बांस-बल्ले के सहारे कंधे पर शव लेकर घर पहुंचे परिजन:जमुई में ट्रेन से गिरकर भाई-बहन की मौत, लाश ढोने को नहीं मिली एंबुलेंस

बांस-बल्ले के सहारे कंधे पर शव लेकर घर पहुंचे परिजन:जमुई में ट्रेन से गिरकर भाई-बहन की मौत, लाश ढोने को नहीं मिली एंबुलेंस

जमुई में सोमवार को एक दर्दनाक हादसे के बाद सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीन तस्वीर सामने आई। ट्रेन से गिरकर भाई-बहन की मौत हो गई। हादसे के बाद दो मासूम बच्चों के शव घटनास्थल पर पड़े रहे। परिजन मदद के लिए सरकारी व्यवस्था की ओर देखते रहे, लेकिन न एंबुलेंस पहुंची और न शव वाहन उपलब्ध हो सका। आखिरकार परिजन को बांस-बल्ले के सहारे दोनों शवों को कंधे पर उठाकर करीब आधा किलोमीटर दूर गांव तक ले जाना पड़ा। इस घटना का वीडियो सामने आया है। मृतकों की पहचान देवाचक निवासी गणेश रविदास के बेटे विशाल कुमार (9) और बेटी करिश्मा कुमारी (16) के रूप में हुई है। दोनों भाई-बहन ट्रेन से पटना से जमुई लौट रहे थे। परिवार मजदूरी के सिलसिले में पटना गया था। जमुई स्टेशन पहुंचने से पहले देवाचक इलाके के पास दोनों बच्चे ट्रेन के गेट से नीचे गिर गए। हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। कुछ देर पहले तक साथ थे बच्चे, फिर कंधे पर उठाना पड़ा शव घटना के बाद जब परिजन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे तो दोनों बच्चों के शव रेलवे ट्रैक के पास करीब 15 फीट की दूरी पर पड़े थे। मां सीमा देवी की हालत ऐसी थी कि वह सदमे में कुछ बोल भी नहीं पा रही थीं। कुछ देर पहले तक जिन बच्चों को उन्होंने जिंदा देखा था, उन्हीं के शवों को कंधे पर उठाकर ले जाने की मजबूरी ने पूरे गांव को झकझोर दिया। घटनास्थल से गांव की दूरी करीब आधा किलोमीटर बताई गई है। सरकारी वाहन नहीं मिलने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने बांस-बल्ले की मदद से दोनों शवों को एक साथ उठाया और कंधे पर रखकर गांव पहुंचे। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव पहुंचे तो दूसरी परेशानी खड़ी थी गांव पहुंचने के बाद भी परिवार की परेशानी खत्म नहीं हुई। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजना था, लेकिन तत्काल निजी वाहन भी उपलब्ध नहीं हो सका। घर में मातम पसरा था। मां और अन्य परिजन सदमे में बार-बार बेसुध हो रहे थे। वहीं, दोनों बच्चों के शव घंटों गांव में पड़े रहे। परिजनों को उम्मीद थी कि प्रशासन की ओर से शवों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। स्थानीय स्तर पर भी वाहन की तलाश की गई, लेकिन काफी देर तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद एक टोटो की व्यवस्था हुई। इसी टोटो से दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जमुई सदर अस्पताल भेजा गया। पटना से मजदूरी कर लौट रहा था परिवार मृतक के मामी ने बताया कि सीमा देवी अपने दोनों बच्चों के साथ मजदूरी के लिए पटना गई थीं। देवाचक उनका मायका है। मृतक बच्चों के पिता गणेश रविदास बेंगलुरु में मजदूरी करते हैं। परिवार मूल रूप से खैरा थाना क्षेत्र के डुमरकोला का रहने वाला है। ससुराल में बेटा नहीं होने के कारण गणेश रविदास अपने ससुराल में ही रहने लगे थे। परिवार में एक बेटा और एक बेटी थे। दोनों की एक साथ मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना के बाद से गांव में भी मातम का माहौल है। ट्रेन के गेट के पास खड़े थे मां और बच्चे जानकारी के अनुसार, सीमा देवी अपने दोनों बच्चों के साथ पटना से जमुई लौट रही थीं। ट्रेन जमुई स्टेशन पहुंचने वाली थी। इसी दौरान सीमा देवी बच्चों के साथ ट्रेन के गेट के पास खड़ी हो गईं। ट्रेन की गति तेज थी। इसी दौरान दोनों बच्चे अचानक गेट से बाहर गिर गए। हादसा जमुई स्टेशन से पहले देवाचक इलाके के पास पोल संख्या 398/35 और 333/34 के समीप हुआ। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी मलयपुर थाना पुलिस और रेल पुलिस को दी। