पूर्णिया के कसबा में दुर्गापूजा शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से हो सके, इसके लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को सदर एसडीएम विग्नेश टीए और सदर एसडीपीओ-2 डॉ. गौरव कुमार ने कसबा में रावण दहन और मूर्ति विसर्जन स्थलों का दौरा किया। उनके साथ कसबा बीडीओ, नगर परिषद के प्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी भी थे। उन्होंने नदी किनारे बने इन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था जांची। निरीक्षण के दौरान सदर एसडीपीओ-2 डॉ. गौरव कुमार ने आयोजकों, पुलिस पदाधिकारियों एवं आम जनता के लिए कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए । आयोजकों एवं पूजा समितियों के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि बांध बनने के कारण यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि रावण के पुतले की ऊंचाई पर्याप्त हो, ताकि दूर खड़े श्रद्धालुओं को भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे सके और किसी प्रकार की अफरा-तफरी की स्थिति न बने। एसडीपीओ-2 बोले- संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का होगा यूज सभी आयोजकों को सीसीटीवी, वीडियोग्राफी और अग्निशमन के सभी सुरक्षा मानकों का 100 फीसदी पालन करना होगा। आयोजकों की सूची संबंधित थाना प्रभारी को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। इतना ही नहीं जिले के सभी पूजा पंडालों में प्रवेश-निकास का अलग मार्ग, सीसीटीवी, फायर एनओसी और सुचारु पब्लिक एड्रेस सिस्टम होना अनिवार्य किया गया है, ताकि भीड़ नियंत्रण और खोया-पाया की सूचना में मदद मिल सके। सख्त हिदायत देते हुए एसडीपीओ 2 ने कहा कि असामाजिक तत्वों और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा। यदि कोई भी व्यक्ति शांति भंग करने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करेगा, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यातायात व भीड़ नियंत्रण की अपील आम लोगों से अपील की गई है कि कसबा नेहरू चौक की तरफ से कोई भी वाहन लेकर न आएं। सभी श्रद्धालु केवल पैदल ही कार्यक्रम स्थल तक पहुंचें। नदी के ऊपर बने पुल पर किसी भी स्थिति में भीड़ या जमावड़ा नहीं लगने दिया जाएगा। सुरक्षा के लिए वहां ड्रॉप गेट, बैरिकेडिंग और पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। बांध की तरफ मौजूद बसावट के पास बैरिकेडिंग की जाएगी ताकि मुख्य कार्यक्रम स्थल पूरी तरह सुरक्षित रहे और केवल मंदिर समिति के अधिकृत सदस्य ही वहां प्रवेश कर सकें। सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम, मुस्तैद रहेंगी टीमें सदर एसडीएम विग्नेश टीए ने सुरक्षा और प्रवेश नियम पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बांध से नदी की ओर वाले हिस्से में आम जनता का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। केवल मंदिर व आयोजन समिति के सदस्यों को ही मूर्ति के साथ जाने की अनुमति होगी। आम श्रद्धालु बांध के दूसरी तरफ से ही सुरक्षित तरीके से कार्यक्रम देख सकेंगे। रावण दहन के दौरान दुर्घटना से बचाव के लिए बिजली आपूर्ति रोकी जाएगी। नदी के गहरे हिस्सों को चिह्नित कर वहां बैरिकेडिंग और लाल कपड़े के संकेत लगाए जाएंगे। आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, गोताखोरों और एसडीआरएफ व एनडीआरएफ की टीमों को मुस्तैद रखा जाएगा। दो स्तरीय बैरिकेडिंग की व्यवस्था जानकारी साझा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि रावण दहन स्थल और विसर्जन मार्ग पर दो चरणों में बैरिकेडिंग कर भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा । विसर्जन के दिन शाम 4:00 बजे से लीची बागान और नेहरू चौक पर वाहनों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। इसके आंवला पूरे अनुमंडल क्षेत्र में सभी पंडालों और विसर्जन जुलूसों के साथ प्रशासनिक व पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। पूर्णिया