UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सत्ताधारी भाजपा ने अभी से चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी इस बार राष्ट्रीय नेतृत्व की लोकप्रियता, संगठन की ताकत और बूथ स्तर पर मतदाताओं से सीधे संपर्क को एक साथ जोडऩे की रणनीति पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को अलग-अलग स्तरों पर जिम्मेदारी देने की योजना है।
इसके अनुसार पीएम मोदी सभी 18 मंडलों में बड़ी जनसभाएं करेंगे। इसके जरिए पार्टी केंद्र सरकार के कामकाज और राष्ट्रीय नेतृत्व के संदेश को प्रदेश भर में पहुंचाना चाहती है। वहीं अमित शाह जिला स्तर पर सभाओं, क्षेत्रीय बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए चुनावी तैयारियों की निगरानी करेंगे। उनकी भूमिका संगठन के सूक्ष्म प्रबंधन की रहेगी। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन को विधानसभा वार दौरे और मतदाता संपर्क की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने की तैयारी में हैं। अभियान 20 नवंबर के बाद गति पकड़ेगा।
जेन-जी पर भी नजर
चुनाव प्रचार के दौरान युवाओं, जेन-जी वोटर्स तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया पर विशेष जोर रहेगा। कार्यकर्ताओं को स्थानीय अभियानों की तस्वीरें, वीडियो और अपडेट साझा करने के निर्देश दिए जाएंगे। महिला मतदाताओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से भी अलग-अलग संपर्क किया जाएगा।
घर-घर संपर्क पर जोर
भाजपा की रणनीति में घर-घर संपर्क को अहम स्थान दिया गया है। हर बूथ कार्यकर्ता और टोली को कम से कम 50 परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य दिया जाएगा। महिला, युवा, पहली बार मतदान करने वाले, किसान, लाभार्थी, छोटे व्यापारी, पूर्व सैनिक और प्रबुद्ध वर्ग से सीधा संवाद किया जाएगा। जिला स्तर पर समन्वय टोलियां बनाकर अभियानों की समीक्षा होगी। प्रवासी प्रभारी विधानसभा क्षेत्रों में संगठन की स्थिति और मतदाताओं के रुझान का आकलन करेंगे।
चौपालों के जरिए साधेगी समीकरण
माना जा रहा है कि यह चुनावी योजना यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने तैयार की है। इसके तहत संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक समीकरण साधने पर भी जोर है। इसके तहत सामाजिक चौपालों का भी आयोजन होगा, जिससे सामाजिक और जातीय समुदायों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास होगा।
2017 का प्रदर्शन दोहराने का प्रयास
2022 में भाजपा को 255 सीटें मिली थीं, जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में उसे 312 सीटें मिली थीं। लोकसभा के 2024 के चुनाव में 80 में से 33 सीट ही जीत पाई थी। ऐसे में पार्टी का लक्ष्य सिर्फ सत्ता बचाना नहीं, बल्कि 2017 का प्रदर्शन दोहराना भी है।

