पेपरलेस रजिस्ट्री पर आमने-सामने वेंडर और विभाग, रजिस्ट्री घटकर 2-3:गोपालगंज में नई व्यवस्था को लेकर आपत्ति, विभाग बोला-‘अफवाहों से बचें’

पेपरलेस रजिस्ट्री पर आमने-सामने वेंडर और विभाग, रजिस्ट्री घटकर 2-3:गोपालगंज में नई व्यवस्था को लेकर आपत्ति, विभाग बोला-‘अफवाहों से बचें’

गोपालगंज के निबंधन कार्यालय में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद वेंडर और विभाग आमने-सामने आ गए हैं। वेंडर नई व्यवस्था में तकनीकी और व्यावहारिक परेशानियों का हवाला देते हुए इसे समाप्त कर पुरानी मैनुअल व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, विभाग का कहना है कि पेपरलेस निबंधन व्यवस्था आम लोगों के लिए आसान, पारदर्शी और सुरक्षित है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और फर्जीवाड़े पर भी रोक लगेगी। 50 से घटकर दो-तीन रजिस्ट्री, राजस्व में भी भारी गिरावट वेंडरों के अनुसार, पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद निबंधन कार्यालय में होने वाली रजिस्ट्री की संख्या में भारी गिरावट आई है। सामान्य दिनों में गोपालगंज निबंधन कार्यालय में प्रतिदिन करीब 50 रजिस्ट्री होती थीं। इससे सरकार को लगभग 40 से 50 लाख रुपये तक का राजस्व प्राप्त होता था। वर्तमान में रजिस्ट्री की संख्या घटकर महज दो-तीन रह गई है। इससे राजस्व भी घटकर करीब एक-दो लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंचने की बात कही जा रही है। वेंडरों का दावा है कि इससे सरकार को रोजाना करीब 70 लाख रुपये तक के राजस्व का नुकसान हो रहा है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी नई व्यवस्था को लेकर सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को होने की बात कही जा रही है। खासकर ऐसे लोगों को दिक्कत हो रही है, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है या जो मोबाइल और ओटीपी आधारित प्रक्रिया से सहज नहीं हैं। वेंडरों का कहना है कि पहले जमीन की रजिस्ट्री के दौरान संबंधित दस्तावेज लोगों के सामने होते थे। पढ़े-लिखे लोग खुद दस्तावेज की जानकारी देख लेते थे, जबकि कम पढ़े-लिखे लोग गवाह या परिचितों की मदद से कागजात समझ लेते थे। पूरी जानकारी से संतुष्ट होने के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी। मोबाइल और ओटीपी को लेकर लोगों में भ्रम वेंडरों के मुताबिक, पेपरलेस प्रक्रिया में मोबाइल और ओटीपी की भूमिका बढ़ने से कई लोगों में आशंका है। कुछ लोगों के पास अपना मोबाइल फोन नहीं है, जबकि कुछ लोग ओटीपी साझा करने और मोबाइल आधारित प्रक्रिया को लेकर सहज नहीं हैं। इसका असर रजिस्ट्री कराने वाले लोगों की संख्या पर पड़ रहा है। विभाग ने कहा- पेपरलेस व्यवस्था में कई फायदे दूसरी ओर, निबंधन विभाग नई व्यवस्था को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को निराधार बता रहा है। निबंधन अधिकारी काली आशीष ने कहा कि डिजिटल प्रक्रिया को आम नागरिकों के लिए सरल बनाया गया है। लोगों को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पेपरलेस व्यवस्था का उद्देश्य निबंधन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करना है। डिजिटल प्रणाली से दस्तावेजों का सत्यापन तेजी से होता है और भू-धारी का सत्यापन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगाने का विभाग का दावा विभाग के अनुसार, ऑनलाइन सत्यापन से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन बेचने या एक ही जमीन की दोबारा रजिस्ट्री जैसी गड़बड़ियों की संभावना कम होगी। स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क का भुगतान बैंक, यूपीआई या ऑनलाइन चालान के माध्यम से डिजिटल रूप से किया जाता है। इससे अवैध या अतिरिक्त वसूली की गुंजाइश भी कम होने का दावा किया जा रहा है। रजिस्ट्री के बाद दस्तावेज मिलने को लेकर भी भ्रम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेपरलेस रजिस्ट्री का मतलब यह नहीं है कि रजिस्ट्री कराने वाले व्यक्ति को कोई कागज नहीं मिलेगा। निबंधन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक दस्तावेज और पेपर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। वहीं, निबंधित दस्तावेज डिजिटल रूप में भी सुरक्षित रखे जाएंगे, जिन्हें जरूरत के अनुसार ऑनलाइन देखा और डाउनलोड किया जा सकता है। जागरूकता बढ़ने पर रजिस्ट्री बढ़ने की उम्मीद निबंधन अधिकारी ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और सरकारी पोर्टल के माध्यम से डिजिटल निबंधन का लाभ उठाएं। विभाग का मानना है कि लोगों के बीच जागरूकता बढ़ने और भ्रम दूर होने के साथ रजिस्ट्री की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी। इससे आने वाले दिनों में सरकारी राजस्व में सुधार की उम्मीद है। गोपालगंज के निबंधन कार्यालय में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद वेंडर और विभाग आमने-सामने आ गए हैं। वेंडर नई व्यवस्था में तकनीकी और व्यावहारिक परेशानियों का हवाला देते हुए इसे समाप्त कर पुरानी मैनुअल व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, विभाग का कहना है कि पेपरलेस निबंधन व्यवस्था आम लोगों के लिए आसान, पारदर्शी और सुरक्षित है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और फर्जीवाड़े पर भी रोक लगेगी। 