सुरक्षित शरणस्थली उपलब्ध कराने की मांग की। खेत-खलिहान डूबे, पशुओं के चारे का संकट बढ़ा बैठक को संबोधित करते हुए बिहार किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह टुडू ने कहा कि बिहार के साथ खगड़िया भी बाढ़ की गंभीर स्थिति से जूझ रहा है। बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक इससे प्रभावित हुए हैं। बाढ़ का पानी खेतों और घरों में प्रवेश करने के कारण पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मवेशियों को सुरक्षित रखने की है। उन्होंने कहा कि पानी बढ़ने के साथ पशुओं के लिए हरा चारा और अन्य खाद्य सामग्री जुटाना मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर सड़क और बांध पर शरण लेने को मजबूर हैं। ‘मवेशियों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर’ धीरेन्द्र सिंह टुडू ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित पशुपालकों के लिए पर्याप्त मात्रा में पशु चारा और समुचित शरणस्थली की व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि कई पशुपालक अपने मवेशियों के साथ सड़क और बांध पर रह रहे हैं। खुले आसमान के नीचे दिन-रात रहने से पशुपालकों और उनके पशुओं को काफी परेशानी हो रही है। बारिश और बाढ़ के बीच मवेशियों को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है। किसान मंच ने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल पशु चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और मवेशियों के लिए सुरक्षित स्थान चिह्नित किए जाएं। चारा ही नहीं, पेयजल की भी व्यवस्था करने की मांग किसान नेताओं ने कहा कि बाढ़ प्रभावित पशुपालकों के लिए केवल शरणस्थली उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। वहां पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और पीने के पानी की व्यवस्था भी जरूरी है। साथ ही बीमार या कमजोर मवेशियों के लिए पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बाढ़ के दौरान किसानों और पशुपालकों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाना चाहिए। जिन इलाकों में बड़ी संख्या में लोग और मवेशी प्रभावित हैं, वहां प्रशासन को राहत व्यवस्था का तत्काल विस्तार करना चाहिए। 27 सितंबर को खगड़िया में होगी किसान महापंचायत बिहार किसान मंच के उपाध्यक्ष अनिल यादव ने बैठक में घोषणा की कि किसानों की समस्याओं को लेकर 27 सितंबर को खगड़िया में किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से किसान नेता शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि महापंचायत में बाढ़ से प्रभावित किसानों और पशुपालकों की समस्याओं के साथ-साथ किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों को भी मजबूती से उठाया जाएगा। इसके लिए जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के किसानों से संपर्क किया जा रहा है। 9 सितंबर को डीएम को सौंपेंगे ज्ञापन बैठक की अध्यक्षता कर रहे किसान नेता सूर्य नारायण वर्मा ने कहा कि किसान मंच किसानों और पशुपालकों की समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने अपनी मांग रखेगा। उन्होंने घोषणा की कि 9 सितंबर को किसान मंच का प्रतिनिधिमंडल जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपेगा। उन्होंने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से बाढ़ प्रभावित किसानों और पशुपालकों के लिए तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी। इसमें पशु चारा, सुरक्षित शरणस्थली, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था प्रमुख रूप से शामिल होगी। किसानों ने कहा- राहत में पशुओं को भी शामिल किया जाए बैठक में मौजूद किसानों ने कहा कि बाढ़ के दौरान परिवार के साथ उनके मवेशी भी प्रभावित होते हैं। कई ग्रामीण परिवारों की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है। ऐसे में यदि मवेशियों के लिए चारा और सुरक्षित जगह की व्यवस्था नहीं होती है तो बाढ़ के बाद किसानों के सामने आर्थिक संकट और गहरा सकता है। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि राहत व्यवस्था बनाते समय पशुपालकों और उनके मवेशियों की जरूरतों को भी प्राथमिकता में शामिल किया जाए। बैठक में मुनि लाला सिंह, पंकज यादव, पंकज चौधरी, अशोक कुमार यादव, राजेश निराला, बीरेन्द्र यादव, शशि यादव, नागेश्वर चौरसिया, सौरव कुमार, मुरारी यादव सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।  

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