आपने दोपहर के खाने में दो रोटी खाई थी। शाम होने को आई, लेकिन अभी तक पेट भरा हुआ है। भूख लगने का नाम ही नहीं ले रही। पेट भी फूला-फूला लग रहा है। कई बार खाने के कुछ घंटे बाद भी ऐसा लगता है, जैसे पेट ने खाना पचाने का प्रोसेस शुरू ही नहीं किया। आपको लग सकता है कि शायद ये गैस या अपच की समस्या है। लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार हो, भूख कम लगे, खाने का मन कम हो और वजन भी घटने लगे, तो सवाल उठता है कि आखिर पेट के भीतर चल क्या रहा है? यह स्थिति ‘गैस्ट्रोपेरेसिस’ हो सकती है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में गैस्ट्रोपेरेसिस के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. दत्तात्रेय सोलंके, कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई सवाल- गैस्ट्रोपेरेसिस क्या होता है? एकदम आसान भाषा में समझाइए। जवाब- गैस्ट्रोपेरेसिस में पेट खाना पचाने के लिए उसे आगे छोटी आंत तक भेजने में सामान्य से ज्यादा समय लगाता है। इसे एक आसान उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। मान लीजिए- आसान शब्दों में इसे ‘पेट के धीरे खाली होने की समस्या’ कह सकते हैं। सवाल- गैस्ट्रोपेरेसिस क्यों होता है? जवाब- इसके कई कारण हो सकते हैं- 1. डायबिटीज 2. पेट की सर्जरी 3. दूसरी बीमारियां 4. कुछ दवाएं पेन किलर और कुछ दूसरी दवाएं पेट के खाली होने की गति धीमी कर सकती हैं। 5. कई बार कारण पता नहीं चलता गैस्ट्रोपेरेसिस के सभी कारण ग्राफिक में देखिए- सवाल- गैस्ट्रोपेरेसिस होने पर कौन-से लक्षण दिखाई देते हैं? जवाब- गैस्ट्रोपेरेसिस होने पर पेट से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं। इसके सभी प्रमुख लक्षण ग्राफिक में देखिए- ध्यान दें: इन लक्षणों की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है। सवाल- डॉक्टर गैस्ट्रोपेरेसिस का पता कैसे लगाते हैं, इसके लिए कौन-से टेस्ट कराते हैं? जवाब- गैस्ट्रोपेरेसिस का पता लगाने के लिए डॉक्टर पहले मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं। वे यह जानने की कोशिश करते हैं कि खाना खाने के बाद पेट कितनी देर तक भरा रहता है, उल्टी होती है या नहीं और वजन तो नहीं घट रहा। इसके बाद जरूरत के अनुसार कुछ टेस्ट कराए जाते हैं। 1. गैस्ट्रिक एम्प्टिंग टेस्ट 2. एंडोस्कोपी 3. ब्लड टेस्ट 4. ब्रीथ टेस्ट सवाल- गैस्ट्रोपेरेसिस का इलाज क्या है? जवाब- इसका इलाज इसके कारण और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। इलाज का मुख्य उद्देश्य पेट से खाना आगे बढ़ने में मदद करना, लक्षणों को कम करना और शरीर में पोषण की कमी नहीं होने देना है। खाने की आदतों में बदलाव: एक बार में ज्यादा खाने की बजाय दिन में 5–6 बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना खाएं। भोजन अच्छी तरह चबाएं। आसानी से पचने वाला खाना: डॉक्टर की सलाह से नरम, अच्छी तरह पका हुआ और कम फैट वाला भोजन लें। कुछ लोगों को कम फाइबर वाला भोजन भी लेने की सलाह दी जाती है। दवाएं: डॉक्टर पेट से खाना आगे बढ़ाने में मदद करने वाली या मतली और उल्टी कम करने वाली दवाएं दे सकते हैं। ब्लड शुगर कंट्रोल रखना: डायबिटीज के मरीजों के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा शुगर पेट की गति को धीमा कर सकती है। पोषण की कमी दूर करना: अगर मरीज पर्याप्त खाना नहीं खा पा रहा है या वजन घट रहा है, तो डॉक्टर डाइट में बदलाव और पोषण संबंधी मदद की सलाह दे सकते हैं। गंभीर मामलों में इलाज: अगर दवाओं और खानपान में बदलाव से फायदा न हो, तो डॉक्टर एंडोस्कोपी या सर्जरी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर विचार कर सकते हैं। ध्यान दें: गैस्ट्रोपेरेसिस का कोई एक इलाज सभी मरीजों के लिए सही नहीं होता। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं शुरू या बंद न करें। सवाल- अगर गैस्ट्रोपेरेसिस का समय पर इलाज न हो तो क्या कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं? जवाब- इससे पाचन और शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलने में परेशानी हो सकती है। इसके सभी संभावित कॉम्प्लिकेशंस पॉइंटर्स से समझिए- पोषक तत्वों की कमी: खाना कम खा पाने या पोषक तत्वों का पर्याप्त सेवन न होने से शरीर में विटामिन और मिनरल्स की कमी हो सकती है। डिहाइड्रेशन: बार-बार उल्टी होने से शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। वजन घटना और कमजोरी: पर्याप्त भोजन न मिल पाने से वजन घट सकता है और शरीर में कमजोरी आ सकती है। ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव: डायबिटीज के मरीजों में खाना देर से पचने के कारण ब्लड शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। बेजोआर बनना (Bezoar): पेट में बिना पचा खाना जमा होकर ठोस गांठ बना सकता है। इससे पेट से खाना आगे जाने में रुकावट हो सकती है। सवाल- गैस्ट्रोपेरेसिस से बचने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए? जवाब- संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और ब्लड शुगर कंट्रोल रखने से पाचन संबंधी समस्याओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। इसे ग्राफिक में देखिए- कुल मिलाकर गैस्ट्रोपेरेसिस के लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज न करें। समय रहते डॉक्टर से सलाह लें। सही खानपान, ब्लड शुगर पर नियंत्रण और उचित इलाज से इसे मैनेज किया जा सकता है। **************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ……………… यह खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- क्या पानी पीने पर भी सूखता है मुंह: हो सकता है जेरोस्टोमिया, डॉक्टर से जानें कारण, लक्षण और बचाव के टिप्स क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि बार-बार पानी पीने के बावजूद मुंह सूखा रहता है? खाना निगलने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है या रात में मुंह सूखने से नींद खुल जाती है? अगर हां, तो इसे मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। यह जेरोस्टोमिया यानी ड्राई माउथ का संकेत हो सकता है। पूरी खबर पढ़िए…
फिजिकल हेल्थ- खाने के बाद घंटों पचता नहीं है खाना:हो सकता है गैस्ट्रोपेरेसिस, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, इलाज, बचाव के 10 टिप्स

