बठिंडा में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) का फर्जी डीजीएम बनकर टोल प्लाजा का ठेका दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोपी राकेश गोयल की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। 2.40 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में तीन दिन पहले जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब 7 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के दूसरे मामले में भी अदालत ने उसे राहत देने से इनकार कर दिया है।
सत्र न्यायाधीश गगनदीप सिंह गर्ग की अदालत ने दूसरे मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। आरोपी के खिलाफ थाना थर्मल में दोनों मामले अलग-अलग दर्ज हैं। फिलहाल दोनों मामलों में उसे जमानत नहीं मिली है और वह न्यायिक हिरासत में है। बचाव पक्ष बोला- चालान पेश, अब हिरासत में रखने का आधार नहीं
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और वह 25 जुलाई से न्यायिक हिरासत में है। बचाव पक्ष के अनुसार, पुलिस मामले में चालान भी पेश कर चुकी है, इसलिए आरोपी को अब और हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है। इसी आधार पर जमानत देने की मांग की गई।
वहीं, सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए धोखाधड़ी की रकम और आरोपों की गंभीरता का हवाला दिया। सरकारी पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी के खिलाफ इसी तरह की धोखाधड़ी का एक अन्य मामला भी दर्ज है।
अदालत बोली- रिहाई से गवाहों पर पड़ सकता है दबाव
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत के समक्ष यह आशंका भी रखी गई कि रिहाई होने पर आरोपी मामले के मुख्य गवाहों को प्रभावित कर सकता है या उन्हें डरा-धमका सकता है। इससे मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होने की संभावना जताई गई।
अदालत ने इन परिस्थितियों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के साथ ही 7 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी के मामले में भी आरोपी को राहत नहीं मिली। अब दोनों मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मुकदमे की सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में सुनवाई के बाद ही होगी। दो मामलों में करोड़ों की ठगी के आरोप
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, राकेश गोयल के खिलाफ थाना थर्मल में धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मामले दर्ज हैं। पहले मामले में शिकायतकर्ता राम स्वरूप सिंगला ने आरोप लगाया था कि राकेश ने खुद को NHAI का अधिकारी बताकर टोल प्लाजा का लाइसेंस दिलाने का भरोसा दिया। इस बहाने उससे करीब 2.40 करोड़ रुपये की रकम हासिल की गई। इस मामले में आरोपी ने जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन तीन दिन पहले उसकी याचिका खारिज हो गई थी। इसके बाद दूसरे मामले में भी जमानत नहीं मिलने से आरोपी को फिलहाल दोनों मामलों में राहत नहीं मिल सकी है।
फर्जी आईडी और लेटरहेड से बनाया सरकारी अधिकारी होने का भरोसा
दूसरा मामला थाना थर्मल में दर्ज FIR नंबर 96 से संबंधित है। इसमें वीडियोग्राफर मनीष गुप्ता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। शिकायत के अनुसार, राकेश गोयल ने खुद को NHAI के लेखा विभाग का उप महाप्रबंधक (DGM) बताया था। आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता के सामने अपनी पहचान पुख्ता करने के लिए फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लेटरहेड और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इसके बाद टोल प्लाजा का ठेका दिलाने और वाहनों पर बिना रिचार्ज फास्टैग लगवाने का झांसा दिया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने इस काम के लिए अलग-अलग किस्तों में अपने बैंक खातों में कुल 7 करोड़ 4 लाख 21 हजार 962 रुपये जमा करवाए। इसके अलावा एक रिश्तेदार के बैंक खाते में भी 25 लाख रुपये जमा करवाए गए। इस तरह दूसरे मामले में भी कथित धोखाधड़ी की रकम करोड़ों रुपये तक पहुंच गई।

