बचपन से ही बोल और सुन नहीं सकती ‘गोल्डन गर्ल’:गोरखपुर की आदित्या ने ब्राजील से मलेशिया तक जमाया धाक, PM दे चुके हैं शाबाशी

बचपन से ही बोल और सुन नहीं सकती ‘गोल्डन गर्ल’:गोरखपुर की आदित्या ने ब्राजील से मलेशिया तक जमाया धाक, PM दे चुके हैं शाबाशी

गोरखपुर की रहने वाली ‘गोल्डन गर्ल’ और बैटमिंटन खिलाड़ी आदित्या यादव ने मलेशिया के पेनांग में हुई एशिया पैसिफिक डेफ बैडमिंटन चैंपियनशिप-2026 में भारत को गोल्ड मेडल दिलाकर फिर से देश का नाम रोशन किया है। फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने जापान को 3-2 से हराकर यह जीत हासिल की, जिसमें आदित्या का खेल सबसे खास रहा। 17 साल की आदित्या यादव बचपन से ही बोल और सुन नहीं सकती हैं। लेकिन आदित्या ने कभी अपनी कमजोरी को आगे नहीं आने दिया। अपने खेल के माध्यम से उन्होंने न सिर्फ माता- पिता बल्कि देश का नाम भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रौशन किया है। पांच साल की उम्र से पिता ने उनको ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया था। उन्होंने 2022 में ब्राजील डेफ ओलंपिक में महज 12 साल की उम्र में भारत को गोल्ड दिलाया। इसके बाद 2023 के वर्ल्ड यूथ डेफ चैंपियनशिप में 5 मेडल जीते और अंडर-17 नेशनल में 3 बार चैंपियन रहीं। आदित्या के जज्बे के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री मोदी और CM योगी सहित कई बड़े नेताओं ने मिलकर शाबाशी दी है। जब पता चला तो टूटा परिवार
आदित्या जब महज दो साल की थीं, तब उनके माता-पिता को पहली बार पता चला कि उनकी मासूम बच्ची न तो सुन सकती है और न ही बोल सकती है। यह बात सामने आते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। हर कोई बेटी के भविष्य को लेकर परेशान था। कई डॉक्टरों के चक्कर काटे, दर-दर भटके, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। चारों तरफ सिर्फ मायूसी और चिंता थी। आंसुओं को ताकत बनाया, पिता ने दिखाया रास्ता
रेलवे में कार्यरत आदित्या के पिता दिग्विजय यादव खुद एक बैडमिंटन खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने किस्मत के आगे घुटने टेकने के बजाय अपनी बेटी को उसकी कमजोरी से लड़ना सिखाया। जब आदित्या सिर्फ 5 साल की थीं, तब पिता ने रोना छोड़कर बेटी के हाथों में बैडमिंटन रैकेट थमा दिया। इशारों की भाषा से समझा खेल
पिता रोज सुबह उठकर आदित्या को कोर्ट ले जाते और लगातार 8-8 घंटे तक कड़ी प्रैक्टिस कराते। न थकने दिया, न रुकने दिया और कभी बेटी को अहसास नहीं होने दिया कि उसमें कोई कमी है। बिना किसी आवाज को सुने सिर्फ इशारों और नजरों के भरोसे खेल की बारीकियों को समझना आसान नहीं था। लेकिन आदित्या की लगन और पिता के कड़े अनुशासन ने कमाल कर दिखाया। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी दे चुके हैं शाबासी
आदित्या को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार और गोरखपुर रत्न जैसे कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस जाबांज खिलाड़ी की तारीफ कर चुके हैं। आदित्या के नाम दर्ज हैं ये बड़ी उपलब्धियां अब सिक्किम और भुवनेश्वर में दिखाएंगी दम
आदित्या फिलहाल मलेशिया में चल रहे एशिया चैंपियनशिप में हिस्सा ली है। इसके बाद 14 से 21 अक्टूबर तक गंगतोक सिक्किम में आयोजित होने वाले जूनियर नेशनल और 17 से 21 नवंबर तक भुवनेश्वर में आयोजित होने वाले सीनियर नेशनल में हिस्सा लेंगी।

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