बक्सर जिले में गंगा नदी का जलस्तर अब लगातार घट रहा है। बुधवार, 9 सितंबर को सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 59.87 मीटर रिकॉर्ड किया गया। पिछले एक घंटे से नदी का पानी करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कम हो रहा है। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को राहत की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, जलस्तर अभी भी चेतावनी स्तर से ऊपर है। गंगा का चेतावनी स्तर 59.32 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 60.32 मीटर है। मौजूदा जलस्तर चेतावनी स्तर से 55 सेंटीमीटर ऊपर और खतरे के निशान से 45 सेंटीमीटर नीचे है। मंगलवार को गंगा का जलस्तर 60.02 मीटर दर्ज किया गया था। इसके बाद से नदी का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी रखे हुए है। बक्सर, चौसा, ब्रह्मपुर, चक्की और सिमरी अंचल की 12 पंचायतों के 25 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इन इलाकों में करीब 9,989 लोग प्रभावित हुए हैं। बुधवार को चलाई जा रही कुल 27 नावें प्रभावित इलाकों में लोगों के सुरक्षित आने-जाने के लिए बुधवार को कुल 27 नावें चलाई जा रही हैं। अब तक कुल 36 नावें चलाई जा चुकी हैं। जलस्तर में कमी के बावजूद प्रशासन ने नावों के संचालन और निगरानी में कोई ढिलाई नहीं बरती है। बाढ़ प्रभावित परिवारों को बारिश और पानी से बचाव के लिए पॉलीथीन शीट बांटी जा रही हैं। अब तक कुल 4,980 पॉलीथीन शीट बांटी जा चुकी हैं। वहीं, मवेशियों के लिए अब तक 65.75 क्विंटल पशुचारा बांटा गया है। सिमरी अंचल सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां करीब 5,700 की आबादी पर असर पड़ा है और 12 नावें चलाई जा रही हैं। यहां अब तक 2,832 पॉलीथीन शीट और 31.55 क्विंटल पशुचारा बांटा गया है। वहीं ब्रह्मपुर में 2,889 लोग प्रभावित हैं। यहां सात नावें चलाई जा रही हैं। साथ ही 1,100 पॉलीथीन शीट और 34.20 क्विंटल पशुचारा बांटा गया है। स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा पर भी नजर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों और पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर भी प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। प्रभावित इलाकों में चिकित्सा शिविर और पशु चिकित्सा शिविर लगाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि लोगों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा मिल सके और मवेशियों का भी इलाज एवं देखभाल हो सके। जलस्तर घटने से फिलहाल राहत के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन गंगा अभी खतरे के निशान के काफी करीब है। ऐसे में प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर में होने वाले बदलाव के अनुसार राहत और बचाव कार्य आगे भी जारी रखा जाएगा। बक्सर जिले में गंगा नदी का जलस्तर अब लगातार घट रहा है। बुधवार, 9 सितंबर को सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 59.87 मीटर रिकॉर्ड किया गया। पिछले एक घंटे से नदी का पानी करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कम हो रहा है। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों को राहत की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, जलस्तर अभी भी चेतावनी स्तर से ऊपर है। गंगा का चेतावनी स्तर 59.32 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 60.32 मीटर है। मौजूदा जलस्तर चेतावनी स्तर से 55 सेंटीमीटर ऊपर और खतरे के निशान से 45 सेंटीमीटर नीचे है। मंगलवार को गंगा का जलस्तर 60.02 मीटर दर्ज किया गया था। इसके बाद से नदी का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी रखे हुए है। बक्सर, चौसा, ब्रह्मपुर, चक्की और सिमरी अंचल की 12 पंचायतों के 25 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इन इलाकों में करीब 9,989 लोग प्रभावित हुए हैं। बुधवार को चलाई जा रही कुल 27 नावें प्रभावित इलाकों में लोगों के सुरक्षित आने-जाने के लिए बुधवार को कुल 27 नावें चलाई जा रही हैं। अब तक कुल 36 नावें चलाई जा चुकी हैं। जलस्तर में कमी के बावजूद प्रशासन ने नावों के संचालन और निगरानी में कोई ढिलाई नहीं बरती है। बाढ़ प्रभावित परिवारों को बारिश और पानी से बचाव के लिए पॉलीथीन शीट बांटी जा रही हैं। अब तक कुल 4,980 पॉलीथीन शीट बांटी जा चुकी हैं। वहीं, मवेशियों के लिए अब तक 65.75 क्विंटल पशुचारा बांटा गया है। सिमरी अंचल सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां करीब 5,700 की आबादी पर असर पड़ा है और 12 नावें चलाई जा रही हैं। यहां अब तक 2,832 पॉलीथीन शीट और 31.55 क्विंटल पशुचारा बांटा गया है। वहीं ब्रह्मपुर में 2,889 लोग प्रभावित हैं। यहां सात नावें चलाई जा रही हैं। साथ ही 1,100 पॉलीथीन शीट और 34.20 क्विंटल पशुचारा बांटा गया है। स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा पर भी नजर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों और पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर भी प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। प्रभावित इलाकों में चिकित्सा शिविर और पशु चिकित्सा शिविर लगाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि लोगों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा मिल सके और मवेशियों का भी इलाज एवं देखभाल हो सके। जलस्तर घटने से फिलहाल राहत के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन गंगा अभी खतरे के निशान के काफी करीब है। ऐसे में प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर में होने वाले बदलाव के अनुसार राहत और बचाव कार्य आगे भी जारी रखा जाएगा।

