टोंक के 16 समेत राजस्थान के 639 पीएम श्री स्कूलों की बाल वाटिकाओं में अब नौनिहालों के लिए साल में दो बार खेल, रचनात्मक गतिविधियों और सीखने का उत्सव होगा। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने इन विद्यालयों में ईसीसीई डे (बाल मेला) आयोजित करने के लिए 1 करोड़ 91 लाख 70 हजार रुपए की संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। इसमें टोंक जिले के 16 स्कूलों के लिए 4.80 लाख रुपए शामिल हैं। खेल के जरिए सीखेंगे बच्चे राज्य के चयनित प्रत्येक पीएम श्री विद्यालय में साल में दो बार मेले आयोजित किए जाएंगे। इनमें बच्चों को किताबों से इतर खेल और अनुभव के जरिए सीखने के अवसर मिलेंगे। बाल मेले के आयोजन के लिए प्रत्येक चयनित विद्यालय को अधिकतम 30 हजार रुपए जारी किए गए हैं। यह राशि संबंधित विद्यालय एसएमसी/एसडीएमसी के माध्यम से निर्धारित गतिविधियों पर खर्च की जाएगी। योजना में राज्य के प्रथम, द्वितीय और आठवें चरण में चयनित पीएम श्री विद्यालय शामिल हैं। खेल में सीखने से बढ़ेगी जिज्ञासा बाल वाटिका स्तर पर बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को सहज और आनंददायक बनाने पर जोर दिया गया है। बाल मेले में खेल और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में अनुभव आधारित जिज्ञासा, रचनात्मकता, सामाजिक व्यवहार और सीखने की रुचि विकसित करने का प्रयास होगा। गतिविधियों के जरिए स्कूल के माहौल को भी छोटे बच्चों के अनुकूल और आकर्षक बनाने पर जोर रहेगा। इससे शुरुआती शिक्षा के स्तर पर बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत करने में मदद मिलेगी। पोर्टल पर दर्ज करना होगा खर्च का पूरा हिसाब राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा की ओर से जारी स्वीकृति में राशि का उपयोग निर्धारित मद में ही करने के निर्देश दिए गए हैं। खरीद प्रक्रिया में संबंधित नियमों और वित्तीय प्रावधानों की पालना के साथ पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी। विद्यालयों को खर्च की गई राशि का पूरा विवरण प्रबंध पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। खेल-खेल में सीखने का मौका मिलेगा शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा- पीएम श्री स्कूलों की बाल वाटिकाओं में साल में दो बार बाल मेले का आयोजन होने से बच्चों को खेल-खेल में सीखने और अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका मिलेगा। बाल मेले के माध्यम से बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, सामाजिक व्यवहार और सहभागिता की भावना विकसित होगी। इस तरह की गतिविधियां बाल वाटिका के बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