50 से घटकर दो-तीन रजिस्ट्री, राजस्व में भी भारी गिरावट वेंडरों के अनुसार, पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद निबंधन कार्यालय में होने वाली रजिस्ट्री की संख्या में भारी गिरावट आई है। सामान्य दिनों में गोपालगंज निबंधन कार्यालय में प्रतिदिन करीब 50 रजिस्ट्री होती थीं। इससे सरकार को लगभग 40 से 50 लाख रुपये तक का राजस्व प्राप्त होता था। वर्तमान में रजिस्ट्री की संख्या घटकर महज दो-तीन रह गई है। इससे राजस्व भी घटकर करीब एक-दो लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंचने की बात कही जा रही है। वेंडरों का दावा है कि इससे सरकार को रोजाना करीब 70 लाख रुपये तक के राजस्व का नुकसान हो रहा है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी नई व्यवस्था को लेकर सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को होने की बात कही जा रही है। खासकर ऐसे लोगों को दिक्कत हो रही है, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है या जो मोबाइल और ओटीपी आधारित प्रक्रिया से सहज नहीं हैं। वेंडरों का कहना है कि पहले जमीन की रजिस्ट्री के दौरान संबंधित दस्तावेज लोगों के सामने होते थे। पढ़े-लिखे लोग खुद दस्तावेज की जानकारी देख लेते थे, जबकि कम पढ़े-लिखे लोग गवाह या परिचितों की मदद से कागजात समझ लेते थे। पूरी जानकारी से संतुष्ट होने के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी। मोबाइल और ओटीपी को लेकर लोगों में भ्रम वेंडरों के मुताबिक, पेपरलेस प्रक्रिया में मोबाइल और ओटीपी की भूमिका बढ़ने से कई लोगों में आशंका है। कुछ लोगों के पास अपना मोबाइल फोन नहीं है, जबकि कुछ लोग ओटीपी साझा करने और मोबाइल आधारित प्रक्रिया को लेकर सहज नहीं हैं। इसका असर रजिस्ट्री कराने वाले लोगों की संख्या पर पड़ रहा है। विभाग ने कहा- पेपरलेस व्यवस्था में कई फायदे दूसरी ओर, निबंधन विभाग नई व्यवस्था को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को निराधार बता रहा है। निबंधन अधिकारी काली आशीष ने कहा कि डिजिटल प्रक्रिया को आम नागरिकों के लिए सरल बनाया गया है। लोगों को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पेपरलेस व्यवस्था का उद्देश्य निबंधन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करना है। डिजिटल प्रणाली से दस्तावेजों का सत्यापन तेजी से होता है और भू-धारी का सत्यापन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगाने का विभाग का दावा विभाग के अनुसार, ऑनलाइन सत्यापन से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन बेचने या एक ही जमीन की दोबारा रजिस्ट्री जैसी गड़बड़ियों की संभावना कम होगी। स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क का भुगतान बैंक, यूपीआई या ऑनलाइन चालान के माध्यम से डिजिटल रूप से किया जाता है। इससे अवैध या अतिरिक्त वसूली की गुंजाइश भी कम होने का दावा किया जा रहा है। रजिस्ट्री के बाद दस्तावेज मिलने को लेकर भी भ्रम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेपरलेस रजिस्ट्री का मतलब यह नहीं है कि रजिस्ट्री कराने वाले व्यक्ति को कोई कागज नहीं मिलेगा। निबंधन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक दस्तावेज और पेपर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। वहीं, निबंधित दस्तावेज डिजिटल रूप में भी सुरक्षित रखे जाएंगे, जिन्हें जरूरत के अनुसार ऑनलाइन देखा और डाउनलोड किया जा सकता है। जागरूकता बढ़ने पर रजिस्ट्री बढ़ने की उम्मीद निबंधन अधिकारी ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और सरकारी पोर्टल के माध्यम से डिजिटल निबंधन का लाभ उठाएं। विभाग का मानना है कि लोगों के बीच जागरूकता बढ़ने और भ्रम दूर होने के साथ रजिस्ट्री की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी। इससे आने वाले दिनों में सरकारी राजस्व में सुधार की उम्मीद है।  

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