के कसबा में दुर्गापूजा शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से हो सके, इसके लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को सदर एसडीएम विग्नेश टीए और सदर एसडीपीओ-2 डॉ. गौरव कुमार ने कसबा में रावण दहन और मूर्ति विसर्जन स्थलों का दौरा किया। उनके साथ कसबा बीडीओ, नगर परिषद के प्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी भी थे। उन्होंने नदी किनारे बने इन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था जांची। निरीक्षण के दौरान सदर एसडीपीओ-2 डॉ. गौरव कुमार ने आयोजकों, पुलिस पदाधिकारियों एवं आम जनता के लिए कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए । आयोजकों एवं पूजा समितियों के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि बांध बनने के कारण यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि रावण के पुतले की ऊंचाई पर्याप्त हो, ताकि दूर खड़े श्रद्धालुओं को भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे सके और किसी प्रकार की अफरा-तफरी की स्थिति न बने। एसडीपीओ-2 बोले- संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का होगा यूज सभी आयोजकों को सीसीटीवी, वीडियोग्राफी और अग्निशमन के सभी सुरक्षा मानकों का 100 फीसदी पालन करना होगा। आयोजकों की सूची संबंधित थाना प्रभारी को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। इतना ही नहीं जिले के सभी पूजा पंडालों में प्रवेश-निकास का अलग मार्ग, सीसीटीवी, फायर एनओसी और सुचारु पब्लिक एड्रेस सिस्टम होना अनिवार्य किया गया है, ताकि भीड़ नियंत्रण और खोया-पाया की सूचना में मदद मिल सके। सख्त हिदायत देते हुए एसडीपीओ 2 ने कहा कि असामाजिक तत्वों और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा। यदि कोई भी व्यक्ति शांति भंग करने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करेगा, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यातायात व भीड़ नियंत्रण की अपील आम लोगों से अपील की गई है कि कसबा नेहरू चौक की तरफ से कोई भी वाहन लेकर न आएं। सभी श्रद्धालु केवल पैदल ही कार्यक्रम स्थल तक पहुंचें। नदी के ऊपर बने पुल पर किसी भी स्थिति में भीड़ या जमावड़ा नहीं लगने दिया जाएगा। सुरक्षा के लिए वहां ड्रॉप गेट, बैरिकेडिंग और पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। बांध की तरफ मौजूद बसावट के पास बैरिकेडिंग की जाएगी ताकि मुख्य कार्यक्रम स्थल पूरी तरह सुरक्षित रहे और केवल मंदिर समिति के अधिकृत सदस्य ही वहां प्रवेश कर सकें। सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम, मुस्तैद रहेंगी टीमें सदर एसडीएम विग्नेश टीए ने सुरक्षा और प्रवेश नियम पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बांध से नदी की ओर वाले हिस्से में आम जनता का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। केवल मंदिर व आयोजन समिति के सदस्यों को ही मूर्ति के साथ जाने की अनुमति होगी। आम श्रद्धालु बांध के दूसरी तरफ से ही सुरक्षित तरीके से कार्यक्रम देख सकेंगे। रावण दहन के दौरान दुर्घटना से बचाव के लिए बिजली आपूर्ति रोकी जाएगी। नदी के गहरे हिस्सों को चिह्नित कर वहां बैरिकेडिंग और लाल कपड़े के संकेत लगाए जाएंगे। आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, गोताखोरों और एसडीआरएफ व एनडीआरएफ की टीमों को मुस्तैद रखा जाएगा। दो स्तरीय बैरिकेडिंग की व्यवस्था जानकारी साझा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि रावण दहन स्थल और विसर्जन मार्ग पर दो चरणों में बैरिकेडिंग कर भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा । विसर्जन के दिन शाम 4:00 बजे से लीची बागान और नेहरू चौक पर वाहनों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। इसके आंवला पूरे अनुमंडल क्षेत्र में सभी पंडालों और विसर्जन जुलूसों के साथ प्रशासनिक व पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई है।

