रायबरेली के फीरोज गांधी कॉलेज में बुधवार को ‘दहेज मुक्त समाज: संकल्प, संवाद और समाधान’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी हुई। इसमें दहेज प्रथा के सामाजिक, शैक्षिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में दहेज के खिलाफ जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था। संगोष्ठी की संयोजक डॉ. शामिनी श्रीवास्तव ने अतिथियों, वक्ताओं और छात्र-छात्राओं का स्वागत किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के State of U.P. v. Ajmal Beg Others मामले का उल्लेख करते हुए शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और लैंगिक समानता को दहेज प्रथा खत्म करने के लिए जरूरी बताया। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मनोज कुमार त्रिपाठी ने विद्यार्थियों से दहेज के खिलाफ जागरूक रहने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान देने के साथ सामाजिक चेतना और जिम्मेदारी विकसित करना भी है। शिक्षक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद सिंह ने कहा कि दहेज प्रथा का उन्मूलन केवल कानून और न्यायिक कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, अधिकारियों का संवेदनशील प्रशिक्षण और व्यापक जनजागरूकता जरूरी है। समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. यू.बी. सिंह ने दहेज प्रथा को सामाजिक मान्यताओं, पारिवारिक अपेक्षाओं और रूढ़ परंपराओं से जुड़ी समस्या बताया। उन्होंने दहेज मुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास और सामाजिक सोच में बदलाव पर जोर दिया।

