फ्लाईदुबई कॉकपिट अटैक: हमले के पीछे इजराइल का हाथ होने की थ्योरी पर क्यों उठे सवाल? ध्रुव राठी का VIDEO चर्चा में

फ्लाईदुबई कॉकपिट अटैक: हमले के पीछे इजराइल का हाथ होने की थ्योरी पर क्यों उठे सवाल? ध्रुव राठी का VIDEO चर्चा में

Dhruv Rathee Viral Video: फ्लाईदुबई की इजराइल जा रही फ्लाइट FZ1073 में हुए कॉकपिट अटैक के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे सामने आ रहे हैं। इसी बीच ध्रुव राठी के वीडियो में इस घटना को लेकर उठाए गए सवाल और ‘फॉल्स फ्लैग’ की संभावना चर्चा में है। हालांकि, इजराइल ने खुद यह घटना करवाई थी, इस दावे को साबित करने वाला कोई विश्वसनीय सार्वजनिक सबूत सामने नहीं आया है।

कॉकपिट में आखिर कैसे पहुंचा हथियार?

30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में को-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया था। विमान में 170 से ज्यादा लोग सवार थे और घटना के बाद विमान को सऊदी अरब के तबूक डायवर्ट किया गया।

शुरुआती रिपोर्टों में हमले के लिए चाकू जैसी चीज के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, लेकिन 3 अक्टूबर को यूएई के अभियोजन पक्ष ने बताया कि को-पायलट ने कॉकपिट में मौजूद क्रैश एक्स से कैप्टन पर हमला किया और विमान पर नियंत्रण करने की कोशिश की। यूएई ने इसे ‘आतंकवादी हमला’ करने की कोशिश बताया है। यहीं से सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि कॉकपिट में मौजूद इस आपातकालीन उपकरण का इस्तेमाल हमले के लिए कैसे हुआ और घटना से पहले सुरक्षा व्यवस्था में क्या खामियां थीं। हालांकि, इन सवालों का अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

ध्रुव राठी के वीडियो में क्या दावा किया गया?

ध्रुव राठी ने फ्लाईदुबई कॉकपिट अटैक पर चर्चा करते हुए उन दावों का जिक्र किया, जिनमें घटना को कथित ‘फॉल्स फ्लैग’ ऑपरेशन बताया जा रहा है। वीडियो में यह संभावना भी चर्चा में आती है कि क्या इजराइल में होने वाले चुनाव से पहले सुरक्षा के मुद्दे को उभारने के लिए इस घटना को अंजाम दिया गया हो सकता है।

हालांकि, यह एक आरोप या थ्योरी है, स्थापित तथ्य नहीं। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में ऐसा कोई विश्वसनीय सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि इजराइल ने इस हमले की साजिश रची या उसे अंजाम दिया था। सोशल मीडिया पर इस तरह के दावे घटना के तुरंत बाद फैलने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है।

27 अक्टूबर को होने हैं इजराइल में चुनाव

इस घटना का राजनीतिक असर भी चर्चा में है। इजराइल में 27 अक्टूबर 2026 को चुनाव होने हैं और घटना से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संभावित सुरक्षा खतरों को लेकर चेतावनी दी थी। घटना के बाद उनके राजनीतिक विरोधियों ने उन पर सुरक्षा मुद्दे को राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, लेकिन चुनाव का समय और नेतन्याहू के पहले दिए गए बयान अपने आप में इस बात का सबूत नहीं हैं कि फ्लाइट अटैक पहले से योजनाबद्ध था।

जांच में अभी कई सवालों के जवाब बाकी

यूएई के मुताबिक, जांच का फोकस घटना की पूरी परिस्थितियों, को-पायलट के मकसद, संभावित कनेक्शन और डिजिटल व भौतिक सबूतों पर है। जांच पूरी होने के बाद ही हमले के पीछे की वास्तविक वजह और किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की भूमिका को लेकर स्थिति साफ होगी। ऐसे में फ्लाईदुबई घटना से जुड़े सुरक्षा संबंधी सवाल उठाना अलग बात है, लेकिन बिना ठोस सबूत के इसे इजराइल की साजिश या ‘फॉल्स फ्लैग’ ऑपरेशन के तौर पर पेश करना फिलहाल एक अप्रमाणित दावा ही है।

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