सोशल मीडिया पर किसी महिला या किशोरी की बिना सहमति तस्वीर पोस्ट करना या फर्जी आईडी बनाकर उनकी न्यूड या सेमी-न्यूड मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) फोटो वायरल करना अब भारी पड़ेगा। नालंदा के साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इंटरनेट मीडिया पर किसी की निजता का हनन करना कोई मजाक नहीं, बल्कि गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। नालंदा साइबर थाने में ऐसे मामलों को लेकर लगातार प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। BNS-IT एक्ट के तहत होगी प्राथमिकी डीएसपी ने बताया कि प्रेम संबंधों में अलगाव के बाद अक्सर युवक अपनी पूर्व महिला मित्र की निजी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंध टूटने के बाद सहमति के बिना तस्वीरें सार्वजनिक करना सीधे तौर पर महिला की लज्जा भंग करने का अपराध है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। नाबालिगों से जुड़े मामलों में लगेगा कड़ा पॉक्सो कानून नाबालिग जोड़ों से जुड़े मामलों पर साइबर डीएसपी ने कहा कि यदि पीड़िता नाबालिग है, तो पुलिस बारीक जांच करती है। ऐसे मामलों में आईटी एक्ट और बीएनएस के साथ-साथ आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के गैर-जमानती प्रावधान भी लागू किए जाते हैं, जिसमें लंबी सजा का प्रावधान है। सोशल मीडिया प्रोफाइल को ‘प्राइवेट’ रखने की अपील साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और युवतियों से डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स को हमेशा ‘प्राइवेट’ मोड में रखना चाहिए। अकाउंट को केवल उन्हीं लोगों तक सीमित रखें जो आपकी मित्र सूची में शामिल हैं। अनजान व्यक्तियों की फ्रेंड या फॉलो रिक्वेस्ट कभी स्वीकार न करें, जिससे कि कोई भी बाहरी व्यक्ति निजी तस्वीरों या वीडियो का दुरुपयोग न कर सके। उन्होंने किसी भी प्रकार के साइबर उत्पीड़न पर तुरंत पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर किसी महिला या किशोरी की बिना सहमति तस्वीर पोस्ट करना या फर्जी आईडी बनाकर उनकी न्यूड या सेमी-न्यूड मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) फोटो वायरल करना अब भारी पड़ेगा। नालंदा के साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इंटरनेट मीडिया पर किसी की निजता का हनन करना कोई मजाक नहीं, बल्कि गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। नालंदा साइबर थाने में ऐसे मामलों को लेकर लगातार प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। BNS-IT एक्ट के तहत होगी प्राथमिकी डीएसपी ने बताया कि प्रेम संबंधों में अलगाव के बाद अक्सर युवक अपनी पूर्व महिला मित्र की निजी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंध टूटने के बाद सहमति के बिना तस्वीरें सार्वजनिक करना सीधे तौर पर महिला की लज्जा भंग करने का अपराध है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। नाबालिगों से जुड़े मामलों में लगेगा कड़ा पॉक्सो कानून नाबालिग जोड़ों से जुड़े मामलों पर साइबर डीएसपी ने कहा कि यदि पीड़िता नाबालिग है, तो पुलिस बारीक जांच करती है। ऐसे मामलों में आईटी एक्ट और बीएनएस के साथ-साथ आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के गैर-जमानती प्रावधान भी लागू किए जाते हैं, जिसमें लंबी सजा का प्रावधान है। सोशल मीडिया प्रोफाइल को ‘प्राइवेट’ रखने की अपील साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और युवतियों से डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स को हमेशा ‘प्राइवेट’ मोड में रखना चाहिए। अकाउंट को केवल उन्हीं लोगों तक सीमित रखें जो आपकी मित्र सूची में शामिल हैं। अनजान व्यक्तियों की फ्रेंड या फॉलो रिक्वेस्ट कभी स्वीकार न करें, जिससे कि कोई भी बाहरी व्यक्ति निजी तस्वीरों या वीडियो का दुरुपयोग न कर सके। उन्होंने किसी भी प्रकार के साइबर उत्पीड़न पर तुरंत पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी।

