मेजा तहसील के चांद खमरिया स्थित कृष्ण मृग (ब्लैक बक) आरक्षित क्षेत्र को विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। शनिवार को मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने अधिकारियों के साथ आरक्षित क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा, कृष्ण मृगों के संरक्षण, पानी और हरियाली की व्यवस्था के साथ पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन विकसित करने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने आरक्षित क्षेत्र की बची हुई जमीन का डी-मार्केशन और स्पष्ट सीमांकन कराने के साथ भूमि को वन विभाग को सुरक्षित रूप से हस्तांतरित करने के निर्देश दिए। क्षेत्र में मजबूत बाउंड्री बनाने, वर्षा जल संचयन, तालाब और बंधियां बनाने तथा जरूरत के अनुसार पौधरोपण कराने को कहा गया। मृगों के लिए बनेंगे छोटे तालाब कृष्ण मृगों के लिए सालभर पानी उपलब्ध कराने की योजना पर भी सहमति बनी। इसके तहत एनटीपीसी के सीएसआर फंड से अलग-अलग स्थानों पर सोलर पंप आधारित ब्लास्ट वेल विकसित किए जाएंगे। इनसे छोटे तालाब बनाए जाएंगे, ताकि मृगों को पर्याप्त पेयजल मिल सके। इसके अलावा आरक्षित क्षेत्र से कुछ दूरी पर बह रही नदी से पानी लाने की संभावना भी तलाशी जाएगी। इसके लिए पंपिंग स्टेशन और कैनाल के जरिए पानी पहुंचाने का सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में प्रस्ताव व्यवहारिक पाए जाने पर लघु सिंचाई विभाग के माध्यम से आगे की कार्रवाई की जाएगी। आरक्षित क्षेत्र में रह रहे लोगों को दूसरी जगह बसाया जाएगा आरक्षित क्षेत्र में रह रहे लोगों के पुनर्वास की भी योजना बनाई गई है। मंडलायुक्त ने निर्देश दिया कि इन परिवारों को एक स्थान पर आवासीय कॉलोनी के रूप में व्यवस्थित तरीके से बसाया जाए। पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री आवासीय योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने के लिए सीडीओ को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। मृगों के आहार के लिए बनेगी ग्रीन नर्सरी कृष्ण मृगों के लिए प्राकृतिक आहार की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए मनरेगा से ग्रीन नर्सरी विकसित की जाएगी। इसमें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ऐसी वनस्पतियां विकसित की जाएंगी, जो कृष्ण मृगों के प्राकृतिक आहार के अनुकूल हों। मिट्टी-खपरैल की हट्स और वॉच टावर बनेंगे आरक्षित क्षेत्र के आसपास पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने की भी तैयारी है। पर्यटन विभाग के इको पार्क में मिट्टी और खपरैल से बनी हट्स विकसित की जाएंगी। यहां प्राकृतिक परिवेश को बनाए रखते हुए पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वहीं, वन विभाग की ओर से वॉच टावर बनाए जाएंगे। इससे कृष्ण मृगों के संरक्षण और निगरानी में मदद मिलेगी। साथ ही पर्यटक भी उनके प्राकृतिक आवास और विचरण क्षेत्र को देख सकेंगे। निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, फॉरेस्ट कंजरवेटर, डीएफओ सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। मंडलायुक्त ने सभी विभागों को अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध तरीके से काम कराने के निर्देश दिए।

