पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू के खिलाफ NBW जारी:पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा पर बयान देने के मामले में लखनऊ कोर्ट ने पेशी से छूट की अर्जी खारिज की

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू के खिलाफ NBW जारी:पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा पर बयान देने के मामले में लखनऊ कोर्ट ने पेशी से छूट की अर्जी खारिज की

पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा पर बयान देने से जुड़े मानहानि मामले में पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शनिवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनकी ओर से दाखिल पेशी से छूट की अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने का आदेश दिया। विशेष लोक अभियोजक रमेश कुमार शुक्ला के मुताबिक, अजय लल्लू कई तारीखों से कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे। यह मामला 2019 में डीएचएफएल से जुड़े मामले को लेकर श्रीकांत शर्मा पर लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़ा है। 4 नवंबर 2019 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए थे आरोप मामला 4 नवंबर 2019 का है। उस समय अजय कुमार लल्लू कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक थे। उन्होंने डीएचएफएल से जुड़े बिजली कर्मचारियों के भविष्य निधि के मामले को लेकर तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे।
अजय लल्लू ने आरोप लगाया था कि गरीब लोगों के बिजली बिल का बकाया होने पर कनेक्शन काटने वाले ऊर्जा मंत्री के विभाग से हजारों करोड़ रुपए ऐसी कंपनियों को दिए गए, जिनका संबंध दाऊद इब्राहिम और इकबाल मिर्ची से था। उन्होंने श्रीकांत शर्मा पर विदेश यात्रा और डीएचएफएल मामले को लेकर भी सवाल उठाए थे।
यह बयान न्यूज चैनलों पर प्रसारित हुआ और अगले दिन समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ। इसके बाद श्रीकांत शर्मा की ओर से मानहानि का मुकदमा दाखिल किया गया। श्रीकांत शर्मा ने कहा- बयान से छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान श्रीकांत शर्मा की ओर से दाखिल परिवाद में कहा गया कि अजय लल्लू ने दुर्भावना से प्रेरित होकर उनके खिलाफ असत्य और भ्रामक बयान दिए। उनका कहना था कि इन आरोपों से उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, ईमानदारी और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और दलीलों पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि किसी राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष जैसे जिम्मेदार पद पर रहने वाले व्यक्ति से अपेक्षा होती है कि गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पूरी तरह जांच कर ली जाए। कोर्ट ने कहा- बिना जांच लगाए गए आरोप अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जनता को सही सूचना मिलना जरूरी है, ताकि वह सही जानकारी के आधार पर अपने जनप्रतिनिधि का चुनाव कर सके। कोर्ट के मुताबिक, बिना तथ्यों की पर्याप्त जांच के किसी मंत्री पर गंभीर आरोप लगाना जनता को भ्रमित करने जैसा है।
अदालत ने माना कि ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों के भविष्य निधि और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री की विदेश यात्रा से जुड़े तथ्यों की पर्याप्त जांच किए बिना आरोप लगाए गए। इससे परिवादी श्रीकांत शर्मा की व्यक्तिगत गरिमा को क्षति पहुंची। 18 मार्च 2023 को दोषी ठहराया, एक साल की सजा अदालत ने 18 मार्च 2023 को अजय कुमार उर्फ लल्लू को IPC की धारा 500 के तहत मानहानि के मामले में दोषी ठहराया था। कोर्ट ने उन्हें एक साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्हें जमानत मिली थी।

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