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा सूचना मिलने के बाद एसआई स्वाति कुमारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल जमुई भेजने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों और परिजनों से पूछताछ भी की। मलयपुर थानाध्यक्ष शेखर सौरभ ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया था। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। थानेदार ने कहा- एंबुलेंस के लिए बीएमओ को कहा था मलयपुर थानाध्यक्ष शेखर सौरभ ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराने हेतु प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी से कहा गया था। इसके बावजूद घटनास्थल पर एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंची, यह समझ से परे है। वहीं, प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने बताया कि एंबुलेंस का इस्तेमाल सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों और गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने में किया जाता है। उन्होंने कहा कि रेल दुर्घटना में मृत लोगों के शवों को ले जाने के लिए शव वाहन की व्यवस्था होती है। हादसे से बड़ा सवाल- मौत के बाद भी परिजनों को सहारा क्यों नहीं? यह घटना सिर्फ एक परिवार के दो बच्चों की मौत की त्रासदी नहीं है, बल्कि हादसे के बाद सरकारी व्यवस्था की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े करती है। जब किसी परिवार के सामने अचानक दो बच्चों की मौत जैसी विपदा आ जाए, उस समय परिजनों से शव ढोने के लिए साधन जुटाने की उम्मीद करना व्यवस्था की गंभीर कमी को सामने लाता है। घटनास्थल से गांव तक बांस-बल्ले के सहारे शव ढोने और फिर घंटों वाहन का इंतजार करने की तस्वीर ने लोगों को झकझोर दिया है। सवाल यह है कि आकस्मिक मौत की स्थिति में शवों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार व्यवस्था आखिर जरूरतमंद परिवार तक समय पर क्यों नहीं पहुंच पाई। इस मामले में जिम्मेदारी तय होने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं आने की व्यवस्था किए जाने की जरूरत है। जमुई में सोमवार को एक दर्दनाक हादसे के बाद सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीन तस्वीर सामने आई। ट्रेन से गिरकर भाई-बहन की मौत हो गई। हादसे के बाद दो मासूम बच्चों के शव घटनास्थल पर पड़े रहे। परिजन मदद के लिए सरकारी व्यवस्था की ओर देखते रहे, लेकिन न एंबुलेंस पहुंची और न शव वाहन उपलब्ध हो सका। आखिरकार परिजन को बांस-बल्ले के सहारे दोनों शवों को कंधे पर उठाकर करीब आधा किलोमीटर दूर गांव तक ले जाना पड़ा। इस घटना का वीडियो सामने आया है। मृतकों की पहचान देवाचक निवासी गणेश रविदास के बेटे विशाल कुमार (9) और बेटी करिश्मा कुमारी (16) के रूप में हुई है। दोनों भाई-बहन ट्रेन से पटना से जमुई लौट रहे थे। परिवार मजदूरी के सिलसिले में पटना गया था। जमुई स्टेशन पहुंचने से पहले देवाचक इलाके के पास दोनों बच्चे ट्रेन के गेट से नीचे गिर गए। हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। कुछ देर पहले तक साथ थे बच्चे, फिर कंधे पर उठाना पड़ा शव घटना के बाद जब परिजन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे तो दोनों बच्चों के शव रेलवे ट्रैक के पास करीब 15 फीट की दूरी पर पड़े थे। मां सीमा देवी की हालत ऐसी थी कि वह सदमे में कुछ बोल भी नहीं पा रही थीं। कुछ देर पहले तक जिन बच्चों को उन्होंने जिंदा देखा था, उन्हीं के शवों को कंधे पर उठाकर ले जाने की मजबूरी ने पूरे गांव को झकझोर दिया। घटनास्थल से गांव की दूरी करीब आधा किलोमीटर बताई गई है। सरकारी वाहन नहीं मिलने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने बांस-बल्ले की मदद से दोनों शवों को एक साथ उठाया और कंधे पर रखकर गांव पहुंचे। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव पहुंचे तो दूसरी परेशानी खड़ी थी गांव पहुंचने के बाद भी परिवार की परेशानी खत्म नहीं हुई। