बांका में पुल नहीं होने से बच्चों को परेशानी:शिक्षक की मदद से डांड़ पार कर स्कूल पहुंच रहे मासूम, बरसात में पैरेंट्स की बढ़ जाती है चिंता

बांका में पुल नहीं होने से बच्चों को परेशानी:शिक्षक की मदद से डांड़ पार कर स्कूल पहुंच रहे मासूम, बरसात में पैरेंट्स की बढ़ जाती है चिंता

बांका के रजौन प्रखंड में बच्चों को स्कूल जाने के लिए हर दिन अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। यहां हरचंडी अमहारा पंचायत के एनपीएस अमहारा एससी टोला के सामने सड़क और पुलिया नहीं है। इस कारण स्कूली बच्चों को गहरा डांड़ पार करके स्कूल पहुंचना पड़ता है।

यह डांड़ स्कूल के ठीक पूरब में है। इसकी चौड़ाई करीब 7 से 10 फीट और गहराई 6 से 9 फीट तक है। बारिश के दिनों में डांड़ में पानी भर जाता है, जिससे इसे पार करना बच्चों के लिए बहुत खतरनाक हो जाता है। बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी परेशानी होती है। बच्चे शिक्षक के सहारे पहुंच पाते है स्कूल स्कूल के शिक्षक सुबोध कुमार छोटे बच्चों को गोद में उठाकर या हाथ पकड़कर डांड़ पार कराते हैं। कई बच्चे शिक्षक के सहारे ही स्कूल पहुंच पाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर साल बरसात में आती है। इसके बावजूद अब तक यहां कोई स्थायी रास्ता या पुलिया नहीं बनाई गई है।

बच्चों की परेशानी को देखते हुए स्कूल ने करीब 7 से 8 फीट चौड़ा मिट्टी का एक अस्थायी रास्ता बनाया है। लेकिन लगातार बारिश से यह रास्ता फिसलन भरा हो जाता है। पानी बढ़ने पर रास्ते की हालत और खराब हो जाती है। ऐसे में बच्चों के फिसलकर डांड़ में गिरने का खतरा बना रहता है। बरसात में पैरेंट्स की बढ़ जाती है चिंता बरसात में डांड़ में पानी का बहाव बढ़ने से अभिभावकों की चिंता भी बढ़ जाती है। कई माता-पिता खतरे के कारण बच्चों को स्कूल भेजने से बचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा के अधिकार की बात करने वाले विभाग के सामने बच्चों की सुरक्षा का सवाल है। स्कूल तक सुरक्षित रास्ता न होने से विद्यार्थी और शिक्षक दोनों परेशान हैं। स्थानीय ग्रामीण मन्नू हरिजन, वार्ड सदस्य अरविंद दास, भूदेव मंडल, उदय हरिजन और जीपलाल मंडल ने बताया कि वर्षों से डांड़ पर पुलिया और सड़क निर्माण की मांग की जा रही है। प्रत्येक वर्ष बारिश के मौसम में यही स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक पहल नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल स्थल का निरीक्षण कर पुलिया एवं सड़क निर्माण कराने की मांग की है। विभाग को समस्या का करना चाहिए स्थायी समाधान ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित विद्यालय पहुंचाने के लिए सबसे पहले यहां आवागमन की सुविधा बहाल करना जरूरी है। उनका कहना है कि किसी अनहोनी के बाद कार्रवाई करने के बजाय विभाग को पहले ही इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक शिक्षक रणवीर प्रसाद सिंह ने बताया कि विद्यालय उक्त समस्या के कारण बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी विद्यालय आने-जाने में परेशानी हो रही है।वहीं, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी चक्रपाणि कनिष्क ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी। बांका के रजौन प्रखंड में बच्चों को स्कूल जाने के लिए हर दिन अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। यहां हरचंडी अमहारा पंचायत के एनपीएस अमहारा एससी टोला के सामने सड़क और पुलिया नहीं है। इस कारण स्कूली बच्चों को गहरा डांड़ पार करके स्कूल पहुंचना पड़ता है।

यह डांड़ स्कूल के ठीक पूरब में है। इसकी चौड़ाई करीब 7 से 10 फीट और गहराई 6 से 9 फीट तक है। बारिश के दिनों में डांड़ में पानी भर जाता है, जिससे इसे पार करना बच्चों के लिए बहुत खतरनाक हो जाता है। बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी परेशानी होती है। बच्चे शिक्षक के सहारे पहुंच पाते है स्कूल स्कूल के शिक्षक सुबोध कुमार छोटे बच्चों को गोद में उठाकर या हाथ पकड़कर डांड़ पार कराते हैं। कई बच्चे शिक्षक के सहारे ही स्कूल पहुंच पाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर साल बरसात में आती है। इसके बावजूद अब तक यहां कोई स्थायी रास्ता या पुलिया नहीं बनाई गई है।

बच्चों की परेशानी को देखते हुए स्कूल ने करीब 7 से 8 फीट चौड़ा मिट्टी का एक अस्थायी रास्ता बनाया है। लेकिन लगातार बारिश से यह रास्ता फिसलन भरा हो जाता है। पानी बढ़ने पर रास्ते की हालत और खराब हो जाती है। ऐसे में बच्चों के फिसलकर डांड़ में गिरने का खतरा बना रहता है। बरसात में पैरेंट्स की बढ़ जाती है चिंता बरसात में डांड़ में पानी का बहाव बढ़ने से अभिभावकों की चिंता भी बढ़ जाती है। कई माता-पिता खतरे के कारण बच्चों को स्कूल भेजने से बचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा के अधिकार की बात करने वाले विभाग के सामने बच्चों की सुरक्षा का सवाल है। स्कूल तक सुरक्षित रास्ता न होने से विद्यार्थी और शिक्षक दोनों परेशान हैं। स्थानीय ग्रामीण मन्नू हरिजन, वार्ड सदस्य अरविंद दास, भूदेव मंडल, उदय हरिजन और जीपलाल मंडल ने बताया कि वर्षों से डांड़ पर पुलिया और सड़क निर्माण की मांग की जा रही है। प्रत्येक वर्ष बारिश के मौसम में यही स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक पहल नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल स्थल का निरीक्षण कर पुलिया एवं सड़क निर्माण कराने की मांग की है। विभाग को समस्या का करना चाहिए स्थायी समाधान ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित विद्यालय पहुंचाने के लिए सबसे पहले यहां आवागमन की सुविधा बहाल करना जरूरी है। उनका कहना है कि किसी अनहोनी के बाद कार्रवाई करने के बजाय विभाग को पहले ही इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक शिक्षक रणवीर प्रसाद सिंह ने बताया कि विद्यालय उक्त समस्या के कारण बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी विद्यालय आने-जाने में परेशानी हो रही है।वहीं, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी चक्रपाणि कनिष्क ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी।  

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