प्रयागराज मे लोकगीतों की मिठास, भक्ति संगीत की गूंज और ब्रज के मनमोहक मयूर नृत्य के साथ उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC) में गुरुवार को 14 दिवसीय दीपावली शिल्प मेले का भव्य आगाज हुआ। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत परिसर स्थित शिल्प हाट में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन मुख्य अतिथि, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष व सेवानिवृत्त आईजी के.पी. सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, मंजू शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय और सलाहकार कल्पना सहाय उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सौदामिनी संस्कृत महाविद्यालय के बटुकों द्वारा स्वस्तिवाचन से हुई। इसके बाद गौरी और यथार्थ ने ‘वक्रतुंड महाकाय’ मंत्र का सस्वर पाठ कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। बिरहा गायन में जीवंत हुए पौराणिक प्रसंग
सांस्कृतिक संध्या में लोकगायिका प्रियंका माधुरी ने बिरहा के जरिए लोकजीवन की संवेदनाओं को मंच पर उतारा। उन्होंने ‘बनवा में राम गइले, सिया के हरण भइले’ गीत से राम वनगमन और सीता हरण की मार्मिक व्यथा व्यक्त की। इसके अलावा उन्होंने ‘बहिनिया मनमोहन की बावरी’ और दुर्वासा प्रसंग पर आधारित प्रस्तुतियों से श्रोताओं को लोकगायन की समृद्ध परंपरा से जोड़ा। भजन और उपशास्त्रीय गायन से सजी शाम
युवा कलाकार हर्षिता सुदर्शन ने ‘गाइए गणपति जगवंदन’, ‘जिसका रखवाला है राम’ और ‘ऐसी लागी लगन’ जैसे भजनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने ‘धरती पर आया स्वर्ग उतरकर’ और पारंपरिक लोकगीत ‘नई झुलनी के छइया’ प्रस्तुत कर त्योहार का उल्लास बिखेरा। वहीं, डॉ. सुरेंद्र कुमार ने उपशास्त्रीय गायन प्रस्तुत कर महफिल में शास्त्रीय गंभीरता का रंग भरा। मयूर नृत्य पर जमकर बजीं तालियां
संध्या का मुख्य आकर्षण मथुरा के गिरधर गोपाल शर्मा एवं दल का मयूर नृत्य रहा। ब्रज वंदना’से शुरुआत के बाद कलाकारों ने ‘आज अपने कान्हा कूं मुखड़ौ दिखाय दै’ पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इसके बाद ‘आयौ रसिया, मोर बन आयौ रसिया’ गीत पर मोरपंखों से सजे कलाकारों के लयबद्ध मयूर नृत्य ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। उद्घाटन के बाद मुख्य अतिथि के.पी. सिंह ने मेले में देशभर से आए शिल्पकारों के स्टॉलों का अवलोकन किया और उनके हुनर की सराहना की।