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजना था, लेकिन तत्काल निजी वाहन भी उपलब्ध नहीं हो सका। घर में मातम पसरा था। मां और अन्य परिजन सदमे में बार-बार बेसुध हो रहे थे। वहीं, दोनों बच्चों के शव घंटों गांव में पड़े रहे। परिजनों को उम्मीद थी कि प्रशासन की ओर से शवों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध कराया जाएगा। स्थानीय स्तर पर भी वाहन की तलाश की गई, लेकिन काफी देर तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद एक टोटो की व्यवस्था हुई। इसी टोटो से दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जमुई सदर अस्पताल भेजा गया। पटना से मजदूरी कर लौट रहा था परिवार मृतक के मामी ने बताया कि सीमा देवी अपने दोनों बच्चों के साथ मजदूरी के लिए पटना गई थीं। देवाचक उनका मायका है। मृतक बच्चों के पिता गणेश रविदास बेंगलुरु में मजदूरी करते हैं। परिवार मूल रूप से खैरा थाना क्षेत्र के डुमरकोला का रहने वाला है। ससुराल में बेटा नहीं होने के कारण गणेश रविदास अपने ससुराल में ही रहने लगे थे। परिवार में एक बेटा और एक बेटी थे। दोनों की एक साथ मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना के बाद से गांव में भी मातम का माहौल है। ट्रेन के गेट के पास खड़े थे मां और बच्चे जानकारी के अनुसार, सीमा देवी अपने दोनों बच्चों के साथ पटना से जमुई लौट रही थीं। ट्रेन जमुई स्टेशन पहुंचने वाली थी। इसी दौरान सीमा देवी बच्चों के साथ ट्रेन के गेट के पास खड़ी हो गईं। ट्रेन की गति तेज थी। इसी दौरान दोनों बच्चे अचानक गेट से बाहर गिर गए। हादसा जमुई स्टेशन से पहले देवाचक इलाके के पास पोल संख्या 398/35 और 333/34 के समीप हुआ। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी मलयपुर थाना पुलिस और रेल पुलिस को दी। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा सूचना मिलने के बाद एसआई स्वाति कुमारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल जमुई भेजने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों और परिजनों से पूछताछ भी की। मलयपुर थानाध्यक्ष शेखर सौरभ ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया था। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। थानेदार ने कहा- एंबुलेंस के लिए बीएमओ को कहा था मलयपुर थानाध्यक्ष शेखर सौरभ ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराने हेतु प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी से कहा गया था। इसके बावजूद घटनास्थल पर एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंची, यह समझ से परे है। वहीं, प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने बताया कि एंबुलेंस का इस्तेमाल सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों और गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने में किया जाता है। उन्होंने कहा कि रेल दुर्घटना में मृत लोगों के शवों को ले जाने के लिए शव वाहन की व्यवस्था होती है। हादसे से बड़ा सवाल- मौत के बाद भी परिजनों को सहारा क्यों नहीं? यह घटना सिर्फ एक परिवार के दो बच्चों की मौत की त्रासदी नहीं है, बल्कि हादसे के बाद सरकारी व्यवस्था की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े करती है। जब किसी परिवार के सामने अचानक दो बच्चों की मौत जैसी विपदा आ जाए, उस समय परिजनों से शव ढोने के लिए साधन जुटाने की उम्मीद करना व्यवस्था की गंभीर कमी को सामने लाता है। घटनास्थल से गांव तक बांस-बल्ले के सहारे शव ढोने और फिर घंटों वाहन का इंतजार करने की तस्वीर ने लोगों को झकझोर दिया है। सवाल यह है कि आकस्मिक मौत की स्थिति में शवों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार व्यवस्था आखिर जरूरतमंद परिवार तक समय पर क्यों नहीं पहुंच पाई। इस मामले में जिम्मेदारी तय होने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं आने की व्यवस्था किए जाने की जरूरत है।  

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