पीएनजी 28 जिलों में पहुंची:लक्ष्य का सिर्फ 40 फीसदी ही काम पूरा, 9 जिलों में काम शुरू नहीं

पीएनजी 28 जिलों में पहुंची:लक्ष्य का सिर्फ 40 फीसदी ही काम पूरा, 9 जिलों में काम शुरू नहीं

बिहार में रसोई गैस सिलेंडर के झंझट से मुक्ति और सुरक्षित पीएनजी पहुंचाने की योजना रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। राज्य के 38 में से 28 जिलों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क स्थापित हुआ है। अब तक महज 1,52,686 घरों में ही पीएनजी के लाइव कनेक्शन पहुंचे हैं। यह मार्च 2026 तक तय किए गए कुल लक्ष्य का मात्र 40.44% है। वहीं अब तक 9 जिले नेटवर्क से जुड़े ही नहीं हैं। योजना की सुस्त रफ्तार पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने समीक्षा बैठक की। इस बैठक में सभी जिलाधिकारियों और तेल-गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों को मिशन मोड में काम करने की हिदायत दी गई। समीक्षा में सामने आया कि एनएचएआई से अनुमति मिलने में देरी और स्थानीय स्तर पर भूमि आवंटन व अतिक्रमण के कारण पाइपलाइन बिछाने में रुकावटें आ रही हैं। मुख्य सचिव ने इन बाधाओं को तत्काल दूर करने का निर्देश दिया है। ये जिले नेटवर्क से नहीं जुड़े

अररिया, किशनगंज, अरवल, जहानाबाद, खगड़िया, नवादा, भागलपुर, सुपौल और गोपालगंज में अब तक इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण शुरू नहीं हुआ है। कैमूर में नवंबर तक आपूर्ति शुरू होगी : शिवहर, सीतामढ़ी और बक्सर को हाल में नेटवर्क से जोड़ा गया है। वहीं कैमूर (भभुआ) में स्टील इन्फ्रास्ट्रक्चर और सिटी गेट स्टेशन का निर्माण कार्य जारी है, जहां नवंबर तक गैस आपूर्ति शुरू हो जाएगी। बाधओं को दूर करें डीएम मुख्य सचिव ने कहा कि कम प्रगति वाले जिलों में घरेलू पीएनजी कनेक्शनों का ग्राफ बढ़ाने के लिए प्रशासनिक सहयोग में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। एनओसी सहित अन्य बाधाओं को डीएम जल्द दूर करें। बिहार में रसोई गैस सिलेंडर के झंझट से मुक्ति और सुरक्षित पीएनजी पहुंचाने की योजना रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। राज्य के 38 में से 28 जिलों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क स्थापित हुआ है। अब तक महज 1,52,686 घरों में ही पीएनजी के लाइव कनेक्शन पहुंचे हैं। यह मार्च 2026 तक तय किए गए कुल लक्ष्य का मात्र 40.44% है। वहीं अब तक 9 जिले नेटवर्क से जुड़े ही नहीं हैं। योजना की सुस्त रफ्तार पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने समीक्षा बैठक की। इस बैठक में सभी जिलाधिकारियों और तेल-गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों को मिशन मोड में काम करने की हिदायत दी गई। समीक्षा में सामने आया कि एनएचएआई से अनुमति मिलने में देरी और स्थानीय स्तर पर भूमि आवंटन व अतिक्रमण के कारण पाइपलाइन बिछाने में रुकावटें आ रही हैं। मुख्य सचिव ने इन बाधाओं को तत्काल दूर करने का निर्देश दिया है। ये जिले नेटवर्क से नहीं जुड़े

अररिया, किशनगंज, अरवल, जहानाबाद, खगड़िया, नवादा, भागलपुर, सुपौल और गोपालगंज में अब तक इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण शुरू नहीं हुआ है। कैमूर में नवंबर तक आपूर्ति शुरू होगी : शिवहर, सीतामढ़ी और बक्सर को हाल में नेटवर्क से जोड़ा गया है। वहीं कैमूर (भभुआ) में स्टील इन्फ्रास्ट्रक्चर और सिटी गेट स्टेशन का निर्माण कार्य जारी है, जहां नवंबर तक गैस आपूर्ति शुरू हो जाएगी। बाधओं को दूर करें डीएम मुख्य सचिव ने कहा कि कम प्रगति वाले जिलों में घरेलू पीएनजी कनेक्शनों का ग्राफ बढ़ाने के लिए प्रशासनिक सहयोग में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। एनओसी सहित अन्य बाधाओं को डीएम जल्द दूर करें।  

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