वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के एक शिष्य की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दीपक लोधी, जिन्हें ‘रसिक दुलारी शरण’ के नाम से जाना जाता था, 25 साल के थे और लगभग दो साल पहले ही आध्यात्मिक रास्ते से जुड़े थे। शुक्रवार सुबह ‘गुरु कृपा कुंज आश्रम’ की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई। संत प्रेमानंद महाराज के एक शिष्य की मौत के मामले में रहस्य तब और गहरा गया है जब कमरे में एक ग्राइंडर मिला, उनके प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान थे और CCTV फुटेज से पता चला कि मौत चौथी मंज़िल की छत से कूदने की वजह से हुई।
पुलिस दीपक लोधी (जिन्हें रसिक दुलारी शरण के नाम से भी जाना जाता था) की मौत को आत्महत्या मान रही है, लेकिन वे इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि गिरने से पहले क्या हुआ था। वे यह भी देख रहे हैं कि क्या उनके मोबाइल फोन से डिलीट की गई चैट, वीडियो या अन्य डेटा से घटना के हालात का पता चल सकता है। दीपक लोधी, जिन्होंने लगभग दो साल पहले संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी और रसिक दुलारी शरण नाम अपनाया था, शुक्रवार सुबह वृंदावन के गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंज़िल से कूदने के बाद मर गए।
जानलेवा छलांग से पहले क्या हुआ
यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे हुई। पुलिस द्वारा देखे गए CCTV फुटेज के अनुसार, रसिक शरण सुबह करीब 10:25 बजे अपने कमरे से बाहर निकले। उनके कपड़ों पर खून के धब्बे दिखे। वे कुछ देर कमरे के बाहर रहे और फिर तीसरी मंज़िल से चौथी मंज़िल की छत पर चले गए। इसके बाद उन्हें छत पर बैठे और फिर करीब 10 सेकंड तक ज़मीन पर लेटे हुए देखा गया। वे अचानक उठे और सुबह करीब 10:36 बजे छत से कूद गए। उनके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें पास के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें उन्हें छत से गिरते हुए दिखाया गया था। CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस इस नतीजे पर पहुंची है कि शरण की मौत आत्महत्या से हुई। हालांकि, पुलिस अब कूदने से ठीक पहले हुई घटनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
कमरे में ग्राइंडर मिला
जांच का एक और अहम पहलू उस कमरे में ग्राइंडर का मिलना है जहां शरण रह रहे थे। पुलिस ने कहा है कि जांच के दौरान उनके प्राइवेट पार्ट पर चोट लगने से जुड़ी बातें सामने आई हैं। हालांकि, यह साफ़ नहीं है कि बिल्डिंग से कूदने से पहले उन्हें चोट कैसे लगी। वृंदावन के सर्कल ऑफिसर संदीप कुमार सिंह ने कहा कि इसके पीछे की वजह का पता जांच के बाद ही चल पाएगा। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने CCTV कैमरे ज़ब्त कर लिए हैं और शिष्य का ब्लड सैंपल भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
डिलीट की गई चैट और वीडियो की जांच
जांच अब शरण द्वारा छोड़े गए डिजिटल सुरागों की ओर भी बढ़ गई है। उनका मोबाइल फ़ोन डेटा रिकवरी के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या उन्होंने मरने से पहले फ़ोटो, वीडियो, चैट या कोई और चीज़ डिलीट की थी और क्या डिलीट किया गया डेटा वापस मिल सकता है। जांच करने वालों को उम्मीद है कि फ़ोन की फॉरेंसिक जांच से उनकी मौत की परिस्थितियों के बारे में सुराग मिल सकते हैं। पुलिस ने आश्रम में रहने वाले लोगों और शरण के साथ या उनके आस-पास रहने वाले लोगों से अलग-अलग पूछताछ की है। अब तक, जांच करने वालों को आत्महत्या की कोई साफ़ वजह नहीं मिली है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह ज़्यादा खून बहना बताया गया है।
संतों ने हाई-लेवल जांच की मांग की
इस मामले ने वृंदावन के संतों की ओर से हाई-लेवल जांच की मांग भी तेज़ कर दी है। वृंदावन में संतों की एक बैठक हुई, जिसमें संतों ने एकमत से मौत की जांच की मांग की और घटना से जुड़ी परिस्थितियों को सामने लाने को कहा। एक संत, महंत मोहिनी शरण महाराज ने कहा कि संत समाज इस घटना की निंदा करता है और सवाल उठाया कि जिस आश्रम ‘केली कुंज’ में वे रह रहे थे, उसने मौत के बाद कोई बयान क्यों नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन ने भी कोई हाई-लेवल जांच नहीं की है। उन्होंने मांग की कि ज़िला प्रशासन इस मामले की हाई-लेवल जांच का आदेश दे। मोहिनी शरण ने इलाके में साधु के भेष में घूमने वाले लोगों की भी जांच की मांग की और आरोप लगाया कि ऐसे भेष में बड़ी संख्या में असामाजिक तत्व हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी जांच से और जानकारी मिल सकती है।
एक और संत, महंत गंगादास जी महाराज ने इसे “बहुत गलत” घटना बताया और यह भी आरोप लगाया कि वहां समय-समय पर ऐसी घटनाएं होती रही हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि केलि कुंज के कुछ शिष्य ज़मीन हड़पने और “माफ़िया गतिविधियों” में शामिल थे और कहा कि ऐसी गतिविधियों से सनातन संस्कृति को नुकसान पहुँच रहा है। फिलहाल, जाँचकर्ता घटनाओं के क्रम का पता लगाने के लिए CCTV फुटेज पर निर्भर हैं, जबकि मोबाइल फ़ोन, खून के नमूने और अन्य सबूतों की फोरेंसिक जाँच चल रही है। उनके प्राइवेट पार्ट पर लगी चोट का कारण और क्या डिलीट किया गया डिजिटल डेटा उनके आखिरी घंटों के बारे में कोई जानकारी दे सकता है, ये जाँच के मुख्य सवाल बने हुए हैं।

